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सुशील राजेश का लेख : कौन करेगा निरीक्षण

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्यसभा सांसदों के साथ वर्चुअल बैठक की, तो तनाव अपनी हदें लांघता हुआ बताया गया। हालांकि इस बैठक की अधिकृत ब्रीफिंग नहीं की गई, लेकिन बैठक में मौजूद सूत्रों के जरिए जो निकलकर आया है, उसका सारांश यह है कि युवा नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार पर सवाल किए हैं।

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Sonia Gandhi

सुशील राजेश

कोई जरूरी नहीं है कि सियासत पीढ़ियों के टकराव पर ही की जाए। इन दो आयु-वर्गों में सियासी द्वन्द्व भी बहुत कम सामने आया है। साठ और सत्तर के दशक में कामराज, निजलिंगप्पा, मोरारजी देसाई बनाम इंदिरा गांधी के आपसी टकराव की बुनियाद भी उम्र नहीं थी। उस कालखंड में कांग्रेस के अधिकतर बुजुर्ग नेताओं ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर पार्टी संगठन में काम करने की इच्छा जताई थी। तब जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। उन्होंने बुजुर्ग मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उसके बावजूद इंदिरा गांधी के कार्यकाल में कांग्रेस दोफाड़ क्यों हुई और कांग्रेस के साथ 'इंदिरा' का नाम क्यों चिपक कर रह गया?

इसका लंबा इतिहास है, लेकिन कांग्रेस में बुजुर्ग और युवा नेताओं के बीच तनाव और फासले एक बार फिर उभरकर सामने आ रहे हैं। लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने, मप्र में सत्ता गंवाने और मौजूदा राजस्थान संकट में पीढ़ियों के इसी द्वन्द्व को देखा जा सकता है। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्यसभा सांसदों के साथ वर्चुअल बैठक की, तो तनाव अपनी हदें लांघता हुआ बताया गया। हालांकि इस बैठक की अधिकृत ब्रीफिंग नहीं की गई, लेकिन बैठक में मौजूद सूत्रों के जरिए जो निकलकर आया है, उसका सारांश यह है कि युवा नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह की यूपीए-2 सरकार पर सवाल किए हैं। युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, गुजरात कांग्रेस के प्रभारी एवं पार्टी कार्यसमिति सदस्य राजीव सातव ने हैरानी जताई कि यूपीए-2 में कांग्रेस 200 से अधिक लोकसभा सांसदों की पार्टी थी। अब हम 44 और 52 पर क्यों पहुंच गए हैं? यदि आत्मनिरीक्षण ही करना है, तो घर से उसकी शुरुआत की जाए।

'घर' के मायने गांधी परिवार से हैं अथवा पूरी पार्टी से...! आत्मनिरीक्षण की मांग कपिल सिब्बल ने की थी, जिसके बाद चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस को सीधा लोगों तक जाना चाहिए और इस कदर मोहभंग के कारणों को जानना चाहिए, लेकिन सातव ने फिर सवाल किया कि डाॅ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और आप सभी सरकार में मंत्री थे। हमारे पास 10 साल तक सरकार रही। तो आत्मनिरीक्षण में यह जरूर सोचना चाहिए कि लगातार दो लोकसभा चुनावों में इतनी करारी हार कैसे और क्यों हुई? कुछ तो गलत हुआ था यूपीए-2 सरकार के दौरान? बैठक में सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा एके एंटनी, गुलाम नबी आज़ाद, अहमद पटेल, चिदंबरम और आनन्द शर्मा, सिब्बल आदि पूर्व केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे। युवा नेता एवं नए सांसद सातव के सवालों की व्याख्या यह की जा रही है कि वरिष्ठ और बुजुर्ग नेताओं पर हमले किए जा रहे हैं। इस बिन्दु पर पंजाब के वरिष्ठ सांसद शमशेर सिंह ने एक कदम बढ़कर यह दोषारोपण पार्टी नेतृत्व पर किया कि आजकल पार्टी में 'चमचागिरी' का राज है। पद और तरक्की 'चमचों' को ही दी जाती है। यह नहीं भूलना चाहिए कि बुजुर्ग नेताओं ने ही खून-पसीना एक करके और कड़ी मेहनत से पार्टी को सींचा है, न कि युवाओं ने पार्टी को बनाया है। गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने बैठक के दौरान कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि जो उन्हें कहना था, वह सांसदों को संबोधित करते हुए कहा। कमोबेश उन्होंने 'आत्मनिरीक्षण' की बात नहीं की। बहरहाल बैठक में दिग्विजय सिंह और पूनिया ने विषय बदल कर राहुल गांधी को दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग रखी। इस मांग के पीछे भी दलीलें यही थीं कि अब युवा पीढ़ी का दौर है। बैठक में राहुल गांधी नहीं थे। इस मांग का समर्थन सातव, असम कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा, शक्तिसिंह गोहिल और नीरज डांगी आदि ने भी किया।

साफ है कि कांग्रेस के बुजुर्ग और सत्ता भोग चुके नेताओं तथा पार्टी की युवा पीढ़ी के बीच द्वन्द्व की स्थिति है। जब सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष के पदों से हटाया गया, तो प्रिया दत्त, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, दीपेन्द्र हुड्डा और कुलदीप बिश्नोई सरीखे युवा पार्टी नेताओं ने टिप्पणियां की थीं कि पार्टी ने सिंधिया और पायलट जैसे होनहार, नेताओं को खो दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी में दोनों पीढ़ियों के बीच फासले गहरे और चौड़े भी होते जा रहे हैं। युवा पीढ़ी की सोच आक्रामक है, जबकि बूढ़े नेता अतीत को दोहराते रहना और युवाओं को कोसते रहना चाहते हैं। सोनिया के सामने ही सांसदों कीसाफगोई के अर्थ स्पष्ट हैं कि अब वह भी नेतृत्व छोड़ें।

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