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धोनी की अनसुनी कहानी, ना कभी सुनी होगी ना पढ़ी होगी, जानें कैसे टिकट कलेक्टर से भारत की धड़कन बन गए माही

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी 7 जुलाई को अपना 36वां जन्मदिन मनाएंगे। कुछ सालों पहले 300 रुपये के लिए काम करने वाले धोनी आज करोड़ों की कमाई करते हैं। एक छोटे शहर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाले धोनी का इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी बेहद दिलचस्प है।

धोनी की अनसुनी कहानी, ना कभी सुनी होगी ना पढ़ी होगी, जानें कैसे टिकट कलेक्टर से भारत की धड़कन बन गए माही

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी 7 जुलाई को अपना 36वां जन्मदिन मनाएंगे। धोनी ने भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी। उनकी गिनती भारत के सफलतम कप्तानों में होती है।

धोनी आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचना बस एक सपना बनकर रह जाता है। कुछ सालों पहले 300 रुपये के लिए काम करने वाले धोनी आज करोड़ों की कमाई करते हैं।झारखंड जैसे छोटे राज्य से निकले इस महान कप्तान ने अपने नेतृत्व में टीम इंडिया को कई यादगार पल दिए।

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धोनी के लिए तो यह भी कहा जाता है कि वह जिस चीज को छू लेता है वह सोना बन जाती है। और वह जहां कदम रखता है वह उसकी हो जाती है। धोनी दुनिया के एकलौते कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफी टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 आईसीसी वर्ल्ड कप और 2013 में चैम्पियंस ट्रॉफी जीती हैं।

एक छोटे शहर की गलियों में क्रिकेट खेलने वाले धोनी का इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी बेहद दिलचस्प है। आज हम बताएंगे धोनी की अनकही कहानी जो आपने ना कभी सुनी होगी ना पढ़ी होगी, जानें कैसे टिकट कलेटर से भारत की धड़कन बन गए माही।

स्कूल में गोलकीपर से बने क्रिकेटर

महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची में हुआ था। उन्होंने रांची के जवाहर विद्यालय से पढ़ाई की और इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला पकड़ा था। जब धोनी 1992 में छठी क्लास में पढ़ रहे थे, तभी उनके स्कूल को एक विकेट कीपर की जरूरत थी, उस समय धोनी फुटबॉल के गोलकीपर हुआ करते थे। फिर वह गोलकीपर से विकेट कीपर बन गए। स्कूल के बाद धोनी जिलास्तरीय कमांडो क्रिकेट क्लब से खेलते थे फिर इसके बाद सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड की टीम से भी क्रिकेट खेला।

जब धोनी बने टिकट कलेक्टर

18 साल की उम्र में धोनी ने पहली बार रणजी मैच खेला था, वह उस समय बिहार रणजी टीम की तरफ से खेलते थे। इसी दौरान धोनी की नौकरी रेलवे में टिकट कलेक्टर के रूप में लगी और उनकी पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई थी। 2001 से 2003 तक धोनी ने खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेला हालांकि धोनी को ये नौकरी रास नहीं आई उनका इरादा तो कुछ और ही था, फिर धोनी रेलवे की टीम के लिए खेलने लगे।

ऐसे हुआ टीम इंडिया में सलेक्शन

धोनी को 2003-04 में जिंबाब्वे और केन्या दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया। इस दौरे पर उन्होंने विकेट कीपर के तौर पर 7 कैच और 4 स्टंपिंग कीं। बल्लेबाजी करते हुए धोनी ने 7 मैचों में 362 रन बनाए। धोनी के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी। 2004 में धोनी को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली। फिर तो इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर देखा ही नहीं रोज नए कीर्तिमान बनाते चले गए।

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2007 में वनडे टीम की कप्तानी मिली

सितंबर 2007 में धोनी पहली बार भारत की ट्वेंटी-20 टीम के कप्तान बने। फिर साल 2007 में ही उन्हें पहली बार वनडे टीम की भी कप्तानी मिली। साल 2008 में धोनी भारत की टेस्ट टीम के भी कप्तान बने। धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में ट्वेंटी-20 विश्व कप, साल 2011 में वनडे विश्व कप का खिताब भारत को दिलाया आईपीएल में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को साल 2010, 2011 और 2018 में खिताब दिला चुके हैं।

धोनी को मिले सम्मान

इस दौरान धोनी को कई सम्मान भी मिले हैं। 2008 में आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और 2009 में भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार। दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की लिस्ट में फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें 16वें नंबर पर रखा। 2009, 2010 और 2013 में धोनी को आईसीसी के वर्ल्ड इलेवन में जगह मिल चुकी है।

टेस्ट मैच से संन्यास

30 दिसंबर 2014 को ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ हुए तीसरे टेस्ट मैच के बाद धोनी ने टेस्ट मैच से संन्यास की घोषणा कर दी। धोनी ने 90 टेस्ट मैचों में 4,876 रन बनाए। 60 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करते हुए उन्होंने 27 जीत दिलाई। वहीं धोनी के नेतृत्व में विदेश में खेले गए 30 टेस्ट में भारतीय टीम को केवल छह जीत मिलीं और 15 में उसे हार मिली।

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