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राजस्थान: ''विजय प्रहार'' में हेलिकॉप्‍टर, ड्रोन और टैंको की गड़गड़ाहट से गूंजा तपता रेगिस्तान

दक्षिण पश्चिम आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मथसोन ने बुधवार को निर्णायक जीत हासिल करने के लिए जवानों के अंतिम हमले को देखा।

राजस्थान: विजय प्रहार में हेलिकॉप्‍टर, ड्रोन और टैंको की गड़गड़ाहट से गूंजा तपता रेगिस्तान
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राजस्‍थान के तपते रेगिस्‍तान में करीब 45 डिग्री सेल्सियस पारे के बीच भारतीय सेना ने युद्धाभ्‍यास 'विजय प्रहार' में दुश्‍मन के परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले के दौरान जवाबी कार्रवाई की अपनी क्षमता को परखा।

भारतीय सेना के दक्षिण-पश्चिम कमांड के करीब 25 हजार जवानों ने बुधवार को खत्‍म हुए इस युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लिया। इस अभ्‍यास के दौरान सूरतगढ़ की मरुभूमि टैंकों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।

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दक्षिण पश्चिम आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मथसोन ने बुधवार को निर्णायक जीत हासिल करने के लिए जवानों के अंतिम हमले को देखा। उन्‍होंने फायरिंग रेंज में बातचीत में कहा कि वह इस युद्धाभ्‍यास के परिणामों बेहद संतुष्‍ट हैं।

उन्‍होंने बताया कि विजय प्रहार के दौरान दुश्‍मन के क्षेत्र में घुसकर खुफिया सूचनाओं की मदद से हवाई और जमीनी हमला करने का अभ्‍यास किया गया।

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हेलिकॉप्‍टर से हमले का अभ्यास

लेफ्टिनेंट जनरल मथसोन ने बताया कि युद्धाभ्‍यास के दौरान लड़ाकू हेलिकॉप्‍टर से हमला करने का भी अभ्‍यास किया गया। उन्‍होंने कहा कि दुश्‍मन के परमाणु, जैविक या रासायनिक हमले की सूरत में भी सेना अपना अक्रामक अभियान जारी रख सकती है।

उन्‍होंने कहा क‍ि युद्धाभ्‍यास के दौरान एयरफोर्स के साथ मिलकर हमले को अंजाम देने की की क्षमता का भी परीक्षण किया गया। उन्‍होंने भीषण गर्मी में अभ्‍यास करने वाले जवानों के हौसलों की तारीफ की और कहा कि उन्‍होंने शानदार प्रदर्शन किया।

आपको बता दें कि युद्धाभ्‍यास में टैंक, अटैक हेलिकॉप्‍टर, ड्रोन और फाइटर एयरक्राफ्ट का इस्‍तेमाल किया गया।

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