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राजस्थान में जनवरी में होंगे पंचायत चुनाव, 11 हजार 142 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 9 हजार 171 पर ऐलान, जानें वजह

प्रदेश में पंचायत चुनावों का ऐलान हो गया है। पंचायत चुनाव 3 चरणों में कराए जाएंगे। 17, 22 और 29 जनवरी को वोटिंग होगी और परिणाम उसी शाम 29 तक तय हो जाएंगे।

राजस्थान में 29 जनवरी को  होंगे तीसरे चरण के पंचायत  चुनाव
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राजस्थान पंचायत चुनाव (फाइल फोटो)

राजस्थान में पंचायत चुनावों का ऐलान हो गया है। यह चुनाव तीन चरणों में पूरे किए जाएगे। पहले चरण के चुनाव के लिए 17 जनवरी को मतदान होगा। दूसरे चरण के लिए 22 जनवरी और तीसरे चरण का चुनाव 29 जनवरी को होगा। सरपंच के चुनाव ईवीएम मशीन से कराए जाएंगे, जबकि वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे। चुनाव में शैक्षणिक बाध्यता नहीं रहेगी। बताया जा रहा है कि जिन पंचायत समितियों और जिला परिषद के सदस्यों का चुनाव कार्यकाल समाप्त हो रहा है वहां सरकार प्रशासक लगाएगी। प्रदेश में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। मतदान होने के बाद ही मतगणना का काम शुरु हो जाएगा। उसी दिन देर शाम तक परिणामों की घोषणा भी कर दी जाएगी।

9,171 ग्राम पंचायतों के होंगे चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की 9,171 ग्राम पंचायतों के चुनाव की तारीखों का ऐलान किया है। राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त प्रेम सिंह मेहरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन तारीखों का ऐलान किया था। कुल 11,142 ग्राम पंचायतें हैं। लेकिन कानूनी विवाद के चलते सिर्फ 9 हजार 171 ग्राम पंचायतों के चुनाव ही कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समितियों शेष बची अन्य ग्राम पंचायतों के चुनावों के तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। पहले चरण में 3,691 ग्राम पंचायतों के चुनाव होंग। इनके साथ इनके 36,047 पंचायत वार्ड पंच के चुनाव होगा। दूसरे चरण में 3,237 ग्राम पंचायतों तथा इनके 31,376 वार्ड पंचों का चुनाव होगा। तीसरे चरण में 2,243 ग्राम पंचायतों तथा इनके 22,977 वार्ड पंचों का चुनाव होगा।

आचार संहिता लागू

चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब सरकार लोक लुभावन घोषणाएं नहीं कर सकेगी। तबादलों पर प्रतिबंध रहेगा। मंत्रियों के राजकीय दौरे पर सरकारी मशीनरी का उपयोग करने पर रोक रहेगी।

शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता हटाई

भाजपा सरकार ने पिछली बार पंचायत चुनाव लड़ने वालों के लिए न्यूनतम शैक्षिणक योग्यता निर्धारित कर दी थी। उस समय कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस बार चुनाव घोषणापत्र में कांग्रेस ने यह अनिवार्यता हटाने का वादा भी किया था। इस बार शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है और कोई भी चुनाव लड़ सकेगा। वहीं दो से अधिक संतान वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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