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प्रदीप सरदाना का लेख : विश्व आराध्य सियावर राम

मोदी ने भगवान राम की अंतरराष्ट्रीय व्यापकता को लेकर जो उदाहरण दिए वे बताते हैं कि राम विश्वभर में सदियों से आराध्य रहे हैं। सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश इंडोनेशिया में आज भी राम पूजनीय हैं। वहां योगेश्वर और स्वर्णदीप जैसी रामायण हैं। मलेशिया में ‘हिकायत सेरी राम’ तो लाओ में ‘फ्रा लाक फ्रा लाम’ रामायण है और कंबोडिया में ‘रमकेर रामायण’ तो थाईलेंड में ‘रामाकेन’ रामायण है। ईरान और चीन सहित अन्य देशों में राम कथाओं का विवरण मिलता है।

प्रदीप सरदाना का लेख :  विश्व आराध्य सियावर राम
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प्रदीप सरदाना

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान किस तरह देश राममय हुआ वह नज़ारा सभी ने देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस भक्तिभाव और विधिविधान पूजा के साथ भूमि पूजन कर रहे थे, वे दृश्य सदा के लिए मस्तिक पटल पर अंकित हो गए हैं। यह पहला मौका था जब इस समारोह की कवरेज के दौरान देश के लगभग तमाम बड़े न्यूज़ चैनल्स, धार्मिक चैनल्स के रूप में प्रतीत हो रहे थे। जो तड़के-सुबह से दोपहर बाद तक लगातार इस धार्मिक आयोजन की विश्वव्यापी कवरेज देते रहे।

हालांकि कोरोना महामारी के चलते इस ऐतिहासिक और भव्य समारोह में सिर्फ करीब 200 अतिथियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन मीडिया के बीच इसे कवर करने के लिए ऐसी मारामारी थी कि मीडिया संस्थानों के मशहूर बड़े संवाददाता ही नहीं कई संपादक तक, चार दिन पहले ही अयोध्या पहुंच गए थे। किसी धार्मिक आयोजन की ऐसी महा कवरेज इससे पहले कभी देखने को नहीं मिली।

आखिर यह मौका भी इतना बड़ा था कि इस घड़ी का इंतज़ार करीब पांच सदियों से था। पिछले तीस बरसों से तो राम मंदिर निर्माण का मामला एक बड़े आंदोलन के रूप में चल रहा था। जिसके लिए कितने ही लोग अपने जीवन की आहुति दे चुके थे, इसलिए अब मोदी राज में यह पावन घड़ी आई तो हर कोई राम मंदिर शिलान्यास को अपनी आंखों से देखने को लालायित था। इस बात की तो बेहद खुशी थी ही कि लगभग 500 साल बाद अंततः राम मंदिर के लिए शिलान्यास हो रहा है, लेकिन यह खुशी तब और भी बढ़ गई जब ये काज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्पन्न हुआ। वह भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की देखरेख में। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और रामजन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास जैसी विभूतियों की मौजूदगी में।

प्रधानमंत्री मोदी धर्मशास्त्रों के प्रकांड ज्ञाता हैं, इस बात की मिसाल पहले भी कुछ मौकों पर मिल चुकी है। धर्म के प्रति उनकी गहन आस्था भी सर्वविदित है। यूं राममंदिर के भाजपा आंदोलन से भी मोदी शुरू से ही जुड़े हैं, लेकिन केदारनाथ क्षेत्र में अपनी बरसों की साधना-तपस्या के कारण उनकी पहचान शिव भक्त के रूप में अधिक रही है। फिर साल में दो बार नवरात्र के दिनों में, जिस तरह मोदी सिर्फ नींबू पानी पीकर 9 दिन का उपवास रखते हैं, उससे पता लगता है कि मां दुर्गा के भी वह बड़े उपासक हैं, लेकिन राम मंदिर शिलान्यास के दौरान नरेंद्र मोदी ने यह भी बता दिया कि वह भगवान राम के भी बड़े भक्त ही नहीं उनको लेकर इतना ज्ञान रखते हैं कि कोई अन्य राजनेता उनके दूर-दूर तक नहीं ठहरता। वह राजनीति के ही नहीं धर्म के भी महान विशेषज्ञ हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भूमि पूजन के दौरान एक सामान्य भक्त के समान हनुमान जी और राम लला की आराधना तो की ही। साथ ही राम लला के सामने जिस तरह वह पूरी तरह दंडवत होकर नतमस्तक हुए वह दृश्य तो सभी के दिलों में घर कर गया, लेकिन भूमि पूजन के बाद अपने सम्बोधन में भगवान राम और रामायण को लेकर मोदी ने जो अपनी बातें कहीं उनका तो कोई सानी ही नहीं है। बड़ी बात यह भी थी कि उन्होंने वे तमाम बातें किसी लिखित भाषण से प्रस्तुत नहीं कीं। उनको सब कुछ कंठस्थ था। धर्म के प्रति इतना परम ज्ञान अब से पहले किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री में नहीं देखा गया।

यूं पीएम मोदी ने अपने उस सम्बोधन की शुरुआत ही जब 'सियावर रामचन्द्र की जय' और 'जय सियाराम' से की तो सभी चौंके कि अभी तक तो जय श्रीराम का उद्घोष होता था, लेकिन अब जय सियाराम क्यों? असल में इसका एक सीधा अर्थ तो यह है कि अभी तक राम मंदिर एक आंदोलन था तो 'जय श्री राम' का नारा एक अत्यंत जोश और कुछ उस आक्रमण का प्रतीक था, जब रावण युद्ध के दौरान बजरंगबली, जय श्री राम बोलते थे, लेकिन अब यह आंदोलन नहीं रहा। उसमें वैधानिक रूप से विजय प्राप्त हो गई है तो अब 'जय सियाराम' नम्रता का प्रतीक लगता है, लेकिन इसका एक अर्थ यह भी है कि अयोध्यावासियों को एक प्राचीन गलती के लिए अभी तक कोसा जाता है। वह यह कि वहां की प्रजा ने सीताजी की पवित्रता के प्रति शंका की थी। इसी के चलते राजा राम ने परिवार से पहले राज धर्म को मानते हुए सीताजी का त्याग कर दिया था। हालांकि अयोध्या ने अपनी उस गलती का पश्चाताप तभी कर लिया था। अयोध्या के घरों की दीवारों पर जय श्रीराम से ज्यादा जय सिया राम, जय सीताराम लिखा होता है, लेकिन इस सबके बावजूद कुछ लोग अब भी अयोध्या को दोषी ठहराते रहे हैं, इसलिए पीएम मोदी ने अयोध्या में 'जय सिया राम' और 'सियावर रामचंद्र की जय' का उदद्घोष करके, साफ कर दिया कि अयोध्या सिर्फ राम को ही नहीं सीता की भी आराधना करेगी।

इसके अलावा मोदी ने जिस तरह राम की व्याख्या की उससे स्पष्ट हो गया कि राम सिर्फ किसी एक धर्म, एक राज्य या एक देश के नहीं। 'राम सबके हैं, राम सब में हैं'। मोदी के शब्दों की बानगी देखते ही बनती है-'भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं। हजारों साल पहले वाल्मीकि रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ प्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्य युग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिये भारत को बल दे रहे थे। वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में शक्ति बनकर मौजूद थे।'

मोदी ने राम की पूरे भारत में सर्वव्यापकता की एक मिसाल यह भी दी कि 'रामायण' तमिल में 'कंब रामायण' के नाम से प्रचलित है तो तेलुगू में रघुनाथ और रंगनाथ रामायण है। वहीं उड़िया में 'रुईपाद कातेड़पदी' रामायण है तो कन्नड में 'कुमुदेन्दु' रामायण है। ऐसे ही कश्मीर में रामावतार चरित मिलेगा तो मलयालम में रामचरित और बांग्ला में 'कृतिवास रामायण' है। गुरु गोविंद सिंह ने तो तो खुद 'गोबिन्द रामायण' लिखी। जो यह बताता ही राम सभी युग में हैं।

पीएम मोदी ने अपने सम्बोधन में उन लोगों की आंखों से भी पट्टी हटाई जो अपने ही देश में राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करते हैं। मोदी ने भगवान राम की अंतरराष्ट्रीय व्यापकता को लेकर जो उदाहरण दिए वे बताते हैं कि राम विश्वभर में सदियों से आराध्य रहे हैं। इसकी बड़ी मिसाल सभी को हैरत में डालती है कि एक ओर मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर का अस्तित्व समाप्त करना चाहा तो दूसरी ओर विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला देश इंडोनेशिया में आज भी राम पूजनीय हैं। वहां योगेश्वर और स्वर्णदीप जैसी रामायण हैं। ऐसे ही मलेशिया में 'हिकायत सेरी राम' तो लाओ में 'फ्रा लाक फ्रा लाम' रामायण है और कंबोडिया में 'रमकेर रामायण' तो थाईलेंड में 'रामाकेन' रामायण है। श्रीलंका में रामायण कथा जानकी हरण के नाम से सुनाई जाती है नेपाल तो माता जानकी से जुड़ा है। यहां तक ईरान और चीन सहित दुनिया के अन्य बहुत से देशों में राम कथाओं का विवरण मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी की ये सब बातें जहां उनके राम ज्ञान को प्रस्तुत करती हैं वहीं बताती हैं कि प्राचीन काल से ही पूरे संसार में राम किसी न किसी रूप में विद्यमान हैं।

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