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लोकसभा चुनाव 2019: जयपुर ग्रामीण सीट पर निशानेबाज राठौड़ के सामने जातीय समीकरणों को साधने की चुनौती

लोग मानते हैं कि राठौड़ के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट बीते पांच साल में इलाके में उनकी सक्रियता है तो जातीय व अन्य राजनीतिक समीकरण पूनिया के पक्ष में है। जयपुर ग्रामीण में आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच (झोटवाड़ा, जमवा रामगढ, बानसूर, कोटपूतली व विराटनगर) पर इस समय कांग्रेस का कब्जा है।

लोकसभा चुनाव 2019: जयपुर ग्रामीण सीट पर निशानेबाज राठौड़ के सामने जातीय समीकरणों को साधने की चुनौती
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राजस्थान की जयपुर ग्रामीण सीट पर दूसरी बार चुनावी मैदान में उतरे खेल एवं युवा मामलों के केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने इस सीट के विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की बढ़त और जातीय समीकरण साधने की बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम और अपनी साफ छवि के बूते पर खम ठोंक रहे राठौड़ के सामने कांग्रेस ने कॉमनवेल्थ गेम्स में चमक बिखरने वाली और मौजूदा विधायक कृष्णा पुनिया को उतारा है।

लोग मानते हैं कि राठौड़ के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट बीते पांच साल में इलाके में उनकी सक्रियता है तो जातीय व अन्य राजनीतिक समीकरण पूनिया के पक्ष में है। जयपुर ग्रामीण में आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से पांच (झोटवाड़ा, जमवा रामगढ, बानसूर, कोटपूतली व विराटनगर) पर इस समय कांग्रेस का कब्जा है। शाह पुरा के विधायक आलोक बेनीवाल भी कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं। बाकी बची फुलेरां व आमेर सीट भाजपा के पास है।

जयपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर रामगढ़ बांध पर ढाबा चलाने वाले राजेश शर्मा कहते हैं,' हवा तो (राज्यवर्धन) राठौड़ के पक्ष में लग रही है। मोदी की बात भी है। लेकिन स्थानीय विधायक कांग्रेस का है और मीणा बहुल इलाका है तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता।' ज्यादातर युवाओं में राठौड़ का क्रेज दिखता है लेकिन यह वोटों में कितना बदलेगा इसको लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

जमवा रामगढ़ सीट से विधायक गोपाल मीणा कहते हैं,' कोई क्रेज नहीं है। सारा खेल प्रचार का है राठौड़ तो अपने साथ छतरी वाली गाड़ी (ओबी वैन) लेकर चलते हैं। हमने अपने कार्यताओं व लोगों से कह रखा है दो महीने टीवी मत देखो। कांग्रेस यह सीट निकालेगी।' रायसर के युवा प्रशांत खजोतिया ने कहा,'सवाल तो विकास कार्य का है। लोग पूछ रहे हैं कि राठौड़ हो या जयपुर के (रामचरण) बोहरा जी, काम क्या करवाया?

रामगढ में पानी लाने की बातों का क्या हुआ? चुनाव प्रचार में जुटे भाजापा के जिलाध्यक्ष (जयपुर देहात- उत्तर) रामलाल शर्मा कहते हैं,'जातीय समीकरण जैसी बातें बेमानी हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस समय लोगों के मन में एक ही बात है मोदी।

कैंडिडेट भी दूसरे नंबर पर है पहले नंबर पर तो मोदी हैं।' वे दावा करते हैं कि फुलेरां, झोटवाड़ा के साथ साथ आमेर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 'क्लीयरकट' बढ़त है। टपूतली व विराटनगर इन दो सीटों पर और मेहनत की जरूरत है।

जयपुर ग्रामीण की तीन सीटें झोटवाड़ा, आमेर और जमवा रामगढ एक तरह से जयपुर शहर का ही हिस्सा हैं। यहां जहां भी चर्चा की जाए तो राठौड़ के काम के साथ मोदी की कतिपय लहर तथा कांग्रेस की न्याय योजना की बात जरूर उठती है।

लोग कहते हैं कि जाट, मीणा और गुर्जर बहुल इस इलाके में इस बार राजपूत राठौड़ के सामने जाट प्रत्याशी कृष्णा पूनिया बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। इसके अलावा क्षेत्र का एससी वोट किसके पक्ष में जाता है, इससे भी परिणाम तय होगा।

पूनिया सादुलपुर सीट से मौजूदा विधायक हैं और कांग्रेस ने राज्य में केवल एक ही विधायक को लोकसभा चुनाव की टिकट दी है। ओलंपिक में निशानेबाजी (डबल ट्रेप) में रजत पदक जीतने वाले राठौड़ जयपुर ग्रामीण सीट से मौजूदा सांसद ही नहीं केंद्रीय मंत्री भी हैं।

वहीं कृष्णा पूनिया भी डिस्क्स थ्रोअर के रूप में ओलंपिक में भाग ले चुकी हैं। दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेल में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में वह सादुलपुर से विधायक चुनी गयीं। यानी मुकाबला दो खिलाड़ियों के बीच है।

जहां तक 2014 के चुनाव की बात की जाए तो राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कांग्रेस के सीपी जोशी को 3,32,096 मतों से पराजित किया था। कुल 12 प्रत्याशियों में से 10 की जमानत जब्त हो गयी थी।

इस बार इस सीट पर राठौड़ व पूनिया सहित कुल आठ प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें बसपा के विरेंद्र सिंह विधूड़ी भी शामिल हैं। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 19,33,331 है। राज्य की 25 में से जिन 12 सीटों पर छह मई को मतदान होना है उनमें जयपुर ग्रामीण भी शामिल है।

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