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Kargil War Hero : पाकिस्तानी कैप्टन को मार गिराने वाले सतपाल सिंह की पूरी कहानी

20 Years Of Kargil : पंजाब के संगरूर जिले के एक छोटे से शहर भवानीगढ़ में एक चौराहे पर हेड कांस्टेबल सतपाल सिंह ट्रैफिक को निर्देशित करने में व्यस्त हैं लेकिन उनकी वर्दी पर ध्यान लगाकर देखें तो आपको पता चलेगा कि वे कोई सामान्य ट्रैफिक पुलिसकर्मी नहीं हैं। अपनी शर्ट पर उन्होंने मेडल रिबेंड की चार रो पहन रखी हैं, जिसमें एक आधा नीला-आधा नारंगी है, वो है सेना का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान वीर चक्र।

पाकिस्तानी कैप्टन को मार गिराने वाले सतपाल सिंह संभाल रहे हैं ट्रैफिक, अब मिली डबल प्रमोशन- पढ़ें पूरी कहानी
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Kargil Hero Satpal Singh Double Promotion Killed Pakistani Captain Karnal Sher Khan In Kargil War

पंजाब के संगरूर जिले के एक छोटे से शहर भवानीगढ़ में एक चौराहे पर हेड कांस्टेबल सतपाल सिंह ट्रैफिक को निर्देशित करने में व्यस्त हैं लेकिन उनकी वर्दी पर ध्यान लगाकर देखें तो आपको पता चलेगा कि वे कोई सामान्य ट्रैफिक पुलिसकर्मी नहीं हैं। अपनी शर्ट पर उन्होंने मेडल रिबेंड की चार रो पहन रखी हैं, जिसमें एक आधा नीला-आधा नारंगी है, वो है सेना का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान वीर चक्र।


पाकिस्तानी कैप्टन करनाल शेर खान को किए थे ढेर

बीस साल पहले, सतपाल सिंह सेना में एक सिपाही थे, जिन्होंने टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना को लगातार जवाबी फायरिंग दे रहे थे। जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री के कैप्टन करनाल शेर खान और तीन अन्य लोगों को मार डाला था, बाद में शेर खान को पाकिस्तान के सर्वोच्च निशात-ए-हैदर से सम्मानित किया गया था। करनाल शेर खान को भारतीय ब्रिगेड कमांडर की सिफारिश पर वीरता पुरस्कार मिला था जिन्होंने बर्फीले ऊंचाइयों पर भारतीय सेना से लोहा लिया था। हालांकि सतपाल सिंह ने दुश्मन के जांबाज सैनिक को मार गिराया था।

वह दो अधिकारियों, चार जेसीओ और 46 ओआरएस (अन्य रैंक) की 8 सिख टीम का हिस्सा था, जिसने 19 ग्रेनेडियर्स को टाइगर हिल पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। हेल्मेट और टाइगर हिल पर इंडिया गेट के ठिकानों पर हुए हमले में तीन जेसीओ सहित अठारह सैनिकों की मौत हो गई थी। अधिकांश लोग जो बच गए, वे घायल हो गए, जिनमें दो अधिकारी मेजर रवींद्र परमार और लेफ्टिनेंट आर के सेहरावत शामिल थे।


हम 5 जुलाई, 1999 की शाम तक युद्ध के तनाव से बाहर निकल चुके थे। यह बहुत ही ठंड थी और हमारे साथ हमारे सभी कपड़े थे जो हमने पहने थे। या तो हम वूलेन कपड़ा अपने साथ ले सकते थे या हथियार और गोला-बारूद, हमनें हथियार ले जाना पसंद किया। आज भी उन दिनों को याद करता हूं तो रोमांचित हो उठता हूं।

सतपाल मलिक कहते हैं कि पहला पाकिस्तानी जवाबी हमला 7 जुलाई की सुबह हुई, जिसमें भारतीय सैनिकों को पीछे हटना पड़ा, हमले एक के बाद एक हो रहे थे। हम एक टूकड़ी को खदेड़ने की कोशिश करते तो दूसरी टूकड़ी हम पर हमले करने लग रही थी। पाकिस्तानियों के पास उनका नेतृत्व करने वाला एक अच्छा अधिकारी था। अधिकारियों और JCO के घायलों के साथ सूबेदार निर्मल सिंह ने घायलों के बीच कमान संभाली और वायरलेस पर ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर एम पी एस बाजवा के संपर्क में रहे।

सूबेदार साब जयकारा ने लगाया और बोला- 'जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल' और हम दुश्मनों पर टूट पड़े

इससे पहले कि वे हमारी टूकड़ी पर सीधा हमला करते इससे पहले ही हमारे सूबेदार साब जयकारा लगाया और बोले- 'जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल' चिल्लाते हुए दुश्मन और उस अधिकारी का पीछा पर टूट पड़े, मैंने अपनी एलएमजी (लाइट मशीन गन) निकालते ही चार गोलियां बरसा डाली, हाथों-हाथ मुकाबला हुआ। मैंने उस लम्बे और ट्रैक सूट पहने हुए पाकिस्तानी अधिकारी को खदेड़ लिया, वह पाकिस्तानी सैनिकों का नेतृत्व कर रहा था। चारों तरफ जंग का माहौल बन गया था, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गोलियां बरसा रहे थे। मैनें उस पाकिस्तानी अधिकारी को मार दिया था।


मुझे नहीं पता था कि मैनें एक पाकिस्तानी सेना के कैप्टन को मार दिया है

तब मुझे पता नहीं था कि जिस पाकिस्तानी सैनिक को मैनें मारा था वो कैप्टन करनाल शेर खान था। मैंने उनमें से चार को मार दिया था। कैप्टन करनाल खान को उनके रेडियो ऑपरेटर और दो जवानों ने उन्हें करीब से कवर फायरिंग दे रहे थे। अधिकारी की मौत से पाकिस्तानियों में खलबली मच गई। हम उसे (शेर खान) पाकिस्तानी सैनिकों का लीडरशीप करते हुए देखा था, वो बहुत बहादुर और तेज तर्रार अधिकारी था। उसने हमारे साथ कारगिल के मैदान ए जंग में कड़ी टक्कर दी थी।


रिटायरमेंट के बाद पंजाब ट्रैफिक पुलिस ज्वाइन किए लेकिन नहीं मिला कोई वेटेज

सेना में अपनी सेवा पूरी करने के बाद, सतपाल को 2009 में छुट्टी दे दी गई। अगले वर्ष वह पंजाब पुलिस में शामिल हो गए। वे कहते हैं कि हो सकता है कि मैंने पुलिस ट्रैफिक में शामिल होने का गलत निर्णय लिया हो। मुझे अपने वीर चक्र के लिए कोई वेटेज नहीं मिला। मैं पूर्व सैनिक कोटा के तहत शामिल हुआ। मैं अब हेड कांस्टेबल हूं।

पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी उच्च रैंक दिया जाता है… मैंने एक ऐसे व्यक्ति को मार दिया जिसे पाकिस्तान के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वैसे भी, भगवान दयालु है। उसने मुझे जिंदा रखा। हालांकि, शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने घोषणा की कि सतपाल को हेड कांस्टेबल से सहायक उप निरीक्षक तक पदोन्नत किया जाए।

इनपुट- Indian Express

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