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Asian Games 2018: आध्यात्मिक गुरू दीपक और पहलवान के बेटे लक्ष्य ने सिल्वर पर लगाया निशाना

निशानेबाज दीपक कुमार और लक्ष्य शेरॉन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 18वें एशियाई खेलों की अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक अपने नाम किए।

Asian Games 2018: आध्यात्मिक गुरू दीपक और पहलवान के बेटे लक्ष्य ने सिल्वर पर लगाया निशाना
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निशानेबाज दीपक कुमार और लक्ष्य शेरॉन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 18वें एशियाई खेलों की अपनी स्पर्धाओं में रजत पदक अपने नाम किए। तैंतीस वर्ष के दीपक को हालांकि पुरूषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में इस बड़े पदक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, उन्होंने 14 साल पहले निशानेबाजी शुरू की थी।

वहीं लक्ष्य ने चार साल पहले इस खेल में प्रवेश किया था और अब 20 साल की उम्र में वह एशियाड में पुरूष ट्रैप में रजत पदकधारी बन गए, इस तरह उन्होंने पूर्व विश्व चैम्पियन मानवजीत सिंह संधू की 2006 दोहा चरण की उपलब्धि की बराबरी की।

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अनुभवी संधू भी आज ट्रैप स्पर्धा में थे और पदक की दौड़ में बने हुए थे लेकिन अंत में वह पांच लक्ष्य चूक गये और चौथे स्थान पर रहे। लक्ष्य के पिता सोमवीर पूर्व राष्ट्रीय चैम्पियन पहलवान हैं और जैसे ही स्पर्धा खत्म हुई वह संधू के पैर छूने गए।

ट्रैप फाइनल में चीनी ताइपे के कुन्पी यांग ने जीत दर्ज की जिन्होंने 48 निशाने लगाए जिससे उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की। लक्ष्य ने 43 और दक्षिण कोरिया के दाएमयियोंग अहन ने 30 अंक से कांस्य पदक जीता।

हरियाणा के जींद के इस निशानेबाज ने कहा- बचपन से ही मुझे बंदूक और राइफल पसंद थी। मैं अपने पिता के साथ इसमें हाथ आजमाता था। लेकिन जब मैंने गंभीरता से निशानेबाजी में आने का फैसला किया तो उन्हें मुझ पर इतना भरोसा नहीं था। लेकिन अब मुझे पूरा भरोसा है कि उन्हें मुझ पर गर्व होगा।

दीपक कुमार

एक अन्य रजत पदक सुबह के सत्र में आया जब दीपक कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में पदक जीता। यह उनके करियर का सबसे बड़ा पदक है लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखा, जो शायद देहरादून में गुरूकल में रहने से हुआ है।

चीन के गत चैम्पियन यांग हाओरान ने 249.1 के कुल योग से स्वर्ण पदक जीता। दीपक 18वें शाट तक पदक की दौड़ में नहीं थे लेकिन इसके बाद उन्होंने 10.9 अंक का परफेक्ट स्कोर बनाया। उनका कुल स्कोर 247.7 रहा जिससे उन्होंने ताइपे के लु शाओचुआन को पछाड़ दिया जिन्होंने 226.8 अंक से कांस्य पदक जीता।

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दीपक फाइनल्स में ज्यादातर समय पिछड़ रहे थे, उन्होंने अपनी मन में चल रही बात के बारे में कहा कि उन्होंने सिर्फ यह सोचा कि उनके कोच मनोज कुमार क्या कहेंगे। दीपक ने कहा- मैं क्वालीफिकेशन में भी पिछड़ रहा था। मैंने उनके शब्दों के बारे में सोचा।

वह हमेशा कहते हैं, तुम में काबिलियत है और तुम अपनी सीमायें जानते हो। शुरूआत भी अच्छी नहीं थी और बीच में भी स्थिति खराब थी। इसलिए मैंने संयमित रहने की कोशिश की।

यह पूछने पर कि अपने दोस्त और एयर फोर्स के साथी रवि को पछाड़ने के बाद उन्हें कैसा लगा तो उन्होंने कहा- अगर हम अपने दोस्तों के साथ जीतने या हारने के बारे में सोचेंगे तो हमारे जीवन का फायदा नहीं।

हम करीबी दोस्त हैं और काफी समय एक साथ बिता चुके हैं। आज के बाद भी कुछ नहीं बदलेगा। दीपक ने पिछले साल ही भारतीय टीम में जगह बनाई थी, लेकिन वह इस पदक को शुरूआत ही मानते हैं। उन्होंने कहा- हर कोई सोचता रहता है कि उन्हें क्या मिलेगा।

मैंने गुरूकुल के दिन में जो भी सीखा है, उसे सभी में फैलाने में विश्वास रखता हूं। किसी भी चीज के बारे में दुखी होने का कोई मतलब नहीं है। जिंदगी बहुत छोटी है। उन्होंने कहा- असली खिलाड़ी वो है जो अपनी जानकारी को खुद तक सीमित नहीं रखता। वह सभी के साथ इसे साझा करता है।

जैसे एक शिक्षक करता है। दीपक के माता पिता ने उन्हें देहरादून में गुरूकुल अकादमी भेजा था। वह धाराप्रवाह संस्कृत बोलते हैं और गुरूकुल से मिली शिक्षा को फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा- मैं जो भी हूं, वो गुरूकुल की वजह से हूं। इसमें मुझे जीवन के असली महत्व का पता चला।

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