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#ENGvIND: धोनी की पारी ने मुझे 36 रनों की ''बदनाम'' पारी की याद दिला दी, एक क्लिक में जानें पूरा मामला

भारत में क्रिकेट खिलाड़ियों और फैंस का बड़ा ही नाजुक रिश्ता है। अगर खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया तो फैंस उसे रातोंरात स्टार बना देते हैं और अगर स्टार खिलाड़ी ने खराब प्रदर्शन किया तो उनकी शामत आनी तय है।

#ENGvIND: धोनी की पारी ने मुझे 36 रनों की बदनाम पारी की याद दिला दी, एक क्लिक में जानें पूरा मामला
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भारत में क्रिकेट खिलाड़ियों और फैंस का बड़ा ही नाजुक रिश्ता है। अगर खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन किया तो फैंस उसे रातोंरात स्टार बना देते हैं और अगर स्टार खिलाड़ी ने खराब प्रदर्शन किया तो उनकी शामत आनी तय है।

कुछ ऐसा ही इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में हुआ। पूर्व कप्तान और भारत को दो विश्वकप दिला चुके महेंद्र सिंह धोनी के बल्ले से जरा धीमे रन क्या निकले फैंस ने उन्हें ट्रोल कर दिया। यहां तक कि कप्तान विराट कोहली को धोनी के बचाव में उतरना पड़ा। भारत को इस मैच में 86 रन से हार का सामना करना पड़ा था।

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अब भारत के एक और पूर्व कप्तान और लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सुनील गावस्कर ने धोनी का बचाव करते हुए कहा कि प्रेशर में अक्सर ऐसा हो जाता है और बल्लेबाज चाहते हुए भी रन नहीं बना पाता है। गावस्कर ने यह भी कहा कि दूसरे वनडे में धोनी द्वारा खेली गई 37 रनों की पारी ने उन्हें अपनी 36 रनों की 'बदनाम' पारी याद दिला दी।

असंभव की स्थिति, विकल्प सीमित

धोनी का जिक्र करते हुए गावसकर ने कहा कि 'उनका उस हालात में स्ट्रगल करना समझ आता है, जब आप असंभव स्थिति में फंस जाते हो, आपके पास विकल्प भी सीमित हों तो ऐसे में दिमाग नकारात्मक हो ही जाता है। उस स्थिति में हर अच्छा शॉट भी फील्डर के हाथ में जाता है और यह प्रेशर को और ज्यादा बढ़ा देता है।

बदनाम पारी मैंने भी वहीं खेली थी

गावस्कर ने कहा कि धोनी के संघर्ष ने मुझे मेरी 'बदनाम' पारी की याद दिला दी जो मैंने भी वहीं पर खेली थी।' दूसरे वनडे में इंग्लैंड ने 322 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया था, जिस पर गावसकर ने कहा कि बुमराह और भुवनेश्वर कुमार के बिना इंग्लैंड को आखिरी 10 ओवर में स्कोर करने से रोकना भारत के लिए मुश्किल हो गया था।

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किस पारी का किया जिक्र

बात साल 1975 के वर्ल्ड कप की है। 7 जून को भारत और इंग्लैंड का मैच था, जिसमें सुनील गावसकर ने 174 गेंदों पर सिर्फ 36 रन बनाए थे। वह ओपनिंग करने आए और 20.68 की औसत से बल्लेबाजी करते हुए नॉट आउट रहे थे। उस मैच में भारत 202 रनों से हारा था। 1984-85 तक यह वनडे की सबसे बड़ी हार थी। उसी मैच में इंग्लैंड के डेनिस एमिस ने 147 गेंदों पर 137 रन ठोंक दिए थे।

क्यों कही ये बात

पहले वनडे में इंग्लैंड ने पहले बैटिंग करते हुए 322 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया था, जिसके जवाब में भारतीय टीम सिर्फ 236 रन ही बना पाई। भारत के बाकी बल्लेबाजों की तरह धोनी को भी शॉट लगाने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में धोनी को अपनी आक्रमक छवि से उल्टा खेलते देख लोगों ने उन्हें निशाने पर ले लिया। हद तो तब हो गई, जब धोनी की हर डॉट बॉल पर फैंस तरह-तरह की आवाजें निकालने लगे।

धोनी ने बनाए थे 59 गेंद पर 37 रन

धोनी ऐसी स्थिति में शांति से खेलते रहे और कुछ देर बाद शॉट लगाने के चक्कर में आउट होकर चले गए। उन्होंने अपनी पारी में 59 गेंदों पर 37 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 62.71 रहा था। वह प्लंकेट की गेंद पर शॉट मारकर स्टोक्स के हाथों कैच हो गए।

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