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पीएमओ ने ''नरसिंह डोप टेस्ट'' की जांच सीबीआइ को सौंपी

पिछले महीने नरसिंह को ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित करने के अलावा उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया था।

पीएमओ ने
नई दिल्ली. भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने शुक्रवार (16 सितंबर) को बताया कि सीबीआई ने दागी पहलवान नरसिंह यादव के डोपिंग प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले को जांच एजेंसी के पास भेजा था। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और उनसे आग्रह किया था कि नरसिंह के मामले को आगे की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के पास भेजा जाए।
बृज भूषण ने कहा, ‘प्रधानमंत्री कार्यालय ने नरसिंह के मामले को आगे की जांच के लिए सीबीआई के पास भेज दिया है और पता चला है कि पहलवान के डोपिंग प्रकरण में कार्रवाई शुरू हो गई है।’
खेल पंचाट ने पिछले महीने नरसिंह को ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित करने के अलावा उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया था जिससे उनका करियर खतरे में पड़ गया है। तब से डब्ल्यूएफआई इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।
ओलंपिक खेलों की शुरुआत से लगभग 20 दिन पहले नरसिंह प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजीटिव पाए गए थे और पहलवान ने अपने खिलाफ षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके खाने या पीने की चीजों के साथ छेड़छाड़ की गई। नरसिंह हालांकि छेड़छाड़ को लेकर कोई ‘वास्तविक’ सबूत पेश नहीं कर पाए जिसके कारण महाराष्ट्र के इस पहलवान को रियो ओलंपिक खेलों की पुरुष 74 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करने से प्रतिबंधित कर दिया गया।
खेलों के दौरान नरसिंह की बाउट से सिर्फ तीन दिन पहले वाडा ने उन्हें क्लीनचिट दिए जाने के खिलाफ खेल पंचाट में अपील की और डोप परीक्षण में विफल रहने के लिए उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि रियो में सुनवाई के दौरान वाडा ने कहा था कि अगर भारत की आपराधिक अदालत अगर बाद में कोई फैसला देती है जिसमें कथित छेड़छाड़ की पुष्टि होती है जो तदर्थ समिति के फैसले की स्विट्जरलैंड का उच्चतम न्यायालय समीक्षा करेगा। खेल पंचाट स्विट्जरलैंड में ही स्थित है।
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