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कोटा के बाद अब बूंदी में 10 बच्चों की मौत, प्रशासन की लापहरवाही पर डीएम ने दिए आदेश

राजस्थान में कोटा के बाद अब बूंदी शहर के एक अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां 10 बच्चों की मौत हो चुकी है।

कोटा के बाद अब बूंदी में एक महीने में 10 बच्चों की मौत
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बूंदी में एक महीने में 10 बच्चों की मौत (फाइल फोटो)

राजस्थान के कोटा जे के लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थमा भी नहीं है कि कोटा से ही सटे बूंदी के सरकारी अस्पताल में एक महीने में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। सरकार का इस और ध्यान गया ही नहीं। कोटा जे के लोन अस्पताल के मामले को देखते हुए बच्चों की मौत के आंकड़ों को बूंदी अस्पताल प्रशासन छुपाए बैठा था।

बूंदी के सरकारी अस्पताल में बच्चों की मौत का खुलासा तब हुआ जब अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने अस्पताल का दौरा किया। शुक्रवार को जब कलेक्टर अस्पताल पहुंचे और रजिस्टर चेक किया तो मौतों की संख्या देखकर वे हैरान हो गए। पता चला कि पिछले एक महीने में 10 बच्चों की मौत हो चुकी है। ये सभी मौतें नियोनटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में हुई है।

अस्पताल प्रशासन ने झाड़ा पल्ला

इस मामले को लेकर चिकित्सा विभाग का कहना है कि सभी बच्चे ग्रामीण इलाके से यहां आए थे। ड्यूटी इंचार्ज हितेश सोनी ने बताया कि किसी बच्चे का वजन कम था तो किसी के मुंह में गंदा पानी चला गया था, तो किसी के मुंह में हुए संक्रमण के कारण मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चों की मौत नहीं हुई है।

लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त

इस मामले में अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही अस्पताल में किसी प्रकार का कोई संक्रमण नहीं हो इसका ध्यान रखने को कहा है। कलेक्टर ने कहा है कि बच्चों के इलाज में किसी भी हालत में लापरवाही नहीं बरती जाए।

वहीं कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। शुक्रवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के अस्पताल पहुंचने से पहले बिछाए गए हरे कालीन ने बीजेपी को एक और मौका दे दिया है। ऐसे में कांग्रेस ने बीजेपी को आगाह किया है कि वह अस्पताल में हुई बच्चों की मौत पर राजनीति न करे। यहां अभी तक 106 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस मसले पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन सिंह समेत स्मृति ईरानी निशाने पर ले चुकी हैं। इसके अलावा बसपा और सपा भी निशाना साधने में पीछे नहीं हैं।

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