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किस्मत अच्छी थी जो पढ़ने में फिसड्डी थाः पुलैला गोपीचंद

इंजीनियरिंग की परीक्षा में फेल होने के बाद भी मैंने खेलना जारी रखा और आज मैं यहां हूं: गोपीचंद

किस्मत अच्छी थी जो पढ़ने में फिसड्डी थाः पुलैला गोपीचंद
नई दिल्ली. साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसी ओलिंपिक पदक विजेता खिलाड़ियों के कोच पुलेला गोपीचंद ने कहा- मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं था। आईआईटी की परीक्षा में असफल होने के बाद मेरी राह बदल गई और मेरा खेल के प्रति रुझान बढ़ने लगा....
खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए देश भर में सर्वश्रेष्ठ कोच बनकर उभरे 42 वर्षीय गोपीचंद ने कहा- किसी व्यक्ति के खेल जीवन के लिए किस तरह माता-पिता का सहयोग और संयोग महत्वपूर्ण होता है। मेरा भाई और मैं दोनों खेलते थे। वह बहुत अच्छा खेलता था, लेकिन अब मैं महसूस करता हूं कि मैं भाग्यशाली था, जो पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं था। मेरा भाई राज्य चैंपियन था।
उसने आईआईटी की परीक्षा दी और पास हो गया। इसके बाद वह आईआइटी चला गया और खेलना बंद कर दिया। मैंने भी इंजीनियरिंग की परीक्षा दी और असफल हो गया। इसके बाद भी मैंने खेलना जारी रखा और आज मैं यहां हूं। मैं मानता हूं कि आपको फोकस करना चाहिए और कई बार भाग्य भी साथ देता है।
2001 में ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन खिताब जीतने वाले गोपीचंद दूसरे भारतीय थे। इसके बाद उन्होंने खेल से संन्यास का फैसला लिया और हैदराबाद में अपनी अकादमी शुरू की। हालांकि अकादमी की शुरुआत करने का सफर उनके लिए आसान नहीं था। गोपीचंद को काफी भटकना पड़ा और तमाम लोगों ने उन्हें किसी भी तरह की आर्थिक मदद देने से इंंकार कर दिया।
ऐसी ही एक घटना के बारे में बताते हुए गोपीचंद ने कहा- मुझे याद है कि कुछ साल पहले मैं कुछ बड़ी कंपनियों के पास गया था। मुझे लगातार तीन दिन तक ऑफिस के बाहर इंतजार करना पड़ा। बैडमिंटन के लिए उन्होंने कुछ मदद करने को कहा, लेकिन सुबह 9 बजे से शाम 5.30 बजे तक इंतजार करने के बाद मुझे सीनियर अफसर ने आकर कहा कि बैडमिंटन वैश्विक खेलों में बहुत बड़ी भूमिका नहीं रखता है।
वह आखिरी दिन था कि जब मैं किसी के पास प्रायोजन के लिए मदद मांगने गया था। उसी रात मैं घर वापस आया और अपने मकान को गिरवी रखने का फैसला लिया। इसके लिए मैं अपने माता-पिता और पत्नी का शुक्रगुजार हूं। इस तरह से हमारी अकादमी की शुरुआत हो सकी।
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