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आदिवासी बेटी ने रचा कीर्तिमान, 4 साल में 12 बार खेली नेशनल

16 साल की उम्र में 12 बार नेशनल टीम में खेलने का अवसर और 3 बार ओडि़शा टीम रही चैम्पियन।

आदिवासी बेटी ने रचा कीर्तिमान, 4 साल में 12 बार खेली नेशनल
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इच्छाशक्ति मजबूत हो और मन में कुछ करने का हौसला और जज्बा हो साथ ही जैसे भी हालात बने पूरा ध्यान एक जगह लगाने के लिए मेहनत की जाए तो कोई भी काम असंभव नहीं है।

ओडिशा के मलकानगिरी जिले के धुर नक्सल प्रभावित कालीमेला ब्लाक के कोईमेटला गांव की 16 साल की आदिवासी बाला सीरसा करामी ने असंभव को संभव कर दिखाया है।

4 साल पहले 2013 में वॉलीबॉल खेलना उसने शुरू किया। सिर्फ 4 साल में भारतीय टीम में शामिल होकर देश के लिए खेलने का मुकाम हासिल कर ली। हरिभूमि से चर्चा में वह कहती है मैंने संकल्प लिया था 5 साल में देश के लिए खेलूंगी और यह अवसर मुझे 4 साल में ही मिल गया।

मलकानगिरी के जिला स्पोर्ट्स आफिसर तथा सीरसा के कोच इस बात से काफी खुश हैं कि छोटे से गांव तथा जिला मुख्यालय जहां खेल की कोई विशेष सुविधा नहीं है।

वहां की बालिका ने न केवल ओडि़शा का मान बढ़ाया बल्कि विपरित परिस्थिति के बावजूद हर खिलाड़ी के लिए एक सपना होता है।

हिन्दुस्तान के लिए खेलना वह मुकाम उसने कम समय में हासिल कर लिया। खेल के प्रति उसका जुनून उसे शिखर पर पहुंचा दिया है।

6 लड़कियों के साथ किराए के मकान में रहकर सीरसा ने की प्रेक्टिस

मलकानगिरी से काफी दूर है ब्लाक कालीमेला और उसका गांव कोईमेटला अतिसंवेदनशील और असुविधाओं से भरा है। लेकिन सीरसा की कड़ी मेहनत और अभाव तथा गरीबी के बावजूद वह अपने खेल में लगातार आगे बढ़ती रही।

सीरसा कहती है जब 3 साल की थी तब मजदूर पिता चल बसे। विधवा मां स्कूल में रसोईये का काम कर हम दो बहनों का भरण पोषण कर रही है। उसे वेतन साढ़े 3 हजार मिलता है। ऐसे में कोच ज्ञानेन्द्र प्रसाद बढ़ई ने हमेशा हौसला बढ़ाया और स्वयं तथा जनसहयोग से मेरी खेल में होने वाली जरूरतों को पूरा करने आर्थिक मदद जुटाई।

6 लोगों का साथ

जिला मुख्यालय मलकानगिरी में बालकों के लिए हास्टल और खेल मैदान की सुविधा है। बालिकाओं के लिए हास्टल नहीं होने से अन्य गांव माथली, पोडिया, सिखपाली तथा चित्रकोंडा की लड़कियों के साथ हम 6 लोग एक किराए के मकान में रहकर अभ्यास करते रहे, खाना भी खुद बनाते थे। जब गांव में थी तब दो दिन शनिवार और रविवार को यहां आकर स्टेडियम में व्हालीबाल का अभ्यास करती रही। इसमें ओडि़शा और नेशनल टीम में केवल सीरसा का चयन हुआ है।

4 साल में 12 बार नेशनल

सीरसा तथा उसके कोच का कहना है कि 2013 से खेलना शुरू करने के बाद अभी 4 साल में 12 बार नेशनल खेलने का मौका मिला जिसमें 3 बार ओडि़शा की टीम चैम्पियन बनी।

कोच कहते हैं सीरसा में गजब का टैलेंट है, जब वह खेलती है तब अन्य खिलाड़ी देखते रह जाते हैं। यही कारण है कि सिर्फ 16 साल की अवस्था में देश के लिए खेलने का अवसर उसे मिल रहा है।

प्रशिक्षण के बाद टीम जाएगी चीन

मलकानगिरी से विशेष प्रशिक्षण के लिए सीरसा महाराष्ट्र के औरंगाबाद के लिए रवाना हो गई है। जहां 24 मई से 16 जून तक प्रशिक्षण होगा। उसके बाद भारतीय टीम चीन के लिए रवाना हो जाएगी।

कोच तथा मलकानगिरी के बालक खिलाड़ी, शंकर, हेमंत धुरवा, सुरेन्द्र मड़कम, सोनिया मड़कामी ने कहा कि जिस तरह सोनिया खेल रही है उससे यह तय है कि चीन जाने वाली टीम में वह जरूर जाएगी। एक माह के विशेष प्रशिक्षण में पूरे देश से 30 खिलाड़ी चयनित हुए हैं।

खेल के साथ परीक्षा में भी पास

सीरसा कहती है नियमित रूप से प्रतिदिन सुबह और शाम दो-दो घंटे अभ्यास करती हूं। इस साल 10 वीं परीक्षा अच्छे नंबर से पास कर ली हूं। आगे बस एक ही सपना है देश के लिए खेलती रहूं।

कोंटा विधायक करेंगे मदद

मलकानगिरी के कांग्रेसी नेता चिट्टी बाबू ने कोंटा विधायक कवासी लखमा को जानकारी दी की गरीबी और अभाव के बीच आदिवासी बालिका सीरसा ने अद्भूत उपलब्धि हासिल की है। शासन की ओर से खेल में बालिकाओं को किसी भी तरह की सुविधा नहीं मिलती है।

यहां तक कि बालकों के लिए हास्टल है लेकिन बालिकाओं को यह सुविधा भी नहीं है। यह सुनकर लखमा मलकानगिरी पहुंचे वे उसकी मदद करना चाहते थे लेकिन सीरसा कोच के साथ औरंगाबाद रवाना हो चुकी थी। विधायक ने मोबाईल से बात कर उसे शाबाशी दी।

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