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चिंतन: उम्मीदों के साथ नए साल का करें स्वागत

बीता साल नई उम्मीदों और अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़ कर चला गया।

चिंतन: उम्मीदों के साथ नए साल का करें स्वागत
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साल 2015 बीत गया और 2016 में हम प्रवेश कर चुके हैं। एक तरफ अतीत है तो दूसरी ओर भविष्य हमारा इंतजार कर रहा है। लिहाजा हम वर्तमान में खड़े होकर आने वाले वक्त को सुखद और आशातीत होने की उम्मीद कर सकते हैं। दरअसल, भविष्य हमारे वर्तमान और अतीत दोनों पर निर्भर करता है। भूत हमारी स्मृतियों को ताजा करता है। हम उससे सबक लेते हुए वर्तमान में किए कायरें के आधार पर ही एक बेहतर कल के निर्माण की कोशिश करते हैं। 2015 में कई ऐसी घटनाएं घटी हैं, जिसका प्रभाव इस वर्ष देखने को मिलेगा।
बीता साल नई उम्मीदों और अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़ कर चला गया। निश्चित रूप से उन मुद्दों पर देश की नजर रहेगी जिनकी जड़ें खत्म हुए साल से जुड़ी हैं। इस वर्ष देश में कई राज्यों में चुनाव होने हैं। जिस तरह का माहौल बन रहा है, उसमें देखना दिलचस्प रहेगा कि उनके कैसे नतीजे रहते हैं। देश की राजनीति की दिशा बहुत कुछ उन नतीजों पर निर्भर करेगी। बीते वर्ष राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, न्याय, सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर जो प्रगति देखने को मिली है उनमें कैसे निरंतरता बनाई रखी जाए यह प्रश्न भी सरकार के समक्ष होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। उन्होंने पाकिस्तान के साथ अमन बहाली की दिशा में जो कदम उठाए हैं उसमें कितनी सफलता मिलेगी, इसका उत्तर यह साल दे देगा। राजनीति में 2015 में कई गलत चीजें देखी गई हैं उम्मीद करें कि नए साल में उनकी पुनरावृत्ति न हो। प्रधानमंत्री ने कहा है कि कांग्रेस व विपक्ष को संकल्प लेना चाहिए कि वे संसद व देश के विकास को नहीं रोकेंगे।
इस साल रियो ओलंपिक होना है। हमारे खिलाड़ी अच्छा करें और देश का मान बढ़ाएं ऐसी कामना है। नए साल में सभी चाहेंगे कि जीएसटी बिल पारित हो। आधी आबादी की सुरक्षा, हक और उनको पर्याप्त सम्मान मिले। लिंगानुपात में सुधार हो। गरीबी दूर हो। उनके जीवनस्तर में सुधार हो और सबको भोजन, साफ पानी, बिजली, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा आसानी से मिले। लोगों को सस्ता व सुलभ न्याय मिले। महंगाई से निजात मिले। भ्रष्टाचार कम हो।
तंत्र लोक को महत्व दे ताकि आम आदमी अपने को उसका हिस्सा महसूस कर सके। स्वच्छता अभियान सिरे चढ़े। बेहतर ग्रोथ रेट हो ताकि रोजगार की संभावनाएं बढ़ें। केंद्र-राज्यों के बीच रिश्ते मजबूत हों। संवैधानिक संस्थाएं ईमानदारी से काम करें। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक स्तर पर जो प्रयास किए हैं वे अपने मुकाम पर पहुंचें। सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सीट मिले। आतंकवाद पर काबू पाया जा सके। अमन-शांति का माहौल हो।
नए साल में यही अपेक्षा है। 2015 ने जाते-जाते ऐसे संकेत दे दिए हैं कि 2016 कैसा रहेगा। बदलाव के संकेत नजर आ रहे हैं। सरकार और लोगों की सोच व फैसलों में एक परिपक्वता दिख रही है। इसी उम्मीद के साथ कि आने वाला साल अच्छा रहेगा, हमें उसका सु-स्वागत करना चाहिए।
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