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खरीद नेताओं की नाम हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब क्या है

इन दिनों सोशल मीडिया पर हॉर्स ट्रेडिंग काफी ट्रेंड कर रहा है। बड़ी मशक्कत के बाद भी जब जनता ने उन्हें कुर्सी पर बैठने का फुल समर्थन नहीं दिया तो भी वे परेशान न हुए। उन्हें पता है कि कुर्सी पर नैतिक तरीके से बैठने के बीसियों विकल्प बंद होने के बावजूद भी अनैतिक हजारों विकल्प खुले रहते हैं। जिसे कुर्सी पर बैठना हो वह साम, दाम, दंड, भेद, चटा, पटा, मंत्री पदों के हसीन सपने दिखा कैसे भी कुर्सी पर बैठ ही जाता है।

खरीद नेताओं की नाम हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब क्या है

इन दिनों सोशल मीडिया पर हॉर्स ट्रेडिंग काफी ट्रेंड कर रहा है। बड़ी मशक्कत के बाद भी जब जनता ने उन्हें कुर्सी पर बैठने का फुल समर्थन नहीं दिया तो भी वे परेशान न हुए। उन्हें पता है कि कुर्सी पर नैतिक तरीके से बैठने के बीसियों विकल्प बंद होने के बावजूद भी अनैतिक हजारों विकल्प खुले रहते हैं। जिसे कुर्सी पर बैठना हो वह साम, दाम, दंड, भेद, चटा, पटा, मंत्री पदों के हसीन सपने दिखा कैसे भी कुर्सी पर बैठ ही जाता है।

जिसे जो बकना हो बकता रहे। बस, मन में कुर्सी पर बैठने की जिद होनी चाहिए। अपने पास कटी-फटी कैसी भी हो, एक अदद दलील होनी चाहिए। अपने घोड़ों से बाजार में नोटों की गड्डियों के आगे भी एकजुट रहने की सख्त अपील होनी चाहिए। ज्यों ही हाईकमान के आदेश पर अपनी कुर्सी में जरूरत के हिसाब से जुते घोड़े होने के बाद भी सरकार बनाने को और समर्थन खरीदने गधे पर भ्रष्टाचार की अशर्फियां लादे वे अचानक मुझसे टकराए तो मैं उस हाल में उन्हें देख सन्न रह गया।

चुनाव तो खत्म हो गए हैं रे बड़बक! अब गधे पर जनाब धन लादे कहां जा रहे हैं? ये लोकतंत्र है या बाजार। वे कुछ नजदीक आए तो मुझसे बोले,‘ यार! इधर-उधर कोई आता-जाता फरोख्ती घोड़ा तो नहीं देखा?' ‘पर वे तो आपकी लाइन में खड़े होने की बात मान चुके हैं।' ‘यार! जब स्कूटर तक में स्टेपनी रखते हो तो सरकार में भी पांच-सात तो एक्स्ट्रा रखने ही पड़ते हैं। सब कुर्सी का खेल है भैये।

बिन स्वार्थ के तो यहां सगा बाप भी अपना नहीं और फिर वे तो फटती के भाई बने हैं। आज मुफ्त में तो साथ में बाप भी खड़ा नहीं होता, और फिर वे तो....। ' ‘मतलब?'‘ वे चाहे कितने ही सगे क्यों न हों जाएं ,पर उन्हें लोभ लालच के खूंटों से तो हर हाल में बांधकर तो रखना ही पड़ेगा। उन्होंने भ्रष्टाचार से लदे गधे को प्यार से किक मारी तो हंसी भी आई। ये क्या कहते हैं जनाब आप? जमाना चांद पर फ्लैट बनाने चला गया और एक आप हो कि....।

अभी भी उन्हीं बिन पूंछ के घोड़ें के बाजार में ही खड़े हो? 'मैंने चुटकी ली। ‘ तुम नहीं जानते बड़बक...... देश चांद पर तो क्या... चाहे मंगल पर चला जाए पर घोड़ों का बिजनेस और काली भेड़ों की चालाकी का राजनीति में हर युग में अपना ही महत्व रहेगा। घोड़ागाड़ी बिन घोड़े के चल सकती है, पर राजनीति की बिन घोड़ों के कल्पना भी नहीं की जा सकती।,' उन्होंने घोड़ों की महिमा का बखान किया तो मेरा कलेजा मुंह को आया।

‘पर सर! पता है जब पालतू घोड़ा तक दुलत्ती मारता है तो .....।' वो बाद की बात है। उन्होंने जैसे-तैसे मेरा कलेजा जो मुंह को आया था। उसे कलेजे की जगह को धकियाया और फिर बोले।, ‘सब ठीक होने के बाद भी घोड़े खरीदने जा रहा हूं। अब हर चुनाव में कटती नाक का सवाल है भैया! और तुम तो जानते हो कि अबके सरकार बनाने से लेकर सरकार चलाने तक हम किसी भी हद तक जा सकते हैं।

परम सत्य है कि राजनीति में घोड़े बिकने और बिदकने को सदैव तैयार तो रहते हैं। इससे पहले कि वे सूप के जले एक बार फिर उनका साम-दाम-दंड-भेद से दिमाग छेद करें ,मैं चाहता हूं कि.....।' ‘सर जी! सरकार घोड़ों से बनती है या....' दिमाग सोचते-सोचते मजाक-मजाक में भन्नाने लगा तो मैंने उनसे हिम्मत कर पूछ ही लिया,‘ माफ करना भैया जी! बात कुछ हजम नहीं हो रही।' ‘तो ये लो पेटसफा।

साली जनता का पेट जब देखो बिन खाए भी पेट खराब किए रहती है।,' कहकर उन्होंने अपनी सदरी से पेटसफा तो हर रोग खफा चूर्ण निकाला और मेरी ओर सरकाते आगे बोले, जब तक बदहजमी खत्म न हो खाते रहो।' ‘ पर भैया जी! ये सरकार बनाने को हार्स ट्रेडिंग...। सरकार बनाने को तो.......।' ‘हे जाली डिग्रीधारी। राजनीति में नेताओं को खरीदने को ससम्मान अंग्रेजी में हार्स ट्रेडिंग कहते हैं।,' वे ठेठ अंग्रेजी पर उतरे तो मैं भौंचक्क रह गया।

आपकी कसम खाकर कहता हूं, मुझे नहीं पता था कि राजनीति में नेताओं को खरीदने के लिए अंग्रेजी में हार्स ट्रेडिंग कहते हैं। उन्होंने राजनीतिक व्यापार में यूज होने वाली नई टर्म के बारे में बताया तो मन कुछ शांत हुआ। ये अंग्रेजी भी न! कंबख्त अब घोड़ों को भी बदनाम करवाने पर तुली है।

हाय बेचारे घोड़े! वे कहीं जो हमारा वार्तलाप सुन रहें हों तो मेरी उनसे दोनों हाथ जोड़ विनती है कि वे कम से कम मुझे तो क्षमा करें प्लीज। ये राजनीति है और इसे मांजने वाले राजनेता। ये सब न जाने क्या-क्या कर सकते हैं।

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