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Dhyan Chand Death Anniversary: हॉकी के जादूगर ने ठुकराया था हिटलर का ये ऑफर

Dhyan Chand Death Anniversary: विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी पद्म भूषण मेजर ध्यानचंद जी की आज पुण्यतिथि है, देश और विश्व उन्हें श्रद्धांजलि दी रहा है। दुनिया उन्हें हॉकी के जादूगर के नाम से जानती है । उन्होंने अपने असाधरण खेल के माध्यम से भारत को विश्व में पहचान दिलाई।

Dhyan Chand Death Anniversary: हॉकी के जादूगर ने ठुकराया था हिटलर का ये ऑफर
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हॉकी जादूकर ध्यानचंद की पुण्यतिथि

Dhyan Chand Death Anniversary: विश्व के सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाड़ी पद्म भूषण मेजर ध्यानचंद जी की आज पुण्यतिथि है, देश और विश्व उन्हें श्रद्धांजलि दी रहा है। दुनिया उन्हें हॉकी के जादूगर के नाम से जानती है । उन्होंने अपने असाधरण खेल के माध्यम से भारत को विश्व में पहचान दिलाई।

जब मेजर ध्यानचंद ने जर्मनी की सर्वश्रेष्ठ हॉकी टीम को 8-1 से ओलंपिक में हराया था। इस मैच के बाद हिटलर भी उनके मुरीद हो गए थे। भारत और जर्मनी के मैच के समय बारिश से जब मैदान गीला हो गया था और बिना स्पाइड वाले रबड़ के जूते फिसल रहे थे तो मेजर ध्यानचंद ने हाफ टाइम के बाद जूते उतार कर खेल शुरू किया और नंगे पांव खेलते समय मेजर ध्यानचंद ने बहुत ही बेतरीन गोल किए।

इस मैच में भारत ने जर्मनी को 8-1 से हराया था। मैच के अगले दिन हिटलर ने मेजर ध्यानचंद को मेडल पहनाते हुए उनकी पीठ थपथपाई थी। और हिटलर ने उन्हें जर्मनी में रुकने और आर्मी में कर्नल बनने का ऑफर भी दिया था। परन्तु मेजर ध्यानचंद ने उन्हें विनम्रता पूर्वक उनका ऑफऱ ठुकरा दिया था।

मेजर ध्यानचंद ब्रिटेन इंडियन आर्मी से पंजाब रेजिमेंट में लांस नायक के पद पर थे ये पद बहुत छोटा माना जाता था, जब हिटलर ने उन्हें अपने ही देश में रुकने के लुई कहा तो उन्होंने कहा था कि नही पंजाब रेजिमेंट पर मुझे गर्व है और भारत ही मेरी देश है

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में हुआ था । वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ीयो में से एक थे उन्होंने ओलंपिक में भारत को 3 स्वर्ण पदक दिलवाए थे । साथ ही मेजर ने एम्स्टर्डम में ओलम्पिक खेलों में भारत की और से सबसे ज़्यादा 14 गोल किए थे। मेजर ध्यानचंद ने अपने करियर में 1000 से अधिक गोल किए थे ।

भारत को वैश्विक खेल स्तर पर देश की अमिट छाप छोड़ने वाले मेजर ध्यानचंद ने देश विदेश के करोड़ों खेलप्रेमियों के प्ररेणा है। भारतीय खेल के इतिहास और देश का हर खेल प्रेमी मेजर ध्यानचंद का ऋणि है। उनका निधन 3 दिसंबर 1979 को दिल्ली में हुआ था। भारत में खेल दिवस 29 अगस्त इन्हें के जन्मदिन के दिन ही मनाया जाता है। इस दिन प्रतिभान खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है।

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