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स्वतंत्रता दिवस 2018: आजादी के 71 वर्षः भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक पल

भारत अपनी आजादी के 71 सालों का जश्न मना रहा है और इन सालों में देश ने हर क्षेत्र में कई यादगार उपलब्धियां हासिल की। खेल जगत में भी भारत ने कई कीर्तिमान अपने नाम की। खिलाड़ियों ने अपनी सफलताओं से दिल जीतने के साथ दुनिया में देश का मान और बढ़ा दिया।

स्वतंत्रता दिवस 2018: आजादी के 71 वर्षः भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक पल
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भारत अपनी आजादी के 71 सालों का जश्न मना रहा है और इन सालों में देश ने हर क्षेत्र में कई यादगार उपलब्धियां हासिल की। खेल जगत में भी भारत ने कई कीर्तिमान अपने नाम की।खिलाड़ियों ने अपनी सफलताओं से दिल जीतने के साथ दुनिया में देश का मान और बढ़ा दिया। आगे जानते हैं आजाद भारत के कुछ ऐसे सबसे बड़े व खास पल जो दुनिया कभी नहीं भूल पाएगी।

1983, 2007 और 2011 वर्ल्ड कप

1983 में एक ऐसा अवसर आया जिसने भारतीय क्रिकेट को बदलकर रख दिया। इंग्लैंड के लॉर्ड्स मैदान पर भारत ने कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज जैसी ताकतवर टीम को फाइनल में हराकर पहली बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। हालांकि इसके बाद बड़ी सफलता के लिए भारत को लंबा इंतजार करना पड़ा।

फिर 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहला टी20 विश्व कप खिताब जीता। फिर उसके बाद 28 साल के लंबे इंतजार के बाद धोनी की ही कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हारकर दूसरी बार वनडे विश्व कप खिताब अपने नाम किया।

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1948, 52, 56, 64, 75 और 80 में हॉकी की महान सफलताएं

आजादी से पहले भारत हॉकी में तीन बार ओलंपिक चैंपियन बन चुका था, लेकिन आजादी के बाद ऐसा सुनहरा दौर आएगा किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। जब 1948 से 1956 के बीच भारतीय टीम ने लगातार तीन ओलंपिक गोल्ड मेडल जीते, इसके बाद 1964 के टोक्यो ओलंपिक और 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भी हम चैंपियन बने, इतना ही नहीं 1975 में इस बीच भारत ने पहली बार हॉकी विश्व कप भी अपने नाम किया।

'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह ने रचा इतिहास

फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर पूर्व भारतीय एथलीट मिल्खा सिंह ने 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स (कार्डिफ) की 440 गज दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। ऐसा पहला मौका था जब इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर किसी भारतीय खिलाड़ी ने ऐसी सफलता हासिल की थी। बता दें कि मिल्खा सिंह एशियन गेम्स में भी चार बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।

गोल्डन बॉय अभिनव बिंद्रा का कमाल

ओलंपिक इतिहास में भारत ने सिर्फ टीम गेम (हॉकी) में गोल्ड मेडल जीता था। आजतक इस महामंच पर व्यक्तिगत गोल्ड मेडल कोई भी खिलाड़ी नहीं जीत पाया था। ये मौका आया 2008 के बीजिंग ओलंपिक ऐसा पहला मौका आया जब भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर रायफल में ओलंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय बन गए।

2016 ओलंपिक की यादगार सफलता

भारतीय महिला आजतक कभी भी ओलंपिक में कांस्य पदक से आगे नहीं बढ़ पाई थीं। फिर 2016 रियो ओलंपिक में भारत की बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने महिला सिंगल्स के फाइनल में पहुंचकर ओलंपिक इतिहास में रजत पदक हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

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