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रिपोर्ट / अमृतसर निरंकारी भवन पर ग्रेनेड हमला, खालिस्तानी ताकतों को इकट्ठा करने के लिए भेजी गई मोटी रकम

महीनों पहले से इस तरह की सूचनाएं खुफिया तंत्र की ओर से मिल रही थी कि सीमा पार से पंजाब में आतंकवादी वारदात की साजिशें रची जा रही हैं। इसके लिए पश्चिमी देशों, खासकर जर्मनी और ब्रिटेन में बैठे कट्टरपंथी सिख संगठन और आईएसआई मिलकर साजिश रच रहे हैं।

रिपोर्ट / अमृतसर निरंकारी भवन पर ग्रेनेड हमला, खालिस्तानी ताकतों को इकट्ठा करने के लिए भेजी गई मोटी रकम
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महीनों पहले से इस तरह की सूचनाएं खुफिया तंत्र की ओर से मिल रही थी कि सीमा पार से पंजाब में आतंकवादी वारदात की साजिशें रची जा रही हैं। इसके लिए पश्चिमी देशों, खासकर जर्मनी और ब्रिटेन में बैठे कट्टरपंथी सिख संगठन और आईएसआई मिलकर साजिश रच रहे हैं। हाल ही में ऐसी खबरें भी आई थी कि चार संदिग्ध युवकों ने जम्मू से एक इनोवा गाड़ी किराए पर ली और पठानकोट में उसे लूटकर फरार हो गए। चालक ने किसी तरह अपनी जान बचाई।

कुछ ही दिन पहले पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को आगाह किया गया था कि कुछ आतंकवादियों ने सीमा पार से घुसपैठ कर इन प्रदेशों का रुख किया है और वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं। जाहिर है, ये सारी गतिविधियां और सूचनाएं इस ओर इंगित कर रही हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी साजिशों को रचने और अंजाम देने वाली तंजीमें एक बार फिर से पंजाब में आतंकवाद को जिंदा करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं।

करीब डेढ़ महीने पहले एक चैनल ने लंदन में स्टिंग करके इसका खुलासा भी किया था कि कैसे कुछ प्रतिक्रियावादी संगठनों से जुड़े लोग पंजाब में फिर से खालिस्तानी ताकतों को इकट्ठा करने के लिए मोटी रकम भेज रहे हैं और किस तरह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इसमें मददगार बन रही है। अस्सी के दशक में पंजाब भीषण आतंकवाद की आग में झुलस चुका है, जिसमें हजारों बेकसूर लोग मारे गए थे।

आम नागरिकों के अलावा कई पुलिस अफसर और यहां तक कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भी आतंकी हमले का शिकार हुए थे। नब्बे के दशक में आतंकवाद पर काबू कर लिया गया था परंतु बीच-बीच में छिटपुट वारदातों को अंजाम देकर फिर से इसे हवा देने की कोशिशें की जाती रही हैं। वक्त-वक्त पर ऐसी साजिशों को अंजाम देने वालों को गिरफ्तार करके जेल की सींखजों के पीछे भी डाला जाता रहा है,

परंतु पंजाब की अंदरूनी राजनीति ने जिस तरह वहां की पुलिस का भी स्वहित के चलते राजनीतिकरण किया है, उससे आतंकवाद के खिलाफ मुहिम को थोड़ा कुंद करने का काम किया है लेकिन तसल्ली की बात यही है कि आमतौर पर पंजाब पुलिस ऐसे तत्वों और ताकतों से निपट रही है, जो इस बेहतरीन प्रदेश को साजिशों की आंच में झुलसाने की कोशिश के हिस्से बनते रहे हैं।

रविवार को सीमाई अमृतसर जिले के राजासांसी इलाके में जिस तरह बाइक सवार दो संदिग्धों ने ग्रेनेड फेंककर निरंकारी मिशन के डेरे को निशाना बनाया, उससे साफ है कि ऐसी साजिशों को अंजाम देने वालों की मंशा क्या है। अस्सी के दशक में जब पंजाब में इसकी शुरुआत की गई थी, तब भी निरंकारियों को ही निशाना बनाया गया था।

खालिस्तान समर्थक जमातें और आईएसआई की कोशिश यही है कि पंजाब के सौहार्द को खराब कर फिर से दहशत और टकराव का वातावरण बना दिया जाए। राजासांसी इलाके की इस वारदात में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और डेढ़ दर्जन के करीब घायलों को अस्पतालों में दाखिल कराया गया है। इसके पीछे कौन लोग हैं,

इसका खुलासा तो पंजाब पुलिस और केन्द्रीय एजेंसियों को करना ही है, दोषियों को उनकी करनी की समय रहते कड़ी से कड़ी सजा मिले, यह भी सुनिश्चित करना है। पंजाब ही नहीं, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली और दूसरे राज्यों को भी अब और सतर्कता बरतने की जरूरत होगी क्योंकि पंजाब में वारदातें करने के बाद बचने के लिए आतंकवादी इन प्रदेशों का रुख कर सकते हैं।

इसकी आशंका बनी हुई है कि जैसे-जैसे जम्मू कश्मीर में इनका खात्मा अंजाम तक पहुंचेगा, वैसे-वैसे सीमा पार बैठे इनके आका भारत के पंजाब और कुछ दूसरे प्रदेशों में अलगाववादी मुहिम चलाने वाले चरमपंथी संगठनों के जरिए इस प्रकार की वारदातों को अंजाम देने की साजिशें रचेंगी। राजासांसी की यह घटना इसी साजिश का हिस्सा लगती है।

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