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11 हजार वॉल्ट का करंट झेलने के बाद भी देवेंद्र ने नहीं मानी हार

हाथ कटने को लेकर देवेंद्र झाजरिया ने बताई पूरी कहानी

11 हजार वॉल्ट का करंट झेलने के बाद भी देवेंद्र ने नहीं मानी हार
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नई दिल्ली. राजस्थान के सपूत देवेंद्र झाजरिया ने रियो पैरालिम्पिक्स 2016 में भाला फेंकस्पर्धा में गोल्ड मैडल जीत इतिहास रच दिया है। बता दें कि देवेंद्र भारत के पहले एथलीट हैं जिन्होंने ओलंपिक या पैरालंपिक में दो व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते हैं। रियो पैरालंपिक में भारत के अब 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक के साथ कुल 4 पदक हो गए हैं और भारत पदक तालिका में 31वें पायदान पर चल रहा है।
देवेंद्र की राह में कई मुश्किलें थीं। शारीरिक समस्या के साथ ही आर्थिक चुनौतियां भी थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। राजस्थान पत्रिका के मुताबिक, एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने साथ हुए हादसे के बारे में बताया, जब मैं आठ या नौ साल था, मुझे बिजली का करंट लगा था। मैं गांव में एक पेड़ पर चढ़ रहा था। उसी दौरान मेरा हाथ बिजली की तार को छू गया। वह 11,000 वॉल्ट का तार था। उस हादसे के बाद मेरा एक हाथ खराब हो गया।
बचपन में करंट से हुए हादसे के कारण हाथ कट जाने के बावजूद एथेंस ओलिंपिक 2004 में गोल्ड जीतने वाले देवेंद्र झाझड़िया के संघर्ष की दास्तां अब प्रदेश बच्चे पाठ्यपुस्तक में पढ़ेंगे। एसआईईआरटी के नए पाठ्यक्रम के अनुसार राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल की ओर से प्रकाशित चतुर्थ कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक में वर्ल्ड रिकॉर्डधारी जेवलिन थ्रोअर देवेंद्र की कहानी इच वन इज यूनीक शीर्षक से शामिल की गई है।
शुरू में 1981 में जन्मे देवेंद्र का हाथ 8 साल की उम्र में पेड़ पर चढ़ते समय करंट आने से हुए हादसे के कारण काटना पड़ा। उन्होंने 2002 में कोरिया में हुए खेलों में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2004 में एथेंस पैराओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता और 62.15 मीटर जेवलिन फेंककर नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। उन्हें 2004 में अर्जुन अवार्ड और 2012 में पद्मश्री अवार्ड भी मिला।
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