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गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां : नार्मल डिलीवरी के लिए अपनाएं ये टिप्स

Pregnancy Tips for Normal Delivery : बीते कुछ वर्षों में महिलाओं में सीजेरियन डिलीवरी का पर्सेंटेज बढ़ा है। मेडिकल के अलावा इसके कई अन्य कारण हैं। गर्भावस्था के दौरान अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो डिलीवरी सिजेरियन की बजाय नॉर्मल संभव है। इस बारे में हम दे रहे हैं आपके लिए बहुत उपयोगी जानकारी।

Pregnancy Tips for Normal Delivery गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां : नार्मल डिलीवरी के लिए अपनाएं ये टिप्सPregnancy Tips for Normal Delivery in hindi

Pregnancy Tips for Normal Delivery : किसी भी महिला के लिए मां बनने से बड़ा सुख कोई दूसरा नहीं होता है। लेकिन जैसे-जैसे प्रसव के दिन नजदीक आते हैं, प्रसव पीड़ा को लेकर गर्भवती महिला केमन में डर भी बढ़ता जाता है। कई बार वह प्रसव पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन डिलीवनी भी करा लेती हैं। इस कारण सिजेरियन डिलीवरी के मामले लगातारबढ़ रहे हैं। वैसे इसके कई और कारण भी हैं जैसे-नई तकनीकों का विकास, बढ़ती स्वास्थ्य जटिलताएं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सिजेरियन डिलीवरी क्या है? सिजेरियन डिलीवरी करना कब जरूरी होता है?

सिजेरियन डिलीवरी

सिजेरियन डिलीवरी को सी-सेक्शन डिलीवरी भी कहते हैं। यह एक प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर योनि के बजाय मां के पेट और गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे कोबाहर निकालते हैं। सिजेरियन डिलीवरी मेडिकली क्रिटिकल सिचुएशन में की जाती है। लेकिन आजकल कुछ महिलाएं अपनी इच्छा से सी-सेक्शन डिलीवरी को चुनतीहैं, जिसे सी-सेक्शन ऑन मेटरनल रिक्वेस्ट (सीडीएमआर) कहते हैं।

हालांकि, अधिकतर सी-सेक्शन डिलीवरी तब होती हैं, जब नॉर्मल डिलीवरी के कारण मां या बच्चे या दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका होती है।इसमें जनरल एनेस्थीसिया देने की बजाय स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया जाता है। सिजेरियन डिलीवरी में पेट के निचले हिस्से में लगभग 10 या 20 से.मी. के कटलगाए जाते हैं।

तब होती है जरूरी

-जब बच्चा सिर के बल नहीं होता।

-गर्भनाल, गर्भाशय के द्वार को ब्लॉक कर देती है।

-बच्चे का आकार इतना बड़ा होता है कि नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं होती।

-अचानक बच्चे की हृदय की धड़कनें धीमी होने लगती हैं।

-डिलीवरी डिले होने पर।

-मां को प्री-एक्लैंपसिया, हृदय रोग, उच्च रक्तदाब या शुगर हो।

-पहली डिलीवरी सिजेरियन हुई हो।

-अगर वो प्रीशियस बेबी है, जो बड़ी उम्र में मां बनने वाली महिला की कोख से जन्म ले रहा है या कई नवजात शिशुओं की मृत्यु के बाद जन्म ले रहा हो।

अन्य कारण

भारत में पिछले दस सालों में सिजेरियन डिलीवरी के मामले 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.5 यानी लगभग दोगुने हो गए हैं। हमेशा इसका कारण मेडिकल नहीं होताहै। शहरों में रहने वाली बहुत सी महिलाएं प्रसव पीड़ा से डरती हैं और अपने फिगर को खराब नहीं होने देना चाहती हैं। इसलिए वे सिजेरियन डिलीवरी कोप्राथमिकता देने लगी हैं। साथ ही आज की लाइफस्टाइल और आधुनिक सुख-सुविधाओं ने हमें शारीरिक रूप से निष्क्रिय बना दिया है।

महिलाएं अब घर के कामकरने से भी कतराती हैं, वेस्टर्न स्टाइल की टॉयलेट का इस्तेमाल करती हैं, टेबल-चेयर पर बैठती हैं, इससे पेल्विक एरिया की मांसपेशियां रिलैक्स नहीं होतीं। यहांतक कि करियर के चलते बहुत सी महिलाएं बड़ी उम्र में शादी करती हैं, जिससे पेल्विक एरिया की मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं होपाती है। महिलाओं में बढ़ता मोटापा भी सिजेरियन डिलीवरी का एक बड़ा कारण है।

इन पर करें अमल (Pregnancy Tips for Normal Delivery)

महिलाएं हमेशा अपने स्वास्थ्य, विशेषकर गर्भावस्था के दौरान अपना ध्यान रखें तो मां और होने वाला बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे। इससे नॉर्मल डिलीवरी होने केचांसेज बढ़ जाते हैं। इसके अलावा कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।

-गर्भावस्था और प्रसव के बारे में अपने डॉक्टर से खुलकर चर्चा करें।

-अनावश्यक तनाव न पालें, हमेशा खुश रहें।

-शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। रेग्युलर टहलें या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें।

-किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की निगरानी में योग करें।

-ढेर सारा पानी पिएं, जिससे यूरिनरी संक्रमण का खतरा कम हो। क्योंकि इस दौरान इस तरह की समस्याएं गर्भवती महिलाओं को हो जाती हैं।

-गर्भावस्था में 7-8 घंटे की नींद के अलावा दोपहर में 2-3 घंटे की नींद लें, जिससे शरीर में उर्जा का स्तर बना रहे।

-पोषक और संतुलित भोजन का सेवन करें।

-गर्भावस्था के दौरान अपना वजन बहुत अधिक न बढ़ने दें।

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