Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

कभी झोपड़ी में रहती थी भारत की सबसे तेज ''महिला धावक''

महाराष्ट्र की ज्योति मुंबई मैराथन 2017 में प्रथम रहीं थीं।

कभी झोपड़ी में रहती थी भारत की सबसे तेज
मुंबई. ज्योति गावते भारतीय खेलों में कोई जाना-पहचाना नाम नहीं है। हाल मे हुई मुंबई मैराथन में सिर्फ 02:50:53 सेंकेड में अपनी दौड़ पूरी करने वाली इस महिला धावक ने सफलता के कीर्तिमान रच दिए हैं। भारतीय महिलाओं में महाराष्ट्र की ज्योति दो घंटे 50 मिनट 53 सेकेंड से प्रथम रहीं थीं। अपने कॅरियर में दूसरी बार मुंबई मैराथन को इतने कम समय में पूरा करने वाली वह पहली भारतीय एथलीट बन गईं। इसके लिए ज्योति को भारत की सबसे तेज महिला घावक का नाम मिला है।
मैराथन जीतने के बावजूद भी 29 साल की ज्योति के चेहरे खुशी की एक झलक तक नहीं थी। द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति इससे पहले साल 2011 में पहली बार मुंबई मैराथन जीती थीं। मैराथन जीतने के बाद भी इस एथलिट के पास पेट पालने को कोई रोजगार नहीं था। ज्योति ने कहा कि, 'पहली मैराथन के जीतने के बाद मैंने सोचा था कि मुझे एक खिलाड़ी के तौर पर पहचान मिलेगी। साथ ही उसके घर की माली हालत में भी सुधार होगा।
पर ऐसा हुआ नहीं। ज्योति के पिता, एक स्थानीय बैंक में 'सफाई कर्मचारी हैं, पूरे परिवार का बोझ ज्योति का पिता के कांधों पर ही था, कुछ समय पहले ही पिता रिटायर हो गए। वहीं मेरा भाई नक्सली क्षेत्र में पुलिस में काम करता है जो अब महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में तैनात है। वह एक नक्सली क्षेत्र है जहां हमेशा खतरा बना रहता है।
आइए आपको बताते हैं ज्योति के एक आम लड़की से एथलिट बनने की कहानी-
छोटी सी उम्र में ज्योति की प्रतिभा पहचानने वाले उसके कोच रवि रकात्ला कहते हैं कि, ज्योति और उसका परिवार पिछले साल तक लकड़ी के एक झोपड़ी में रहते थे। इस तरह से ज्योति को एक एथलिट के रुप में तैयार करना मिश्किल था। ज्योति ने अपनी खुद की बचत और उसके बड़े भाई के जो पैसे भेजे उससे ही अपनी फैमली के लिए दो मंजिला मकान बनाया है। अवार्ड के रुप में मिले पैसे वह अपनी डाइट और दौड़ने के लिए जूते बगरैह खरीदने में ही खर्च करती है।
ज्योति ने कहा कि 2011 में पटाया मैराथन और प्छले साल गुवाहाटी में सैफ खेलों में 42.195 किमी दौ़ड़ में दो बार भारत का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद, उसे भारतीय राष्ट्रीय शिविर से यह कहकर नहीं रखा गया था कि उसे अपनी प्रेक्टिस और प्रशिक्षण में सुधार की जरुरत है। इसलिए उसने उम्मीद ही छोड़ दी थी। बहरहाल ज्योति अपनी इस जीत पर खुश हैं और उन्होंने कहा कि, यह अच्छा है कि मैंने इस बार ज्यादा उम्मीद नहीं की थी अगर आप खुद से ज्यादा उम्मीद करते है और वो पूरी न हो तो बहुत तकलीफ होती है।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-
Next Story
Top