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राजस्थान / राजनीति के जादूगर हैं गहलोत, जनता बैठाती है सिर आंखों पर

राजस्थान की राजनीति के जादूगर हैं अशोक गहलोत। इनका जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोलता है। अपने सौम्य व्यवहार से न केवल समर्थकों का बल्कि विरोधियों का भी दिल जीत लेते हैं।

राजस्थान / राजनीति के जादूगर हैं गहलोत, जनता बैठाती है सिर आंखों पर
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राजस्थान की राजनीति के जादूगर हैं अशोक गहलोत। इनका जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोलता है। अपने सौम्य व्यवहार से न केवल समर्थकों का बल्कि विरोधियों का भी दिल जीत लेते हैं। जिस सीट से वह विधानसभा चुनाव लड़ते हैं, वहां की जनता उन्हें हर बार सिर आंखों पर बिठाती है। इनके पिता जादूगर थे। गलहोत राजनीति में रहकर लोगों पर जादू कर रहे हैं।

जब हाईकमान को केंद्र में किसी भरोसेमंद चेहरे की तलाश थी तो ये तलाश उनके नाम पर ही आकर खत्म हुई थी। आज वह कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं और जनार्दन द्विवेदी के बाद इस बड़ी जिम्मेदारी को बखूबी संभाल रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में आज भी उनका पूरा असर रहा है और सीएम बनकर इसे साबित भी कर दिया है।

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पिता थे जादूगर

अशोक गहलोत जाति से माली है। इनके पूर्वजों का पेशा जादूगरी था। गहलोत के पिता स्व. लक्ष्मण सिंह गहलोत जादूगर थे। अशोक गहलोत ने भी अपने पिता से जादू सीखा था और कुछ वक्त के लिए इस पेशे को अपनाया भी। लेकिन यह उनकी नियति नहीं थी। उन्हें तो सियासत के मैदान में रहकर मतदाताओं पर जादू करना था और वह इसमें कामयाब भी रहे।

कड़क चाय के शौकीन

अशोक गहलोत स्वभाव से बेहद सरल और सहज है। वह आम लोगों से जब मिलते हैं तो उनका कद उनके आड़े नहीं आता। उनका अंदाज ही लोगों को सहज कर देता है। उनमें कहीं भी एक बड़ा राजनेता होने का दंभ नहीं झलकता।

यह बात मशहूर है कि वह अपनी गाड़ी में साधारण पारले जी बिस्किट रखते हैं। कड़क चाय के वह बेहद शौकीन हैं। और जब भी चाय की तलब लगती है तो सड़क के किनारे कहीं भी गाड़ी रोककर चाय पी लेते हैं। उनका यही अंदाज उनके जमीन से जुड़े नेता की छवि को और मजबूत करता है।

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राजस्थान की राजनीत में बनाई गहरी पैठ

इसे अशोक गहलोत का जादू ही कहा जाएगा कि जिस राज्य में क्षत्रिय, जाटों और ब्राह्मणों का वर्चस्व हो, वहां माली जाति के इस नेता ने गहरी पैठ बना ली और दो बार राजस्थान का सीएम पद भी संभाला। 1998 में उन्होंने तमाम बड़े नेताओं की चुनौती के बीच सीएम पद संभाला।

साल 2008 में भी उन्होंने अप्रत्याशित अंदाज में मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। अब 2018 में उन्होंने ग्वालियर राजघराने की बेटी और झालावाड़ राजघराने की बहू वसुंधरा राजे को सत्ता से बेदखल कर दिया।

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