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निरंकार सिंह का लेख : कौन बनेगा अंतरिक्ष का बादशाह

अब जंग जल, जमीन और आसमान से ऊपर अंतरिक्ष तक जा पहुंची है। इस जंग में रूस, अमेरिका अब बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। जल, जमीन, आकाश के बाद अब अंतरिक्ष पर बड़े देशों की नजर टिकी है। तीनों सीमाओं पर अपने वर्चस्व से आश्वस्त ये देश अब अंतरिक्ष फतह पर निकल पड़े हैं। वे जताना चाहते हैं कि भविष्य की लड़ाई अगर हुई तो वह आकाश से कई मील दूर अंतरिक्ष में की जाएगी। वहां जो भी बादशाहत कायम कर लेगा वही विश्व विजेता होगा।

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निरंकार सिंह

जंग अब जल, जमीन और आसमान से ऊपर अंतरिक्ष तक जा पहुंची है। इस जंग में रूस, अमेरिका अब बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। वैसे तो इस जंग की तैयारी अमेरिका, रूस और चीन बहुत पहले से कर रहे हैं। इसके पीछे उनकी सोच यह है कि अंतरिक्ष में जिसका वर्चस्व रहेगा वही दुनिया का सबसे बड़ा बादशाह बनेगा। पिछले दिनों रूस ने अपने एक से दूसरे सैटेलाइट पर मिसाइल से हमला करके मार गिराया। अमेरिकी सेना के स्पेस कमान के अनुसार अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे रूस के सैटेलाइट कॉसमॉस 2542 पर 15 जुलाई को उसके अपने ही सैटेलाइट कॉसमॉस 2543 ने मिसाइल से हमला करके नष्ट कर दिया।

अमेरिकी खुफिया विशेषज्ञ रूस के इस जुड़वां उपग्रह कॉसमॉस 2542 और 2543 पर कई महीने से नजर बनाए हुए थे। वह तब से नजर बनाए हुए हैं जब यह केवल एक उपग्रह था और इसे सोयूज रॉकेट की मदद से 26 नवंबर 2019 को अंतरिक्ष में छोड़ा गया था। सैटेलाइट लॉन्च होने के 11 दिन बाद यह दो भागों में बंट गया और एक नए सैटेलाइट कॉसमॉस 2543 को जन्म दिया। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसा पहली बार है जब अमेरिकी सेना ने रूस पर अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट वेपन के परीक्षण का आरोप लगाया है। इससे अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और चीन में बेचैनी बढ़ गई है।

हालंाकि पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर ऐलान किया था कि वह अमेरिकी सेना की छठी शाखा बनाना चाहते हैं जो अंतरिक्ष सेना होगी। देश की सुरक्षा के लिए ये जरूरी है कि अंतरिक्ष में अमेरिका की प्रभावी मौजूदगी हो, इसलिए अंतरिक्ष में यह अलग सेना होगी और इससे न केवल देश की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि नई नौकरियां बनेंगी और अर्थव्यवस्था में भी सुधार आयेगा। दरअसल अमेरिका, रूस या चीन जैसे किसी दूसरे देशों को इस मामले में आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहता। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दिसम्बर में एक ऐतिहासिक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। तब उन्होने कहा था कि 1972 के बाद वह अमेरीकियों को दोबारा चांद पर लेकर जाएंगे। ट्रंप ने अपने बयान से ये संकेत भी दिया कि वे तेजी से उभर रही कमर्शियल स्पेस इंडस्ट्री के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे।

नासा के प्रभुत्व को अब रूस चुनौती दे रहा है। उसके मिसाइल दागने से अब अंतरिक्ष में युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका का कहना है कि रूस अंतरिक्ष में ऐसे सैटेलाइट भेज रहा है जो हथियारों से लैस हैं। वह अंतरिक्ष में कक्षा के अंदर अपनी क्षमताएं विकसित कर रहा है जिसका मकसद उसकी अंतरिक्ष आधारित प्रणाली का शोषण करना है। उधर, रूस के इस कदम से ब्रिटेन और जापान की टेंशन बढ़ गई है। अमेरिका, जापान और ब्रिटेन ने इसे अंतरिक्ष की शांति के लिए खतरा करार दिया है। इससे पहले रूस ने स्पेस में एंटी सैटेलाइट वेपन का परीक्षण अंतरिक्ष में किया था। यह एक सैटेलाइट को स्पेस में हथियार के रूप में इस्तेमाल करने जैसा है। यह अंतरिक्ष को युद्ध के मोर्चे के रूप में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यही नहीं चीन भी बहुत तेजी से अंतरिक्ष में जंग की तैयारी कर रहा है। रूस और चीन की संयुक्त चुनौती से अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए संकट पैदा हो गया है। माना जा रहा है कि इससे अंतरिक्ष में भी हथियारों की नई रेस शुरू हो सकती है।

चीन ने मंगल ग्रह के लिए अपना पहला अंतरिक्ष यान तिआनवेन-1 इसी साल 24 जुलाई को सफलतापूर्वक रवाना किया है। चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार 2000 सेकंड की उड़ान के बाद यह रॉकेट पृथ्वी-मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया। इसके बाद अब यह मंगल ग्रह की ओर रवाना हो गया है। बताया जा रहा है कि चीन का अंतरिक्ष यान करीब 7 महीने की यात्रा के बाद फरवरी 2021 में मंगल ग्रह के गुरुवत्वाकर्षण वाले इलाके में प्रवेश कर जाएगा। यह अंतरिक्ष यान अपने साथ एक रोवर ले गया है जो मंगल की सतह पर लैंड करेगा। चीन के नेशनल स्पेस साइंस सेन्टर में भी खुफिया अंतरिक्ष परियोजनाओं को लगातार अंजाम दिया जा रहा है। चीन का अन्तरिक्ष बजट इस समय लगभग 70 करोड़ डालर है। चीन अंतरिक्ष परियोजनाओं के लिए घरेलू तकनीक विकसित कर रहा है। 2036 तक चीन चन्द्रमा पर वैज्ञानिक भेजने की तैयारी कर रहा है।

चीन ने 11 जनवरी 2007 को अंतरिक्ष में मौजूद अपने मौसमी उपग्रह को इसी तरह प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाया था। इससे वह अमेरिका व रूस के बाद ऐसा कारनामा दिखाने वाला तीसरा देश हो गया, पर अब यह क्षमता भारत ने प्राप्त कर ली है। अमेरिकी नेताओं और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन अंतरिक्ष मिशनों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। इन मिशनों के जरिये वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है। 2022 तक चीन स्पेस स्टेशन बनाने, चन्द्रमा की अंधेरी सतह पर उतरने और मंगल ग्रह पर मनुष्य को भेजने की तैयारी कर रहा है। यह योजना नासा की योजना से काफी आगे है। 2013 में चीन के एक राकेट ने अमेरिका की नींद उड़ा दी। चीन अपना राकेट अंतरिक्ष में 22 हजार मील तक ले गया। अंतरिक्ष में इतनी ही ऊंचाई पर अमेरिका अपनी सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील उपग्रह स्थापित करता है। वह इन उपग्रहों का इस्तेमाल अन्य देशों के बमों का पता लगाने में करता है। अब अमेरिका अन्तरिक्ष में उपग्रहों को सुरक्षित रखने के लिए एक कवच तैयार कर रहा है।

अमेरिकी सुरक्षा विभाग पेंटागन और इंटेलिजेंस एजेंसियां कई बिलियन डाॅलर के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। अमेरिकी एयरफोर्स के जनरल जाॅच हाइटन ने उपग्रहों की सुरक्षा के लिए इस प्रोजेक्ट को मोस्ट वेल्यूएबल रियल एस्टेट इन स्पेस बताया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अन्तरिक्ष में उसके उपग्रहों को कोई बंधक बना सकता है, इसीलिए अमेरिकी सुरक्षा विभाग खुफिया एजेसियां अपने उपग्रहों को और सक्षम बनाने पर विचार कर रही हैं। प्रशान्त महासागर में मौजूद अमेरिकी जंगी जहाज 'यूएसएस लेक एरी' ने कुछ वर्ष पहले 'एसएम-3' प्रक्षेपास्त्र से स्काईलैब की तरह पृथ्वी की ओर आ रहे उसके जासूसी उपग्रह को तीन मिनट के अन्दर पृथ्वी से 133 मील ऊपर ध्वस्त कर दिया था। चिन्ता की बात यह है कि प्रक्षेपास्त्र हमले के खिलाफ कवच तैयार करने की इस प्रणाली को दोनों ही देश विकसित कर रहे हैं।

रूस भी ऐसे प्रयोग करने में सक्षम है, तो वह भला पीछे कैसे रहेगा। ऐेसे में यही लगता है कि सामूहिक विनाश के हथियारों को अंतरिक्ष में जाने की होड़ बढ़ने की ही संभावना ज्यादा है। अंतरिक्ष में इस तरह के प्रयोग से लगता है कि यह एक तरह की महत्वाकांक्षा है, जो जमीन, जल और आकाश से निकलकर अब अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ा रही है। इससे आकलन किया जा रहा है कि कौन कितनी दूर मार कर सकता है। जल, जमीन, आकाश के बाद अब अंतरिक्ष पर बड़े देशों की नजर टिकी है। तीनों सीमाओं पर अपने वर्चस्व से आश्वस्त ये देश अब अंतरिक्ष फतह पर निकल पड़े हैं। वे जताना चाहते हैं कि भविष्य की लड़ाई अगर हुई तो वह आकाश से कई मील दूर अंतरिक्ष में की जाएगी। वहां जो भी बादशाहत कायम कर लेगा वही विश्व विजेता होगा।

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