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क्या सीबीआई प्रधानमंत्री से पूछताछ कर पाएगी!

कोयला घोटाले में पूर्व कोल सचिव पीसी पारेख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला पर सीबीआई के एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं

क्या सीबीआई प्रधानमंत्री से पूछताछ कर पाएगी!
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कोयला घोटाले में पूर्व कोल सचिव पीसी पारेख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला पर सीबीआई के एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वैसे में उनकी चुप्पी टूटनी स्वाभाविक थी। बिड़ला समूह की कंपनी हिंडाल्को का मामला सामने आने के बाद तो केंद्र सरकार बुरी तरह फंसती दिख रही है, क्योंकि अब मामला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ गया है। ऐसे में विपक्ष यह सवाल उठा रहा है तो गलत नहीं है कि जब हिंडाल्को के मामले में कोयला मंत्रालय के तत्कालीन कोल सचिव का नाम लिया जा रहा है और कोल ब्लॉक पाने वाले को भी आरोपी बनाया जा रहा है तो क्या जिसने इस आवंटन पर अंतिम मुहर लगाई, उसे यानी प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि वे कानून से ऊपर नहीं हैं और सीबीआई या अन्य संबंधित ऑथोरिटी उनसे सवाल पूछ सकती है। वे उनका सामना करने को तैयार हैं, तो यहां सवाल उठता है कि क्या निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें प्रधानमंत्री के पद से हट नहीं जाना चाहिए? और यदि ऐसी स्थिति बनती है तो क्या कांग्रेस प्रधानमंत्री बदलने के लिए तैयार है? कुछ ही दिन हुए हैं जब उन्हें कहना पड़ा था कि बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटन का फैसला तय नियम-कानूनों के आधार पर हुआ था और उस प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं हुआ है। दरअसल, जिस हिंडाल्को को कोल ब्लॉक तालबीरा-2 आवंटित किया गया, उसे सीबीआई अपारदर्शी बता रही है। इसी में उसने पीसी पारेख और बिड़ला को आरोपी बनाई है। प्रधानमंत्री ने 2005 में अंतिम रूप से इसका आवंटन किया था, जबकि इस पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी ने तालबीरा-2 को पब्लिक सेक्टर की कंपनी नेयवेली लिग्नाइट को देने की सिफारिश की थी। सीबीआई ने माना है कि इससे नेयवेली लिग्नाइट को नुकसान पहुंचा है, वहीं पीएमओ का कहना है कि हिंडाल्को को देने का फैसला और स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिशें पलटने का निर्णय ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कहने पर किया गया। हालांकि कोलगेट से संबंधित अब तक के जांचों को पीएमओ सही मानता रहा है, परंतु अब जब जांच की आंच पीएमओ और प्रधानमंत्री की चौखट पर पहुंच गई है, तब सीबीआई पर ही कईतरह के दबाव बनाए जा रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है, वरन कोलगेट की इतनी परतें शायद ही खुलतीं। कोलगेट का पूरा सच क्या है, और इसमें कहां अनियमितता बरती गई है इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा, लेकिन सवाल यह है कि प्रधानमंत्री की भूमिका पर जांच करेगा कौन? क्या सीबीआई इसके लिए तैयार है। यदि एफआईआर पर जांच आगे बढ़ती है तो क्या सीबीआई डॉ. मनमोहन सिंह से पूछताछ कर पाएगी! सरकार ने सीबीआई को स्वतंत्र नहीं रहने दिया है। और अब तो खुलकर सीबीआई पर दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है कि वह इस मामले को बंद कर दे। और इसकी अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

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