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CWG 2018: गोल्ड जीतने के बाद साइना ने कहा- पिता के लिए किसी से भी भिड़ जाऊंगी, कोच और सिंधू के बारे में ये कहा

राष्ट्रमंडल खेलों में मानसिक दबाव, हल्की चोट और बेमतलब के विवाद से जूझने वाली साइना नेहवाल अब जबकि महिला एकल की चैंपियन हैं तब वह अपने इस स्वर्ण पदक को 2012 के ओलंपिक कांस्य पदक से थोड़ा ही कम करके आंकती हैं।

CWG 2018: गोल्ड जीतने के बाद साइना ने कहा- पिता के लिए किसी से भी भिड़ जाऊंगी, कोच और सिंधू के बारे में ये कहा
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राष्ट्रमंडल खेलों में मानसिक दबाव, हल्की चोट और बेमतलब के विवाद से जूझने वाली साइना नेहवाल अब जबकि महिला एकल की चैंपियन हैं तब वह अपने इस स्वर्ण पदक को 2012 के ओलंपिक कांस्य पदक से थोड़ा ही कम करके आंकती हैं।

साइना ने शीर्ष वरीयता प्राप्त हमवतन पी वी सिंधू को एकल फाइनल में हराने के बाद कहा- मैं वास्तव में इसे अपने ओलंपिक पदक और विश्व में नंबर एक रैंकिंग के बाद सबसे महत्वपूर्ण मानती हूं। इसलिए मैं इसे वहीं कहीं स्थान दूंगी। यह मेरे पिता, मेरी मां और मेरे देश के लिए तोहफा है। चोट के कारण रियो ओलंपिक में निराशाजनक हार के बाद यह मेरे लिये बेहद भावनात्मक क्षण है।

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साइना ने मिश्रित टीम चैंपियनशिप में सभी मैच खेले

साइना ने मिश्रित टीम चैंपियनशिप में सभी मैच खेले और इसके बाद उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में हिस्सा लिया। साइना से पूछा गया कि लगातार खेलने के कारण क्या उनके पांवों की स्थिति कैसी है , उन्होंने कहा- वे जवाब दे चुके हैं। इस मैच से पहले साइना का सिंधू के खिलाफ रिकार्ड 3-1 था और उन्होंने इस अंतर को और बढ़ा दिया।

उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी और साथी के बारे में कहा- यह बराबरी का मुकाबला था यह मेरे लिये वास्तव में कड़ा था क्योंकि मैं पिछले 10-12 दिन से खेल रही थी। वह लंबे कद की है, उसके पांव लंबे हैं और मेरे से बेहतर कोर्ट को कवर करती है। मुझे इधर से उधर दौड़ना पड़ा।

अपने पिता को खेल गांव में प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेलों से हटने की धमकी तक दे डाली

साइना ने कहा- मैंने पिछले कुछ महीनों में पांच किग्रा वजन कम किया इससे मुझे कोर्ट कवर करने में मदद मिली। साइना के लिए खेलों की शुरूआत अच्छी नहीं रही थी। अपने पिता को खेल गांव में प्रवेश नहीं मिलने के कारण उन्होंने खेलों से हटने की धमकी तक दे डाली थी। उनके पिता को मान्यता पत्र मिला लेकिन इसके लिए साइना को आलोचनाएं झेलनी पड़ी। इसके बाद उन्हें चोट से भी जूझना पड़ा लेकिन वह खतरा नहीं बनी।

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उन्होंने खुलासा किया- टीम स्पर्धा में घुटने के नीचे पांव की चोट उभरकर सामने आयी और मैं तब भी खेलती रही। यह बड़ी समस्या नहीं थी। मुझे इससे उबरने में केवल दो तीन दिन का समय लगा। क्रिस्टी गिलमर के खिलाफ मेरा मैच लंबा खिंचा और मुझे लगता है कि वहां समस्या बढ़ गयी थी।

सिंधू के खिलाफ आज के फाइनल जैसा मैच क्या मानसिक जंग अधिक

साइना से पूछा गया कि क्या सिंधू के खिलाफ आज के फाइनल जैसा मैच क्या मानसिक जंग अधिक थी, उन्होंने कहा- आपको अपना खेल खेलना होता है। यह स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता है। लोग इसका आनंद लेते है। निश्चित तौर पर हम बहुत अधिक दबाव में थे। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं इनमें सफल रही।

विश्व की तीसरी नंबर की खिलाड़ी के खिलाफ खेलना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा- यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण मैच था। मैं गोपी सर का आभार व्यक्त करती हूं कि जिन्होंने पिछले तीन चार महीनों में मेरे खेल पर मेहनत की। मैं अपने फिजियो क्रिस्टोफर का आभार व्यक्त करती हूं जिन्होंने मेरी फिटनेस बनाये रखी।

इनपुट-भाषा

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