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Independence Day 2019 : भारतीय सेना के पांच सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी, जिन्होंने खेल में बढ़ाया देश का मान

Happy Independence Day 2019 15 अगस्त 2019 को भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस (Happy Independence Day 2019) मनाने जा रहा है। इस मौके पर हम भारतीय सेना के उन पांच सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने खेल से भारत का मान बढ़ाया है।

Independence Day 2019 : भारतीय सेना के पांच सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी, जिन्होंने खेल में बढ़ाया देश का मान

Happy Independence Day 2019 (स्वतंत्रता दिवस 2019) भारत 15 अगस्त 1947 (15 August 1947) को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। इस दिन को हमलोग हर साल स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के रूप में मनाते हैं। 15 अगस्त 2019 को भारत अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस (Happy Independence Day 2019) मनाने जा रहा है। इस मौके पर हम भारतीय सेना के उन पांच सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने खेल से भारत का मान बढ़ाया है।

1. राज्यवर्धन सिंह राठौर (शूटिंग)

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ 90 के दशक की शुरुआत में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से ग्रेजुएट से थे और 2013 तक सदस्य के रूप में कार्य किया। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेना से कर्नल (Colonel) के रूप में स्वैच्छिक रिटायरमेंट ली। उनका राजनीतिक करियर उनके खेल करियर जितना ही सफल रहा है। राज्यवर्धन सिंह राठौर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में खेलमंत्री बने थे। राजीव गांधी खेल रत्न के अलावा उन्हें सैन्य उत्कृष्टता के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से भी सम्मानित किया गया था। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भारत के लिए तीन राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक (Gold Medals) और एक ओलंपिक रजत पदक (Olympic Silver) जीता है।


2. मिल्खा सिंह (एथलेटिक्स)

सेना ने एक एथलीट के रूप में मिल्खा सिंह के विकास में न केवल एक प्रमुख भूमिका निभाई, बल्कि उन्होंने खेल को 'फ्लाइंग सिख' से भी परिचित कराया। हालांकि भारतीय सेना में प्रवेश करना मिल्खा सिंह के लिए इतना आसान नहीं था। वह अपने चौथे प्रयास में सेना में शामिल हुए थे। एथलेटिक्स में उनका परिचय सिकंदराबाद में पोस्टिंग के दौरान हुआ। मिल्खा सिंह ने भी अपने विकास में सेना की भूमिका को स्वीकार किया है। मिल्खा सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में व्यक्तिगत एथलेटिक्स का स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय एथलीट थे, जब तक कि कृष्णा पूनिया ने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में डिस्कस थ्रो का स्वर्ण पदक नहीं जीता था। उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीते।


3. जीतू राय (शूटिंग)

नेपाल में जन्मे शूटर जीतू राय की राष्ट्रीयता पर बहुत विवाद हुआ। हालांकि भारतीय सेना में उनके प्रवेश ने सभी अफवाहों को गलत साबित कर दिया। जीतू राय को देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने के मामले में अगले अभिनव बिंद्रा के रूप में जाना जाता है। 2006 में वह 11 गोरखा रेजिमेंट में सिपाही के रूप में शामिल हुए। वह इस समय नायब-सूबेदार के पद पर पहुंच गए हैं। जीतू राय विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। सेना ने जीतू राय को न केवल एक खेल कैरियर दिया, बल्कि उनका जीवन भी बदल दिया।


4. विजय कुमार (शूटिंग)

शूटर विजय कुमार ने विभिन्न राष्ट्रमंडल खेलों में पांच स्वर्ण पदक जीते हैं। वह डोगरा रेजिमेंट (16वीं बटालियन) में सूबेदार मेजर के रूप में कार्यरत थे। विजय कुमार 15 साल की सेवा के बाद 2017 में सेना से रिटायर हुए हैं। विजय कुमार ने कहा कि महासंघ, मेरे परिवार और सेना ने मेरे स्वर्ण पदक में बड़ी भूमिका निभाई है।


5. राम सिंह यादव (मैराथन)

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले भारत के केवल दूसरे मैराथन धावक राम सिंह यादव भारतीय सेना में हवलदार के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने मुंबई मैराथन के माध्यम से 2012 लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।


वह ओलंपिक के मैराथन इवेंट के लिए क्वालीफाई करने वाले दूसरे भारतीय एथलीट हैं। यादव से पहले शिवनाथ सिंह भारतीय एथलीट थे जिन्होंने मॉन्ट्रियल में 1976 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भाग लिया था।

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