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इन 10 महान टीचरों की कहानी आपको पता होनी चाहिए

हर साल शिक्षकों को विशेष सम्मान देने के लिए इस दिन का आयोजन किया जाता है।

इन 10 महान टीचरों की कहानी आपको पता होनी चाहिए
नई दिल्ली. आज स्कूलों में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। 5 सितंबर को हर साल शिक्षकों को विशेष सम्मान देने के लिए इस दिन का आयोजन किया जाता है। स्कूलों में इसे उत्साह के साथ सेलिब्रेट किया जाता है। बच्चे अपने प्रिय शिक्षकों को उपहार भी देते हैं। अपने जीवन में जिन्होंने अपनी सफलता के पीछे जिन शिक्षकों का हाथ माना है वो बड़े ही सम्मान के साथ धन्यवाद करते हैं। कुछ ऐसे प्रसिद्ध शिक्षक हैं जिन्होंने अपने स्टूडेंट्स को आगे बढ़ने के लिए पूरा स्पोर्ट दिया है। अपने छात्रों को ज्ञान देने और सफलता दिलाने के लिए पूरा प्रयास किया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, हम बताने जा रहे हैं इन प्रसिद्ध शिक्षकों के बारें में...
1. डॉ. राधाकुष्णन
शिक्षक दिवस डॉ राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। जो ज्यादातर लोगों को नहीं पता है। एक बार उनके छात्र उनके जन्मदिन मनाना चाहते थे तो उन्होंने कहा ये दिन मेरे जन्मदिन के रूप में नहीं बल्कि शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए। राधाकृष्णन ने कलकत्ता, मैसूर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, हैरिस मैनचेस्टर कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित दुनिया भर के असंख्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है।

2. रविंद्रनाथ टैगोर
रविंद्रनाथ टैगोर भारत के महान कवि, नाटककार और लेखक थे। उन्होने बंगाल के ग्रामीण दूरदराज के इलाकों और शांति निकेतन में पहले स्कूल और बाद में विश्विद्यालय की स्थापना की और बच्चों के भावनात्मक और आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर दिया।

3. चाणक्य
एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री और एक शाही सलाहकार थे। अर्थशास्त्र के लिए चाणक्य को श्रेय जाता है। वो तक्षशिला विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। चाणक्य ने अपने छात्रों को दृष्टि या ध्वनि का उपयोग किए बिना युद्द से निपटने का तरीका सिखाया।
4. द्रोणाचार्य
द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु थे। भीष्म पितामाह ने कौरवों और पांडवों को युद्ध और तीरंदाजी में शिक्षित करने के लिए द्रोणाचार्य को नियुक्त किया था। गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन सबसे पसंदीदा छात्रा था।
5. एपीजे अब्दुल कलाम
एपीजे अब्दुल कलाम एक शिक्षक, वैज्ञानिक और एक प्रर्वतक हैं। अब्दुल कलाम प्रसिद्ध शिक्षकों में शामिल हैं। उन्हें भारत के मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है। उन्हें पढ़ाना बहुत ही पसंद था। उनका आखिरी लेक्चर शिलॉग के आइआइएम में हुआ था। अपने जीवन में एक अच्छा शिक्षक बनना चाहते थे।
6. ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले
1848 में भारत में पहला गर्ल स्कूल खोला गया था। जिसका श्रेय ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले को जाता है। उन्होंने लड़कियों की पढ़ाई के साथ-साथ नीची कास्ट के लोगों को भी हक दिलाया। जब दोनों की शादी हुई तो ज्योतिराव की पत्नी सावित्रीबाई अनपढ़ थी। उन्होंने अपनी पत्नी को भी शिथित किया। बाद में दोनों ने शिक्षा को बढ़ावा दिया।
7. असीमा चटर्जी
असीमा चटर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। उन्हें कैंसर की दवाई में इस्तेमाल किए जाने वाले तत्व पर काम करने के लिए जाना जाता है। पौधों से कई दवाईयों का विकास किया।

8. पुलेला गोपीचंद
रियो ओलंपिक 2016 बैडमिंटन रजत पदक विजेता पी वी सिंधु के पीछे असली ताकत पुलेला गोपीचंद है। गोपीचंद ने कोच होने के नाते उतनी ही मेहनत की है जितनी एक स्टूडेंट करता है। एक गुरु होने का पूरा कर्तव्य निभाया है।
9. आनंद कुमार
आनंद कुमार ने सुपर 30 की स्पाथना की है। आइआइटी-जेईई एंट्रेंस एग्जाम के लिए 30 वंचित छात्रों को फ्री में क्लास देते हैं। आनंद 350 से ज्यादा स्टूडेंट को आइआइटी के तक पहुंचा चुके हैं।
10. महावीर सिंह फोगाट
महावीर पहलवानों को कुश्ती के लिए तैयार करते हैं। देश को 6 कुश्ती चैंपियन उपलब्ध कराते हैं। महिलाओं को खेल में ट्रेंड करते हैं। ये भारत की नेशनल कुश्ती टीम के पूर्व मेंबर थे। फोगाट ने अपनी जॉब तब छोड़ी जब उन्हें अपनी बेटियों को कॉमनवेल्थ गेम के लिए तैयार करने का आदेश मिला। कड़ी मेहनत के बाद दिल्ली गेम में गीता ने गोल्ड और बबीता ने सिल्वर मेडल जीता।
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