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क्रिकेट के खातिर घर बेचा, देश छोड़ा फिर दिखाया डेब्यू टेस्ट में जलवा

न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे ने अपने डेब्यू टेस्ट मैच में कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए। उन्होंने लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में दोहरा शतक जड़ दिया।

वह इंग्लैंड की सरजमीन पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी भी बन गए हैं।
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डेवोन कॉनवे (Devon Conway) ने अपने डेब्यू टेस्ट में एक के बाद एक कई रिकॉर्ड्स (Records) तोड़ दिए हैं। 

खेल। न्यूजीलैंड (New zealand) के सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे (Devon Conway) ने अपने डेब्यू टेस्ट में एक के बाद एक कई रिकॉर्ड्स (Records) तोड़ दिए हैं। कॉनवे ने क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स (Lord's) में इंग्लैंड (England) के खिलाफ टेस्ट सीरीज में दोहरा शतक जड़ दिया। इसके साथ ही वह इंग्लैंड की सरजमीन पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी भी बन गए हैं। उन्होंने लॉर्ड्स में अपने पदार्पण टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा स्कोर बनाने का पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का 25 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। लेकिन ये सब महज इत्तेफाक नहीं बल्कि इसके पीछे है कॉनवे की जी तोड़ मेहनत, और मेहनत भी सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी। उनकी जिंदगी की कहानी कोई सधारण नहीं बल्कि दिल को छू जाने वाली है।

जिस देश में पैदा हुए, जिस देश में जिंदगी के उतार चढ़ाव देखे, एक दिन उसी को छोड़ देना, ये निश्चित तौर पर कोई जुनूनी इंसान ही कर सकता है। और ऐसा ही जुनून था डेवोन कॉनवे में, क्रिकेट के प्रति जुनून। जिसने उन्हें अपना घर, कार यहां तक की देश छोड़ने पर भी मजबूर कर दिया। दरअसल साउथ अफ्रीका टीम में जगह ना मिलने पर 2017 में वह न्यूजीलैंड आ गए। क्योंकि वह न्यूजीलैंड में नए सिरे से जिंदगी और क्रिकेट को लेकर नई शुरुआत करना चाहते थे। जिसके बाद उनकी कड़ी मेहनत और लगन से उन्हें वो मुकाम मिला जिसके लिए उन्हें इतना त्याग करना पड़ा।

पिछले साल नवंबर में कॉनवे को न्यूजीलैंड की तरफ से टी20 में डेब्यू करने का मौका मिला था। जिसके बाद इस खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कॉनवे को बुधवार को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में अपना टेस्ट डेब्यू करने का भी मौका मिला। इस मौके को भुनाते हुए कॉनवे ने शानदार दोहरा शतक (200 रन) जड़ दिया।

कॉनवे का पहला प्यार क्रिकेट नहीं फुटबॉल था

कॉनवे साउथ अफ्रीका के जोहानिसबर्ग के बाहर हिस्से में पले-बढ़े। उनके पिता एक स्थानीय क्लब में फुटबॉल कोच रहे हैं। साथ ही उन्हें मोटरस्पोर्ट्स से भी काफी लगाव था। डेवोन कॉनवे का भी पहला प्यार फुटबॉल था। उन्होंने अपने दोस्त एल्टन जांटजी के साथ ट्रेनिंग की, जो स्प्रिंगबोक्स के लिए फुटबॉल खेले। हालांकि, बाद में कॉनवे ने पेशेवर रूप से क्रिकेट खेलना पसंद किया, क्योंकि उनका मानना था कि यह लंबे समय तक चल सकता है।

साउथ अफ्रीका के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जिमी कुक 12 साल की उम्र में कॉनवे के पहले कोच थे। कॉनवे को नील मैकेंजी की बल्लेबाजी काफी पसंद थी, जिन्हें कॉनवे ने टीवी पर खेलते हुए देखा था।

बता दें कि मार्च 2017 में जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में 26 साल के डेवोन कॉनवे ने घरेलू क्रिकेट में पहला दोहरा शतक ठोका। ये साउथ अफ्रीका की सरजमीं पर उनका आखिरी घरेलू मैच था। इसके बाद वे न्यूजीलैंड के होने वाले थे, जहां उनकी किस्मत में चार चांद लगने वाले थे। ऐसा ही हुआ भी और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर वो कर दिखाया जो शायद वे साउथ अफ्रीका में रहकर नहीं कर पाते।

वहीं घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद भी इस बाएं हाथ के इस बल्लेबाज को साउथ अफ्रीका की नेशनल टीम तो छोड़िए, फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी मौका नहीं मिला। उन्होंने लायंस के लिए 12 मैच खेले, जिसमें एक अर्धशतक जड़ पाए। साउथ अफ्रीका की घरेलू टीमों से भी वे अंदर बाहर होते रहते थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "मैं हमेशा टीम से अंदर और बाहर रहता था।" ये बात उन्होंने वेलिंग्टन से कही थी, क्योंकि वे वहीं सेटल हो गए थे।

साथ ही डेवोन कॉनवे ने बताया था, "टीम में मेरी जगह पक्की नहीं थी। मैं अलग-अलग पोजीशन पर बैटिंग भी कर रहा था। टी20 में मैं ओपनिंग करता। एक दिवसीय मैचों में, मैं नंबर 5 पर बल्लेबाजी करता। चार दिवसीय मैचों में, अगर कोई बाहर रहता तो शायद मैं अंदर होता। मैंने हर तरह की पोजीशन पर बल्लेबाजी की है, कभी-कभी नंबर 7 पर भी। मैं गेंदबाजी भी नहीं करता। स्पष्टता की कमी और मेरी अपनी असंगति ने मुझे पेकिंग ऑर्डर से नीचे धकेल दिया। मैं अपने मामले को आगे नहीं बढ़ा पाता, इसलिए मैंने सोचा कि आगे बढ़ना सबसे अच्छा है।"

उन्होंने बताया कि कोलपैक जाना सबसे स्पष्ट विकल्प लग रहा था, क्योंकि वह एक विदेशी पेशेवर के रूप में आधे दशक से अधिक समय तक इंग्लैंड में खेले थे, लेकिन उन्होंने न्यूजीलैंड को चुना, क्योंकि उनके सबसे अच्छे दोस्त, साथी दक्षिण अफ्रीका के घरेलू खिलाड़ी मैल्कम नोफल और माइकल रिपन ने उन्हें प्रोत्साहित किया, क्रिकेट के लिए खुद वहां चले गए। कॉनवे केवल क्रिकेट खेलने के आनंद को जीवित रखना चाहते थे। तब उन्होंने यह कल्पना भी नहीं की थी कि वह न्यूजीलैंड के लिए खेलने लग जाएंगे।

पार्टनर ने दिया पूरा साथ

उन्होंने आगे बताया, "(वांडरर्स गेम से पहले) मैं अपने पत्नी किम के साथ गोल्फ खेल रहा था, जब मैंने उससे कहा: 'मुझे नहीं लगता कि मेरा खेल यहां कहीं जा रहा है' और कहा कि मुझे न्यूजीलैंड जाने में दिलचस्पी होगी।" तो उसने कहा, 'चलो इसे करते हैं।' मुझे लगा कि वह मजाक कर रही है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही थी। मुझे एहसास हुआ कि आप केवल एक बार युवा होते हैं, इसलिए हमें जुआ खेलना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि यह एक ऐसा निर्णय है जिसका हमें कभी पछतावा नहीं होगा।"

साउथ अफ्रीका में जहां घरेलू टीम उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं करती थीं, वहीं उनको न्यूजीलैंड में टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में सराहा गया। उन्होंने पहले तो घरेलू क्रिकेट में न्यूजीलैंड में रन बनाए और फिर जब कीवी टीम के लिए खेलने का मौका मिला तो उन्होंने रनों का अंबार लगाना शुरू कर दिया। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के बाद उन्होंने न्यूजीलैंड के लिए वनडे क्रिकेट खेली और आखिर में टेस्ट क्रिकेट में भी मौका मिला, जहां उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू मैच में दोहरा शतक जड़कर इतिहास रच दिया।

कॉनवे 2010 में दक्षिण अफ्रीका अंडर -19 बर्थ के लिए दौड़ में था, क्विंटन डिकॉक और तेम्बा बावुमा के समान बैच में आ रहा था, जबकि वे दोनों दक्षिण अफ्रीका के लिए खेले, कॉनवे ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में जगह बनाने के लिए संघर्ष किया। कॉनवे अगस्त 2017 में वेलिंग्टन पहुंचे। वह खिलाड़ी और कोच के रूप में दोहरी क्षमता में विक्टोरिया यूनिवर्सिटी क्रिकेट क्लब में शामिल हुए। देश में उतरने के चार दिनों के भीतर, उन्हें आवास मिल गया था और उन्हें "वेलिंग्टन से प्यार हो गया था"।

उन्होंने बताया, "मैंने अपनी संपत्ति, कार और वह सब कुछ बेच दिया जो हम नहीं ला सके, क्योंकि मैं उस अध्याय को बंद करना और नए सिरे से शुरू करना चाहता था। अगर मैंने ऐसा नहीं किया होता और मेरा क्रिकेट एक सीजन के बाद ठीक नहीं होता, तो शायद मैं पीछे हट सकता हूं की तर्ज पर सोचने लगा होता, जो कि मैं नहीं चाहता था।"

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