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पंजाब : सतलुज ने धारण किया विकराल रूप, 900 एकड़ की फसल बर्बाद

साल 1988 के बाढ़ में हमारे गांव की सारी फसलें पानी में डूब गई थीं। अभी हम इस नुकसान से उबर नहीं पाए थे कि यह दूसरा कहर हमारे सामने आ चुका है, हमारी सारी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, अब न जाने हमारे बच्चे क्या खाएंगे। यह कहना है मोगा जिले के संघेड़ा गांव के बुजुर्ग चनन सिंह का, यह दर्द केवल उन्ही का नहीं है बल्कि इसी दर्द से पूरा गांव प्रभावित है।

पंजाब : सतलुज ने धारण किया विकराल रूप, 900 एकड़ की फसल बर्बाद
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Satluj River Water level increased 900 acres crop destroyed in Punjab

साल 1988 के बाढ़ में हमारे गांव की सारी फसलें पानी में डूब गई थीं। अभी हम इस नुकसान से उबर नहीं पाए थे कि यह दूसरा कहर हमारे सामने आ चुका है, हमारी सारी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, अब न जाने हमारे बच्चे क्या खाएंगे। यह कहना है मोगा जिले के संघेड़ा गांव के बुजुर्ग चनन सिंह का, यह दर्द केवल उन्ही का नहीं है बल्कि इसी दर्द से पूरा गांव प्रभावित है।

पंजाब के मोगा जिले के हलका धर्मकोट स्थित सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसा गांव पूरी तरह पानी से घिर गया है। जल के स्तर बढ़ने और गांव में पानी फैल जाने से बड़े स्तर पर किसानों की फसल बर्बाद हो चुकी है। गांव में सतलुज दरिया पर बने डैम की मजबूती के लिए ग्रामीण साल 1988 से ही सरकार से गुहार लगा रहे हैं लेकिन लोगों की आवाज नहीं सुनी जा रही है।

एक स्थानीय अखबार के रिपोर्टर ने जब गांव की खबर लेने पहुंचा तो ग्रामीणों के चेहरों पर इसका दर्द साफ नजर आ रहा था। संघेड़ा गांव के पूर्व सरपंच रहे सरूप सिंह ने गांव की दशा बताते हुए कहा कि पूरा गांव इस समय पानी की चपेट में आ गया है। इसके साथ ही गांव में सबकी फसल तबाह हो चुकी है। 700 एकड़ की फसल में से 400 एकड़ की फसल बर्बाद हो चुकी है बचे हुए फसल जल्द ही पानी में डूब जाएंगे।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि हर साल करीब 50 फीसदी फसल बर्बाद हो जाता है लेकिन इस साल की स्थिति और भी भयावह लग रही है। फसल जनमग्न हो चुका है, पशुओं का चारा भी इन्ही के सहारे है।

सरकार व प्रशासन बेखबर

सतलज दरिया के किनारे बसे गांव का पूरा फसल लगभग बर्बाद होने के कगार पर है और सरकार व प्रशासन इससे बेखबर है। किसी को भी गांव के हालात की चिंता नहीं है। गांव वाले प्रशासन व सरकार के इस रवैये से बेहद खफा हैं। डीसी संदीप हंस के अनुसार गांव में बाढ़ व जलस्तर का जायजा लेने तुरंत एसडीएम के साथ एक टीम भेजी जाए।

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