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जानिये ऐसे 5 साहित्यकारों के नाम जिन्होंने लौटा दिये बड़े-बड़े पुरस्कार

दादारी हत्याकांड के विरोध में जहां बुधवार को अशोक वाजपेयी नयनतारा सहगल ने साहित्य अकादमी लौटाने की बात कही है।

जानिये ऐसे 5 साहित्यकारों के नाम जिन्होंने लौटा दिये बड़े-बड़े पुरस्कार
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देश में बढती हिंसक घटनाओं के चलते साहित्यकार बिरादरी मुखर रूप से सामने आ रही है। दादारी हत्याकांड के विरोध में जहां बुधवार को अशोक वाजपेयी नयनतारा सहगल ने साहित्य अकादमी लौटाने की बात कही। वहीं पिछले माह ही कथाकार उदय प्रकाश ने कन्नड़ विद्वान कलबुर्गी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी लौटाने की घोषणा की थी।

साहित्यकार वर्ग द्वारा पुरस्कार लौटाने और सरकार के विरोध में खड़े होने का यह कदम नया नहीं है। इससे पहले भी साहित्यकार इस तरह का विरोध दर्ज करा चुके हैं। इसमें हिंदी के उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु , अंग्रेजी के खुशवंत सिंह और फ्रेंच लेखक औऱ चिंतक ज्यां पाल सात्र जैसे कई नाम शामिल हैं। आइये जानें ऐसे लेखकों के बारे में-

फणीश्वरनाश रेणु- रेणु को उनके पहले उपन्यास मैला आंचल के लिये पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। आपातकाल और सरकारी दमन के विरोध में रेणु ने पद्मश्री लौटा दिया था। हालांकि उनके लिए प्रतिरोध का मतलब सिर्फ पुरस्कार लौटाना भर नहीं था। उस दौरान रेणु जनता के साथ संघर्ष करते हुए जेल भी गये थे।

खुशवंत सिंह- दूसरी और अंग्रेजी के मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने भी सरकार के विरोध स्वरूप पद्मभूषण पुरस्कार लौटाया था। खुशवंत सिंह को साल 1974 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। लेकिन उन्होंने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में सेना के कब्जे के विरोध में 1984 में इसे लौटा दिया था। हालांकि खुशवंत खलिस्तान के पक्ष में नहीं थे लेकिन वे ये भी बर्दाशत नहीं कर सकते थे कि सेना इस तरह की बर्बर कार्यवाही करे। भारत ही नहीं दुनिया में भी इस तरह के उदाहरण मौजूद हैं।
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