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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की BCCI की ''एक राज्य, एक वोट'' नीति, नई नीति बनाने के लिए दिया 4 हफ्ते का समय

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को एक मसौदे संविधान को मंजूरी देते हुए ''एक राज्य, एक वोट'' नीति को रद्द कर दिया। अदालत के तीन न्यायाधीशीय खंडपीठ ने अपने संशोधित संविधान को पंजीकृत करने के लिए बीसीसीआई को चार हफ्ते का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की BCCI की  एक राज्य, एक वोट नीति, नई नीति बनाने के लिए दिया 4 हफ्ते का समय
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सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को एक मसौदे संविधान को मंजूरी देते हुए 'एक राज्य, एक वोट' नीति को रद्द कर दिया। अदालत के तीन न्यायाधीशीय खंडपीठ ने अपने संशोधित संविधान को पंजीकृत करने के लिए बीसीसीआई को चार हफ्ते का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश को संशोधित करते हुए, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, विदर्भ और रेलवे को पूर्ण सदस्यता दी। अदालत ने महाराष्ट्र और विदर्भ के लिए एक राज्य एक वोट नीति को भी हटा दिया है।

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आपको बता दें कि 5 जुलाई को अपनी आखिरी सुनवाई में सुप्रिम कोर्ट ने कहा था, कि लोढा समिति द्वारा एक राज्य की एक वोट सिफारिश के साथ-साथ शीतकाल अवधि की सिफारिशों पर दूवारा से विचार किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के तीन न्यायाधीशों के पैनल ने शीतकाल अवधि में कुछ बदलाव किए हैं। संशोधन के अनुसार, बीसीसीआई पदाधिकारियों के लिए शीतकाल अवधि लगातार दो शर्तों के बाद होगी।

शीतकाल अवधि का मतलब है, कि संगठन में एक अलग पद के लिए आवेदन करते समय एक एसोसिएशन या बीसीसीआई में पद पर रहने वाले व्यक्ति को शीतकाल चरण से गुजरना जरूरी नहीं है। हालांकि, अभी तक के इस बारे में कुछ भी तय नहीं किया गया है।

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