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भारत में 7 करोड़ से ज्यादा महिलाएं करती हैं तंबाकू का सेवन

आज पूरे विश्व में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की डेढ़ साल पहले आई एक रिपोर्ट के मताबिक हमारे देश में 15 साल से ऊपर की 7 करोड़ महिलाएं धुंआ रहित तंबाकू का प्रयोग करती हैं।

भारत में 7 करोड़ से ज्यादा महिलाएं करती हैं तंबाकू का सेवन
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आज पूरे विश्व में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की डेढ़ साल पहले आई एक रिपोर्ट के मताबिक हमारे देश में 15 साल से ऊपर की 7 करोड़ महिलाएं धुंआ रहित तंबाकू का प्रयोग करती हैं। यह आंकड़ा पूरी दुनिया का 63 प्रतिशत है। गौरतलब है कि मंत्रालय द्वारा पहली बार जारी की गई इस व्यापक रिपोर्ट में महिलाओं में तम्बाकू सेवन के बढ़ते चलन के चिंतनीय हालात सामने आए।

विचारणीय यह भी है कि आधी आबादी में स्मोकलेस टोबेको का सेवन ही नहीं धूम्रपान का प्रचलन भी तेज़ी से बढ़ा है। पिछले 5 सालों में धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या में 50 फीसदी से 60 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट के अनुसार 3,50,000 लोगों की मौत सिर्फ तंबाकू प्रयोग करने के कारण हो रही है। देश में 1,00,000 लोग इससे जनित कैंसर के कारण मर रहे हैं।

आंकड़े बताते हैं कि भारत में प्रति वर्ष साढ़े 3 लाख से अधिक लोग चबाने वाले तम्बाकू जैसे गुटका और पान मसाला की वजह से मौत का शिकार हो रहे हैं। जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। आज की बदलती जीवनशैली में महिलाओं में बढ़ता तम्बाकू उत्पादों का प्रयोग एक फैशन बन गया है। अफ़सोस कि शौक के तौर पर शुरू होने वाली यह आदत लत बनकर स्वास्थ्य के हर पहलू को प्रभावित कर रही है।

यही वजह है कि धुंआ रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन हो या धूम्रपान, तम्बाकू के सेवन से महिलाओं में बीमारियां तो बढ़ ही रही हैं प्रजजन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। तम्बाकू ने बढ़ते प्रयोग से दिल की बीमारी, मुंह, फेफड़े, गले, पेट, गुर्दे, मूत्राशय एवं यकृत का कैंसर, मसूढ़ों की बीमारी, ब्रेन अटैक, निमोनिया, उच्च रक्तचाप, लकवा, अवसाद, नपुंसकता और प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने जैसी अनगिनत क्रॉनिक समस्याएं पैदा हो रही हैं।

महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और असामान्य बच्चों के जन्म का भी बड़ा कारण बन रहा है। तम्बाकू उत्पादों की वजह से गर्भवती महिलाओं में अनीमिया का खतरा 70 प्रतिशत तक बढ़ा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भी 85,000 पुरुष और 34,000 महिलाओं में कैंसर के नए मामले सामने आए हैं।

जिनमें 90 फीसदी मामलों में किसी न किसी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल है ही इस रोग का कारण बना है द्य ऐसे में यह सोचना जरूरी है कि तम्बाकू का सेवन किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। महिलाओं के लिए तो यह ज्यादा खतरनाक है।

नार्वे में हुए एक अध्ययन के अनुसार धूम्रपान से महिलाओं की हड्डियों के खोखला होने, हृदय रोग, समय से पहले रजोनिवृति और बांझपन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

विडंबना ही है एक ओर बदलती जीवनशैली के नाम पर तो दूसरी ओर पोषण की बुनियादी जरूरत भी पूरी ना हो पाने के कारण, आधी आबादी तम्बाकू की जद में आ रही है।

इस रिपोर्ट में सामने आया एक दुखद सच यह भी है कि वंचित वर्ग की महिलाओं में तंबाकू के सेवन का एक अहम कारण कठिन या मेहनत वाले काम के दौरान भूख को दबाने की इच्छा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम रुपयों में स्मोकलेस टोबेको का उपलब्ध होना ही महिलाओं द्वारा इसके बढ़ते प्रयोग का अहम कारण है।

निःसंदेह गरीब तबके की महिलाओं की इसकी सरल उपलब्धता व्याधियों के जाल में फंसा रही है। भारत में वर्ष 2009-10 में पंद्रह साल या उससे अधिक उम्र की महिलाओं के बीच कराए गए ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू चबाना तंबाकू इस्तेमाल का सबसे प्रचलित तरीका है तथा करीब 26 फीसदी लोग तंबाकू चबाते हैं। उनमें 33 फीसदी पुरुष और 18 फीसदी महिलाएं हैं।

निःसंदेह यह एक बड़ा आंकड़ा हैं। क्योंकि हमारे सामाजिक पारिवारिक परिवेश में महिलायें ऐसी आदतों की गिरफ्त में कम ही आतीं थी। आमतौर पर ये माना जाता है कि तम्बाकू का सेवन केवल पुरुष ही करते हैं । महिलाएं या तो तम्बाकू की जद में हैं ही नहीं या बहुत कम हैं। लेकिन आंकडे बताते हैं दुनिया भर के 68 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तम्बाकू का प्रयोग करते हैं।

एक वैश्विक अध्ययन के नतीज तो यह भी कहते हैं कि भारत में धूम्रपान करने वाले मर्दों की तादाद में कमी आई है, लेकिन महिलाओं की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालात ये हैं महिलाओं में बढती आर्थिक निर्भरता आंकड़ों को तंबाकू और सिगरेट उद्योग, आधी आबादी के रूप में एक अच्छे और बढ़ते ग्राहक वर्ग के तौर पर देखने लगा है।

गौर से देखें तो पायेंगें कि अब तम्बाकू विज्ञापन महिलाओं और लड़कियों को भी हिस्सा बनाया जाता है। ऐसे विज्ञापनों में खूबसूरती और तंबाकू के मेल से खुलेपन और जिंदादिली के साथ जीने की एक नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। ऐसा होना लाजिमी भी है क्योंकि सिगरेट पीने के मामले में अमेरिकी महिलाओं के बाद दूसरे नम्बर पर भारतीय महिलाएं ही हैं।

तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वाला व्यक्ति महिला हो या पुरुष, इनका आदी हो जाता है तो इस लत से बाहर आना बहुत मुश्किल होता है। यह आदत शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को ही नहीं मन की शक्ति को भी कमज़ोर करती हैं। आंकड़े बताते हैं कि पूरे विश्व में 50 से 60 लाख तथा भारत में 10 से 12 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष तम्बाकू से अपने प्राण गंवाते हैं।

इसीलिए बचाव ही इसका इलाज़ है। बावजूद इसके शिक्षित और जागरुक महिलाओं में भी धूम्रपान और धुंआ रहित तंबाकू के सेवन के आंकड़े बढ़ रहे हैं। महानगरों में खुलेपन की जीवनशैली ही नहीं प्रतिस्पर्धा और कामकाज के दबाव के चलते भी युवा उम्र की महिलाओं में धूम्रपान की आदत जड़ें जमा रही है। इस आयुवर्ग की लड़कियां दोहरी जिम्मेदारी के चलते तनाव का भी शिकार बनती हैं।

लेकिन शिक्षित और सजग महिलाओं को यह समझना होगा कि तम्बाकू का सेवन उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है। केवल इतना ही नहीं युवा वर्ग में तंबाकू के सेवन का एक कारण आज का प्रतिस्पर्धा भरा जीवन भी है। काम के तनाव को कम करने के लिए युवा महिलाएं सिगरेट या फिर बिना धुएं के तंबाकू का सहारा ले रही हैं।

इसके अलावा इसके सेवन के पीछे एक कारण समय पर खानपान न होना भी देखा गया है। काम के दबाव में कामकाजी महिलाएं समय पर खाना नहीं खा पाती। भूख लगने पर वे सिगरेट या तंबाकू का सेवन कर लेती है। जिससे कुछ समय के लिए भूख कम होती है। ऐसा करके वे अपने जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर इस लत के पीछे स्टेट्स को भी देखा जा सकता है।

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