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आधी टीम इंडिया के बल्लेे हुए सफेद, नाइकी ने नहीं बढ़ाया करार

मनीष पांडे, अक्षर पटेल और उमेश यादव को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में बिना स्टीकर के बैट से खेलते देखा गया था

आधी टीम इंडिया के बल्लेे हुए सफेद, नाइकी ने नहीं बढ़ाया करार
नई दिल्ली. भारतीय टीम कई बल्लेबाजों को मजबूरन इस वक्त सादे बल्ले से खेलना पड़ रहा है। हाल में हुई भारत-न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान भी आपने कई खिलाड़ियों को बिना किसी कंपनी के स्टीकर वाले बल्ले से बेटिंग करते हुए देखा होगा।
आपको बता दें कि अधिकतर खिलाड़ियों को दुनिया की सबसे बड़ी स्पोट्सवियर कंपनी नाइकी का करार है और अधिकतक खिलाड़ी नाइकी के स्टिकर वाले बल्ले से खेलते हैं। लेकिन टीम इंडिया से अपनी स्पॉन्सरशिप वापस ले ली है। कंपनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के अंजिक्य रहाणे, आर अश्विन और रविंद्र जडेजा के साथ अपने करार को रिन्यू नहीं करा। जिससे अब लगभग आधी टीम के बैट पर कोई स्टीकर नहीं है।
मनीष पांडे, अक्षर पटेल और उमेश यादव को न्यू जीलैंड के खिलाफ खेले गए वनडे में बिना स्टीकर के बैट से खेलते देखा गया था। वहीं केधार जाधव के बैट पर उसे बनाने वाले का लेबल लगा हुआ था। भारत में क्रिकेट बैट को स्पॉन्सर एक महंगी मार्केटिंग एक्साइज है। टॉप प्लेयर्स जैसे विराट कोहली, एम एस धोनी के बल्ले पर एक साल के लिए अपना लोगो लगाने के लिए कंपनियों को 7 से 10 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
वहीं नाइकी इंडिया बुरे दौर से गुजर रही है और 2014-15 में उसका घाटा 500 करोड़ से ज्यादा का है। वहीं सूत्रों का कहना है कि नाइकी इंडिया की तरफ से मेरठ में बल्ला बनाने वाली किसी कंपनी के पास दो साल से कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं गया है। नाइकी क्रिकेट में पैसा लगाने वाला सबसे बड़ा स्पॉन्सर बना हुआ है। टीम की क्रिकेट किट को कंपनी करीब 60 करोड़ रुपए हर साल बीसीसीआइ को देकर स्पॉन्सर करती है। हालत यह है कि नाइकी को लॉस कम करने के लिए भारत में 30 प्रतिशत स्टोर्स बंद करने पड़े।'
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