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नाश्ते, पानी को तरस गए क्रिकेट खिलाड़ी, कई को रहना पड़ा ''भूखा''

ज्यादा तर टीमें आई थी बाहर से मैच खेलने।

नाश्ते, पानी को तरस गए क्रिकेट खिलाड़ी, कई को रहना पड़ा
रायपुर. राष्ट्रीय सिविल सर्विसेज क्रिकेट में रविवार को शहीद वीरनारायण सिंह स्टेडियम में मार्च पास्ट के लिए घंटों धूप में तपने के बाद भी खिलाड़ियों को नाश्ता और पानी तक नसीब नहीं हुआ। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के इस आयोजन में घोर अव्यवस्था के शिकार देश के कई राज्यों से आए खिलाड़ी हुए। इसी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम देने आए छोटे बच्चों को भी भूखे रहना पड़ा।
स्टेडियम में उद्घाटन कार्यक्रम के लिए सभी 29 टीमों के खिलाड़ियों को बुलाया गया था। करीब 500 खिलाड़ी इसमें शामिल होने सुबह 9.30 बजे से ही पहुंच गए थे। बाहर से आए खिलाड़ियों से यह कहा गया कि पहली बार राष्ट्रीय सिविल सर्विसेज के आयोजन में मार्च पास्ट करवाया जा रहा है। इसके लिए हमारे राज्य के खेल विभाग ने पुरस्कार भी रखा है। खिलाड़ियों ने इस पहल को पहले सराहा भी, लेकिन बाद में हुई अव्यवस्था से ज्यादातर खिलाड़ी नाराज हो गए।
आधे से ज्यादा रहे भूखे
उद्घाटन के बाद जैसे ही अतिथि रवाना हुए सभी टीमों के खिलाड़ियों को एक साथ नाश्ते के लिए स्टेडियम के बैसमेट में भेजा गया, जहां इसकी व्यवस्था की गई थी। कुछ ही समम में सारा नाश्ता साफ हो गया। इसी के साथ खिलाड़ियों को लंबी लाइन लगाने के बाद भी नाश्ता नसीब नहीं हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रम देने वाली स्कूल की छोटी-छोटी छात्राओं को भूखे रहना पड़ा। इन छात्राओं ने बताया कि उनको यहां पर सुबह 8 बजे से ही बुला लिया गया था। इन छात्राओं को पहले खाली पेट ही अपना कार्यक्रम देना पड़ा और जब कार्यक्रम के बाद ये नाश्ते के लिए पहुंचीं तो सब कुछ समाप्त हो चुका था।
आधी अधूरी व्यवस्था
खेल विभाग के अधिकारियों ने करीब 500 लोगों के नाश्ते की व्यवस्था की थी, जबकि आयोजन में इतने तो विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ी ही थे। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम देने वाले स्कूली बच्चे, मार्च पास्ट के लिए टीमों के सामने चलने आईं छात्राएं, पुलिस विभाग के साथ खेल विभाग और खेल संघों के पदाधिकारी मिलाकर करीब एक हजार लोग हाे गए थे, लेकिन व्यवस्था चूंकि 500 लोगों की की गई थी, ऐसे में आधे को भूखा ही रहना पड़ा।
अधिकारी ही टूट पड़े नाश्ते पर
उद्घाटन का कार्यक्रम जैसे ही समाप्त हुआ, तो खेल विभाग के अधिकारी ही सबसे पहले नाश्ते पर टूट पड़े। इन्होंने अतिथियों को पहले नाश्ता करना जरूरी नहीं समझा। यही नहीं उन्होंने, यह भी कहा कि खाएंगे नहीं तो रात तक काम कैसे करेंगे।
आउटफील्ड से भी खिलवाड़
स्टेडियम में यह ऐसा पहला आयोजन रहा जहां पर आउटफील्ड के खराब होने को ताक पर रखते हुए मैदान में मार्च पास्ट करने वाले खिलाड़ियों के लिए कुर्सियां लगा दी गईं। इस संबंध में प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े जानकारों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वे क्या कर सकते हैं, मैदान तो प्रदेश सरकार का। यह तो खेल विभाग के अधिकारियों को सोचना चाहिए था कि मैदान में कभी इस तरह से कुर्सियां नहीं रखी जाती हैं। ऐसा करने से आउटफील्ड खराब हो जाती है।
पैकेट देना था
बाहर से आए खिलाड़ियों ने अव्यवस्था के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि सभी टीमों के खिलाड़ियों को एक साथ नाश्ते के लिए भेजना गलत था। चार-चार या पांच-पांच टीमों के खिलाड़ियों को भेजा जाता तो ऐसी अव्यवस्था नहीं होती। कई खिलाड़ियों ने कहा कि अगर सीधे पैकेट ही दे दिए जाते तो सबको नाश्ता मिल जाता।
मैच का समय निकला, टीम नाराज
उद्घाटन में ही डेढ़ बजने के कारण राजकुमार कॉलेज के मैदान में मैच खेलने वाली उत्तराखंड टीम के खिलाड़ी इस बात को लेकर नाराज हुए कि उनका मैच एक बजे था, और अब तक उनको यहां पर रोककर रखा गया है। इन खिलाड़ियों की नाराजगी के बाद इनको मैदान भेजने के लिए बस की व्यवस्था की गई। बस की व्यवस्था को लेकर कुछ राज्यों के खिलाड़ियों ने भारी नाराजगी जताई कि एक बस में दो टीमों को भेजनेे की व्यवस्था के कारण परेशानी हो रही है। राजकुमार कॉलेज का मैच विलंब के कारण 16-16 आेवरों का भी कराना पड़ा।
व्यवस्था की थी
करीब 500 लोगों के नाश्ते की व्यवस्था की थी, संभव है ज्यादा लोग होने के कारण कमी हुई हो। हमारे पास किसी भी तरह की शिकायत नहीं आई है।
- राजेंद्र डेकाटे, सहायक खेल संचालक, खेल विभाग
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