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देश हित में नहीं ‘बोट टेरर’ पर सियासत, क्या राजनीतिक पार्टियां चिंतन करेंगी?

क्या राजनीतिक पार्टियां चिंतन करेंगी?

देश हित में नहीं ‘बोट टेरर’ पर सियासत, क्या राजनीतिक पार्टियां चिंतन करेंगी?
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‘बोट टेरर’ पर सियासत शुरू हो गई है। सियासत कांग्रेस ने शुरू की है। पोरबंदर में कोस्टगार्ड के ऑपरेशन पर कांग्रेस के प्रवक्ता अजय कुमार ने मोदी सरकार पर श्रेय लेने का आरोप लगाया और इस ऑपरेशन को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। इस आॅपरेशन में भारतीय समुद्री सीमा में घुसी संदिग्ध पाकिस्तानी बोट को वेस्ट कोस्टगार्ड की टीम ने पकड़ने की कोशिश की थी। इस दौरान अपने को भारतीय शिकंजे में घिरते देख संदिग्ध बोट में सवार लोगों ने बोट समेत खुद को समुद्र में उड़ा लिया था।
खबर आई यह पाक बोट थी और वह भारत में 26/11 जैसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की कोशिश में थी। इतनी बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर देना भारतीय नेवी की टीम की बड़ी सफलता थी। खुफिया एजेंसी भी लगातार सरकार को रिपोर्ट दे रही थी कि सीमा पार के आतंकी देश में बड़े हमले की फिराक में हैं। यह भी किसी छिपी नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकियों के निशाने पर हैं। इसलिए नेवी के इस आॅपरेशन की सफलता का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर स्वागत किया जाना चाहिए था, लेकिन हमारे देश की विडंबना है कि सरकार की हर कामयाबी को राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है। इस कड़ी में कांग्रेस ने आतंकवाद जैसे संवेदनशील और गंभीर मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर सवाल के बहाने सियासत कर देश की नजर में अपने को ही छोटा करने की कोशिश की है।
सत्ताधारी दल भाजपा ने कांग्रेस की इस सियासत पर जरूर कड़ा ऐतराज जताया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां तक कह दिया कि ‘बोट टेरर’ के खिलाफ ‘आॅपरेशन’ पर सवाल खड़े करके कांग्रेस ने पाकिस्तान की मदद की है, वह पाक को आॅक्सीजन दे रही है। भाजपा की इतनी तल्ख टिप्पणी को कांग्रेस बेशक राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखे, लेकिन इस राष्ट्रीय पार्टी के लिए आत्मचिंतन का वक्त है। कांग्रेस पर लगातार समुदाय विशेष को ध्यान में रखकर राजनीति करने का आरोप लगता रहा है। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भगुतना पड़ रहा है, पार्टी चुनाव दर चुनाव सिकुड़ती जा रही है। लेकिन आतंकवाद और उसके खिलाफ ऑपरेशन के मुद्दे पर कांग्रेस जैसी देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी की इस तरह हल्की टिप्पणी उसकी राजनीतिक दिशाहीनता को ही दर्शाती है।
क्या कोई उम्मीद करेगा कि कांग्रेस टेरर बोट के खिलाफ ऑपरेशन पर सवाल उठा सकती है। कम से कम देश की सुरक्षा के प्रति गंभीर कोई भी ऐसा नहीं सोचेगा। पाकिस्तान से भारत के कटु संबंध जगजाहिर है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद पाक प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सरकार ने जिस तरह कड़ा रवैया अपनाया है, उसी का नतीजा है कि जहां देश में आतंकी हमलों में कमी आई है, वहीं वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान तेजी से बेनकाब हुआ है। संयुक्त राष्ट्र में भी पाक को मुंह की खानी पड़ी। इस समय पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भारी ग्लोबल दबाव है। कुछ दिन पहले आतंकी संगठन अलकायदा ने भी वीडियो जारी कर भारत में पांव पसारने की योजना की बात कही थी। उसका मकसद भी भारत में आतंक फैलाना ही है।
इस तरह से देखा जाए तो भारत सरकार के सामने सीमा पार आतंकवाद की बड़ी चुनौती है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के अभियान को सपोर्ट करना चाहिए, चाहे केंद्र में किसी भी दल की सरकार हो। सियासत के लिए देश में बहुत मुद्दे हैं। क्या राजनीतिक पार्टियां चिंतन करेंगी?

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