Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

आर.के. सिन्हा का लेख : काश राहुल को होती पूरी जानकारी

राहुल गांधी का इतिहास बोध शून्य है तो शायद उन्हें मालूम भी न हो कि हमारे श्ाासकों के चीन प्रेम के चलते ही भारत को 1962 के युद्ध में मुंह की खानी पड़ी थी। चीन की तरफ से कब्जाए हुए इलाके का क्षेत्रफल कितना है? यह 37,244 वर्ग किलोमीटर है। जितना क्षेत्रफल पूरी कश्मीर घाटी का है, उतना ही बड़ा है अक्सईचिन। राहुल गांधी अगर तथ्यों को जान लें तो कहीं बेहतर होगा।

आर.के. सिन्हा का लेख : काश राहुल को होती पूरी जानकारी
X

राहुल गांधी

आर.के. सिन्हा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मानसिक दिवालियापान पर अब दया भर ही आती है। उन्हें भाषाई संस्कार की तनिक भी समझ नहीं है। वे किसी को भी कुछ भी कह सकते हैं या कोई भी घटिया आरोप लगा सकते हैं। वे देश की 135 करोड़ जनता के प्रधानमंत्री को बेशर्मी से गद्दार और कायर कह रहे हैं। इस तरह के आरोप तो कोई निरक्षर भी अपने किसी शत्रु पर भी नहीं लगाता।

राहुल गांधी का हिन्दी ज्ञान तो मिडिल क्लास से भी कम का लगता है क्योंकि, मिडिल क्लास के भी बच्चे जानते हैं कि ''गद्दार'' कौन होता है और ''कायर'' का मतलब क्या होता है। बेहतर तो यह होगा कि वे इतिहास की कुछ पुस्तकों को पढ़कर जान लें कि देश के साथ गद्दारी किस प्रधानमंत्री ने की और कायरता का व्यवहार किसने किया। राहुल गांधी को पता होना चाहिए कि पहली गद्दारी देश के साथ तब हुई जब आजादी के तुरंत बाद ही जब कश्मीर के राजा हरि सिंह ने कश्मीर को भारत के साथ पूर्ण विलय का प्रस्ताव रखा, उसे अनावश्यक शर्तें रखकर राहुल के परदादा जवाहर लाल नेहरु द्वारा ठुकराया गया। एक व्यक्ति शेख अब्दुल्ला और उनके परिवार को संतुष्ट करने के चक्कर में यह सारा काम हुआ था। आधा कश्मीर कबाइलियों के नाम पर पाकिस्तान सेना द्वारा कब्जा होने दिया गया, यही तो थी, देश के साथ पहली बड़ी गद्दारी ।

राहुल गांधी की जानकारी के लिए देश के साथ दूसरी गद्दारी और कायरतापूर्ण व्यवहार तब हुआ, जब तिब्बत को चीन ने जबरदस्ती हड़पा और हम तिब्बत को बचाने की जगह हिन्दी-चीनी भाई-भाई का नारा लगवाते रहे । तीसरी गद्दारी तब हुई जब 1962 में हमारे शासकों के कायरतापूर्ण व्यवहार के कारण भारतीय सेना को सही ढंग से लड़ने की छूट नहीं दी गई और पूरा अक्साईचीन सहित हजारों वर्ग किलोमीटर से ज्यादा भूमि चीन के कब्जे में जाने दी गई, जो आज भी चीन के ही कब्जे में है। भारत की चीन नीति पर सरकार को कोसने वाले राहुल गांधी यह भी जाने लेंगे कि चीन को भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनवाने में अहम रोल अदा किया था पंडित जवाहर लाल नेहरु ने। नेहरु का चीन प्रेम जगजाहिर था। उन्होंने सोवियत संघ द्वारा भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के छठे स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने की पेशकश को खारिज करते हुए कहा था कि भारत के स्थान पर चीन को जगह मिलनी चाहिए।

अगर कांग्रेसी नेता शशि थरूर को ही पढ़ लिया होता काश राहुल गांधी को पता होता कि भारत को 1953 में ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बनाने की पेशकश हुई थी। पंडित नेहरु ने उस पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। यह जानकारी पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने ही आधिकारिक रूप से तब दी थी जब वे संयुक्त राष्ट्र के अंडर सेक्रेटरी जनरल थे। भारत को तो बीती सदी के पांचवें दशक में अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने ही अलग-अलग समय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता दिलवाने की पेशकश की थी। तब ये दोनों देश ही संसार के सबसे शक्तिशाली देश थे। इनके पास शक्ति थी कि वे किसी अन्य देश को सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में जगह दिलवा सकते थे। लेकिन नेहरु ने इन दोनों देशों की पेशकश को ठुकराकर चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जगह देने की वकालत की।

थरूर अपनी पुस्तक नेहरु-दि इनवेंशन आफ इंडिया में दावा करते हैं कि जिन भारतीय राजनयिकों ने उस दौर की विदेश मंत्रालय की फाइलों को देखा है, वे मानेंगे कि नेहरु ने संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थायी सदस्य बनने की पेशकश को ठुकरा दिया था। नेहरु ने कहा था कि भारत की जगह चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले लिया जाए। तब तक ताइवान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य था। नेहरुजी का अमेरिकी पेशकश को अस्वीकार करने से बढ़कर देश के साथ गलती का कोई उदाहरण नहीं हो सकता, जो यह सिद्ध करता है कि वे देश के सामरिक हितों को ताक पर रखकर अपने व्यक्तित्व को चमकाने में लगे थे।

चूंकि राहुल गांधी का इतिहास बोध शून्य है तो शायद उन्हें मालूम भी न हो कि नेहरु जी के चीन प्रेम के चलते ही भारत को 1962 के युद्ध में मुंह की खानी पड़ी थी। चीन की तरफ से कब्जाए हुए इलाके का क्षेत्रफल कितना है? यह 37,244 वर्ग किलोमीटर है। जितना क्षेत्रफल पूरी कश्मीर घाटी का है, उतना ही बड़ा है अक्सईचिन।

दरअसल आज तक हमारे देश के गद्दारी करने वाले मौज ही करते रहे। अब देखिए कि जिस कम्युनिस्ट शख्स को 1962 की जंग का खलनायक माना जाता है। उसी कृष्ण मेनन के नाम पर राजधानी की एक महत्वपूर्ण इलाके की सड़क भी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं कृष्ण मेनन मार्ग की। यहां उनकी एक मूर्ति भी लगी है। वे भारत के पूर्व रक्षा मंत्री थे। क्या इस सड़क का नाम कृष्ण मेनन मार्ग होना चाहिए, यह सवाल तो नई पीढ़ी पूछेगी ही। जब भारत-चीन की फौजें आमने-सामने होती हैं कृष्ण मेनन और नेहरु याद तो आएंगे ही। चीन से 1962 के युद्ध के दौरान भारतीय सेना की कमजोर तैयारियों के लिए कृष्ण मेनन को खलनायक माना जाता है। उस जंग में हमारे सैनिक कड़ाके की ठंड में पर्याप्त गर्म कपड़े पहने बिना ही लड़े थे। उनके पास दुश्मन से लड़ने के लिए आवश्यक शस्त्र भी नहीं थे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दि मैनी लाइव्स ऑफ वीके कृष्ण मेनन में लिखा है कि मेनन जब 1957 में रक्षा मंत्री बने तो देश में उनकी नियुक्ति का स्वागत हुआ था। उम्मीद बंधी थी कि मेनन और सेना प्रमुख कोडन्डेरा सुबय्या थिमय्या की जोड़ी रक्षा क्षेत्र को मजबूती देगी। पर यह हो न सका मेनन के घमंडी और जिद्दी व्यवहार के कारण। लेकिन, चीन युद्ध में शर्मनाक हार के आठ सालों के बाद कृष्ण मेनन के 10 अक्तूबर, 1974 को निधन होने के तुरंत बाद इंदिरा गांधी ने उनके नाम पर एक अति विशिष्ट क्षेत्र की सड़क समर्पित कर दी।

25 जून, 1975 को राजधानी के रामलीला मैदान में लाखों लोगों की हुई रैली के बाद इंदिरा गांधी ने आधी रात को लोकतंत्र और स्वतंत्र मीडिया को ताक पर रखकर इमरजेंसी लगा दी थी। उस रैली में शामिल जयप्रकाश नारायण जी, आचार्य कृपलानी जी, विजय लक्ष्मी पंडित, अटल बिहारी वाजपेयी, मोरारजी देसाई वगैरह को गिरफ्तार कर लिया गया था तो यह क्या था। वे विपक्ष के शांतिपूर्ण विरोध को बर्दाशत नहीं कर सकीं। राहुल गांधी हो सके तो ये सब जानकारियां जुटा लेंे जान लेना। एक तथ्य और भी है, जब श्रीलंका में वहां की सरकार तमिल मूल के आन्दोलनकारियों का दमन कर रही थी, तब राजीव गांधी जी ने लिट्टे नेता प्रभाकरण और आतंकवादियों को भारत बुलाकर भारतीय सेना द्वारा प्रशिक्षित करवाया। जबकि, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने मना किया था। जब लिट्टे ने श्रीलंका की सेना के दांत खट्टे करने शुरू किए तब बदनामी से बचने के लिए हजारों सैनिकों को वहां भेज दिया।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

Next Story