Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ओपिनियन पोल से क्यों भयभीत है कांग्रेस

ओपिनियन पोल को लेकर कांग्रेस घबरा गई है, ऐसा लगता है पर क्यों? पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, उसकी धड़कनें भी तेज होने लगी हैं।

ओपिनियन पोल से क्यों भयभीत है कांग्रेस
X

ओपिनियन पोल को लेकर कांग्रेस घबरा गई है, ऐसा लगता है पर क्यों? पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, उसकी धड़कनें भी तेज होने लगी हैं। आज प्रिंट तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के हर सर्वे में पिछड़ने की खबरें सामने आना तो इसकी वजह नहीं है। यही तो वजह नहीं है कि चुनाव आयोग ने जब सभी राजनीतिक पार्टियों से चुनावों के पूर्व ओपिनियन पोल के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाने के संबंध में राय मांगी कि क्या इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए, तो कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव का खुलकर सर्मथन किया। यह भी बात कम रुचिकर नहीं है कि चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव को किसी अन्य राजनीतिक पार्टी का सर्मथन नहीं मिला है। इसके लिए कांग्रेस की ओर से तर्क दिया जा रहा हैकि ओपिनियन पोल की प्रक्रिया न तो वैज्ञानिक है और न ही पारदर्शी। ऐसे में इससे लोगों को गुमराह ही किया जा सकता है, लेकिन यहां एक सवाल यह भी उठता हैकि क्या इसी सर्वे की रिपोर्ट जब उसके पक्ष में जाती तो भी क्या कांग्रेस ऐसा कहती? इसकी गुंजाइश कम है। अभी बहुत दिन नहीं बीते हैं जब कर्नाटक विधानसभा चुनावों के सर्वे कांग्रेस के पक्ष में जा रहे थे, तब तो उसने इसे भारतीय जनता पार्टी की विफलता से जोड़ा था। परंतु अब जब पांच राज्यों के चुनावों में उसे हानि होती दिख रही हैतो उसे इसमें दोष क्यों दिखाईदेने लगे? ऐसे में मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा का कहना कि कांग्रेस अपनी घटती लोकप्रियता से घबराई हुई है, गलत नहीं लगता। हाल ही में जितने ओपिनियन पोल आए हैं, उनमें कांग्रेस की स्थिति खराब रहने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में ओपिनियन पोल पर उसकी राय किसी को बहुत ज्यादा चौंकाने वाली भी नहीं है। आज केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार की अक्षमता का सबको पता चल गया है। कई राज्यों में भी उसकी स्थिति ठीक नहीं है। पार्टी को इसे स्वीकारना चाहिए। पहले चुनावों के पूर्व एक्जिट पोल के आधार पर जनता के रुझानों का अंदाजा लगाया जाता था, जिसे कुछ दलों ने मिलकर बंद करवा दिया। अब ओपिनियन पोल को भी बंद करवाने पर तुले हुए हैं। यह सही है कि ओपिनियन पोल में सभी मतदाताओं की राय नहीं ली जाती है, लेकिन इसके आधार पर कईबार सही रुझान मिलते रहे हैं। सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने का यह बहुत अच्छा तरीका माना जाता रहा है। हालांकि ओपिनियन पोल कईबार प्रायोजित भी होते हैं। कोई भी पैसे देकर अपने पक्ष में ओपिनियन पोल करा सकता है। इस शंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ लोग अपने हित साधने के लिए टीवी चैनलों की ओर से प्रायोजित सर्वेक्षण करा सकते हैं। ओपिनियन पोल की एक और बड़ी समस्या यह भी देखने को मिलती है कि अलग-अलग सर्वे में अलग-अलग रुझान आते हैं जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और लोग गुमराह होते हैं। परंतु भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां की संविधान ने लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार दिए हैं। ऐसे में इस तरह के कोई कदम उठाने से पहले इसका खयाल रखना होगा कि आम लोगों के अधिकारों का कहीं दमन तो नहीं हो रहा है। सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर इस मसले को देखना चाहिए।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top