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पहले बेटी को हॉस्टल भेजने पर किया झगड़ा, अब गोल्ड मेडल जीतने पर कुछ इस अंदाज में दी बधाई

विश्व जूनियर तीरंदाजी चैंपियनशिप (World Youth Archery Championships) में मिक्स इवेंट का गोल्ड जीतने वाली रागिनी मार्को (Markoo Raginee) और सुखबीर सिंह (Sukhbeer Singh) के तीरंदाज बनने की कहानी काफी दिलचस्प है।

पहले बेटी को हॉस्टल भेजने पर किया झगड़ा, अब गोल्ड मेडल जीतने पर कुछ इस अंदाज में दी बधाई
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विश्व जूनियर तीरंदाजी चैंपियनशिप (World Youth Archery Championships) में मिक्स इवेंट का गोल्ड जीतने वाली रागिनी मार्को (Markoo Raginee) और सुखबीर सिंह (Sukhbeer Singh) के तीरंदाज बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। थ्रोबॉल में राष्ट्रीय चैंपियन जबलपुर की रागिनी को उनके पिता ने जब मध्य प्रदेश तीरंदाजी अकादमी के हॉस्टल में भेजा तो ये बात रिश्तेदारों को यह बात पसंद नहीं आई । सभी ने कहा कि लड़की है हॉस्टल में भेजने से बिगड़ जाएगी।

रागिनी की मानें तो उनके एएसआई पिता से सभी रिश्तेदारों ने झगड़ा कर लिया। घर में तनाव का माहौल पैदा हो गया, लेकिन पिता ने रागिनी को हॉस्टल भेजने की जिद नहीं छोड़ी। 2017 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर रागिनी ने अपने पिता के फैसले को सही साबित किया। रागिनी बताती है कि आज वही रिश्तेदार पिछले दो दिनों से उन्हें फोन पर लगातार बधाईयां देते हुए दुलार रहे हैं।

सुखबीर सिंह की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं

फाइनल में 80 में से 79 का स्कोर करने वाले फिरोजपुर के सुखबीर सिंह हैंडबॉल में नेशनल लेबल तक खेल चुके थे। सुखबीर ने कहा कि घर वालों को हैंडबॉल पसंद नहीं था। वह स्कूल भी कम जाते थे। उन्होंने कहा कि बड़े भाई गुरलाल ने 2016 में एक दिन उनसे कहा कि हैंडबॉल छोड़ धनुष थाम ले। उसके बाद से वह पंजाबी यूनिवर्सिटी में कार्यरत भारतीय टीम के कोच सुरेंदर सिंह के साथ जुड़ गए। बता दें कि सुखबीर सिंह के बड़े भाई गुरलाल भी नेशनल लेबल के तीरंदाज रह चुके थे।

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