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रियो पैरालिंपिक: सुंदर गुर्जर ने कोच पर लगाया साजिश का आरोप

सुंदर को अंग्रेजी नहीं आती है और उनके पास कोई ट्रांसलेटर भी नहीं था।

रियो पैरालिंपिक: सुंदर गुर्जर ने कोच पर लगाया साजिश का आरोप
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ब्राजील. पैरालिंपिक में जैवेलिन थ्रो के एथलीट सुंदर गुर्जर ने एसएआइ (भारतीय खेल प्राधिकरण) के कोच दीपक भरद्वाज पर साजिश का आरोप लगाया है। सुंदर गुर्जर ने मुकाबले के लिए न उतर पाने के लिए एसएआइ को जिम्मेदार ठहराया है।
बात दें कि देवेंद्र झाझड़िया ने पैरालिंपिक में जैवेलिन थ्रो की जिस एफ46 कैटेगरी में गोल्ड जीता, उसमें सुंदर सिंह गुर्जर भी मेडल के दावेदार थे। पर वे मुकाबले के लिए उतर ही नहीं सके। सुंदर को एक मिनट 20 सेकंड देर से पहुंचने के कारण डिसक्वालिफाई कर दिया गया था। हालांकि पैरालिंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने मामले की जांच की बात कही है।
तो वहीं सुंदर ने आब पूरा मामला सामने रखते हुए बताया कि वह अंग्रेजी नहीं जानते हैं। इसलिए जब उनका नाम पुकारा गया था तो उन्हें नहीं बताया गया था। यह बात चौंकाने वाली है कि अंग्रेजी न जानने के कारण भारतीय एथलीट को एक ट्रांसलेटर तक उपलब्ध नहीं करवाया गया था। जिसकी वजह से भारत को एक मेडल गंवाना पड़ा। सुंदर ने इस पूरे मामले में अपने कोच दीपक भरद्वाज को जिम्मेदार ठहराया है वही इसे एक साजिश भी करार दिया है।
इसी साल मार्च में पैरा-नेशनल में 68.42 मीटर जैवेलिन फेंकने वाले सुन्दर गुर्जर ने कहा कि, जब उनका नाम पुकारा जा रहा था तो उन्हें सूचित नहीं किया गया। अपनी बात रखते हुए सुन्दर भावुक हो गए और कहा कि भगवन एक न एक दिन उनका साथ जरूर देगा। सुन्दर ने कहा कि, "अब जो हो गया वह हो गया। अगले साल ही वर्ल्ड चैम्पियनशिप है। मैं उसमें खुद को साबित कर दूंगा। मुझे दुख है कि मैं बिना मेडल के ही वापस आऊंगा।'
क्या था पूरा मामला-
जैवेलिन थ्रो (एफ46) में देवेंद्र झाझड़िया के साथ दो अौर भारतीयों रिंकू हुड्डा (पांचवां स्थान) और सुंदर सिंह गुर्जर ने हिस्सा लिया। तीनों में सुंदर मेडल के सबसे सबसे बेहतर दावेदार थे। पीसीआई के ट्रेजरर धीरज उपाध्याय ने बताया कि, 'सुंदर सिंह इवेंट से पहले सभी खिलाड़ियों के साथ वॉर्मअप कर रहे थे। जब खिलाड़ियों का नाम पुकारा गया तब सभी आ गए। सुंदर सिंह का नाम कई बार पुकारा गया, लेकिन वे वक्त पर नहीं पहुंच सके। शायद वॉर्मअप पर उनका ध्यान ज्यादा रहा और वे नाम नहीं सुन पाए।'.
हालांकि सुंदर के जीजा शेर सिंह खटाना ने दावा किया कि इस पूरे मामले में साजिश हुई है। सुंदर जब वॉर्मअप के बाद कॉलरूम में लौट रहे थे, तब उन्हें किसी ने माला पहनाई थी, उसकी महक से वे कुछ पल के लिए होश खो बैठे और उन्हें देर हो गई। वहीं, सुंदर के भाई ने दावा किया कि अंग्रेजी नहीं समझ पाने की वजह से ऐसा हुआ। हालांकि, ऑर्गनाइजर्स ने उन ज्यादातर खिलाड़ियों को ट्रांसलेटर मुहैया कराए थे जो अंग्रेजी नहीं समझते। लेकिन सुंदर के पास कोई ट्रांसलेटर नहीं था।
गौरतलब है कि सुन्दर ने इसी साल दुबई में गोल्ड जीत था। इसके अलावा, इसी साल दुबई में आईपीसी एथलेटिक्स ग्रांप्री में गोल्ड जीता था। वहीं सुंदर और झाझड़िया में विवाद भी हुआ था , जानकारी के मुताबिक 2 अगस्त 2016 को शेर सिंह खटाना ने आरोप लगाया था कि झाझड़िया सुंदर को डोप टेस्ट में फंसाने के लिए साजिश रच रहे हैं। उन्हें जूस या खाने में प्रतिबंधित पदार्थ दिया जा सकता है।
इस मामले में भारतीय कोच पर सवाल उठ रहे हैं। सुंदर जब कॉल रूम तक पहुंच गए थे तो सिर्फ 1 मिनट 20 सेकंड की देरी हुई थी। सुंदर बताते हैं कि मुझसे सिर्फ 2 मिनट पहले ही देवेंद्र झाझड़िया ने एंट्री की थी। मेरा बैग साइड में रखा था, मैं उसे लेने गया। इसके बाद मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया। साई के कोच दीपक भारद्वाज वहां थे। भारतीय पैरालिंपिक कमेटी और साई के भी कई अधिकारी वहां मौजूद थे। उन लोगों ने सुंदर का साथ नहीं दिया न ही कोई आवाज उठाई गई।
पैरालिंपिक्स में भारत के पास कुल 12 मेडल ही आए हैं। देवेंद्र से पहले हाई जम्प में मरियप्पन थंगावेलु ने गोल्ड और वरुण सिंह भाटी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। दीपा मलिक ने एक दिन पहले शॉटपुट में सिल्वर जीता था। अब तक हुए पैरालिंपिक गेम्स में भारत के मेडल्स की संख्या 12 हो गई है। इनमें 4 गोल्ड, 4 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज हैं।
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