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इस पदक से गौरव के कॅरियर को मिली संजीवनी

हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल से बाहर होने के कारण था चर्चा में था गौरव।

इस पदक से गौरव के कॅरियर को मिली संजीवनी
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कमर की चोट और करीबी मुकाबले हारने से विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप से पहले गौरव बिधूड़ी का आत्मविश्वास टूटा हुआ था, लेकिन भारत के लिए यहां एकमात्र पदक पक्का करके उसके कॅरियर को नयी संजीवनी मिल गई।

जुलाई के अंत तक गौरव भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थे लेकिन फिर एशियाई मुक्केबाजी परिसंघ ने उन्हें वाइल्ड कार्ड दिया। मुकाबले के बाद गौरव ने कहा, जब मुझे वाइल्ड कार्ड के बारे में पता चला तो मैं हर कोच से पूछता रहा कि क्या यह सही है।

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मैने सभी से पूछा और सबने जब कह दिया कि हां ये सच है तो ही मैने चैन की सांस ली। दिल्ली का यह मुक्केबाज भारतीय सर्किट पर चर्चा का विषय था क्योंकि हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल से बाहर होने का उसका रिकार्ड हो गया था।

ताशकंद में एशियाई चैंपियनशिप में दो बार वह विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने का मौका चूका। उसने कहा, मैं हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल में हार गया। यहां भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा तो नकारात्मक सोच मुझ पर हावी होने लगी कि कहीं फिर ऐसा ना हो जाए।

लेकिन फिर मुझे लगा कि मैं यह मिथक तोड़ सकता हूं। एक खिलाड़ी के लिए दिमाग पर काबू रखना बहुत मुशिकल होता है। मेरे दिमाग में भी हर तरह के विचार आ रहे थे। मुझे दिमाग से कई तरह की आवाजें आ रही थी जो सिर्फ मैं सुन सकता था।

गौरव अगर कल सेमीफाइनल जीत जाता है तो कांस्य से बेहतर पदक जीतने वाला अकेला भारतीय मुक्केबाज होगा। गौरव बेंटमवेट ( 56 किलो ) सेमीफाइनल में आज अमेरिका के ड्यूक रेगान से खेलेंगे।

अब तक नहीं बदला कांसे का रंग

विजेंदर सिंह (2009) , विकास कृष्णन (2011) और शिव थापा (2015) विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। गौरव गुरुवार को इन तीनों से एक कदम आगे निकलना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अतीत में क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में उसके हारने का मलाल दूर हो जाएगा।

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