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पाएं जीएसटी की बारीक से बारीक जानकारी, बस एक क्लिक में

करवंचना का दोषी पाए जाने पर दोषी को देय कर राशि का 100 प्रतिशत जुर्माना देना होगा।

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू हो जाने के बाद भी कारोबारियों के बीच डर एवं ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। डर का कारण जीएसटी प्रणाली का पूर्ण रूप से प्रौद्योगिकी पर आधारित होना, कर एवं रिटर्न से जुड़ी जटिलताएं एवं रिटर्न की अधिकता है तो ऊहापोह की वजह जीएसटी की तस्वीर का अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं होना है।

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जीएसटी से पहले केंद्रीय कर, मसलन कस्टम, एक्साइज, सेवाकर और राज्य कर जैसे वैट, बिक्रीकर, प्रवेशकर, चुंगी वगैरह प्रचलन में थे, लेकिन इस प्रणाली में अधिकांश कारोबारी करवंचना के आदी थे। जीएसटी के तहत कर संरचना त्रिस्त्रीय है।

पहला, सीजीएसटी, दूसरा एसजीएसटी और तीसरा आईजीएसटी। सीजीएसटी और आईजीएसटी के तहत केंद्र सरकार कर वसूल करेगी तो एसजीएसटी के अंतर्गत राज्य सरकार।

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माना जा रहा है कि जीएसटी के तहत कारोबारियों के लिए कर चोरी करना आसान नहीं होगा, क्योंकि जो कारोबारी कर नहीं दे रहे हैं या कर का कम भुगतान कर रहे हैं को कर की देय राशि का 10 प्रतिशत या 10,000 रुपये जो दंड की न्यूनतम राशि है जुर्माने के रूप में देनी होगी।

जान बूझकर करवंचना का दोषी पाए जाने पर दोषी को देय कर राशि का 100 प्रतिशत जुर्माना देना होगा। दूसरी तरफ जीएसटी की कर संरचना को इतना सशक्त बनाया गया है कि करवंचना करना आसान नहीं होगा।

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