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विराट के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां

विराट ने टी 20 में लगातार अच्छी बल्लेबाजी की है।

विराट के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
भारतीय क्रिकेट में विराट युग शुरू हो गया है। उदीयमान युवा क्रिकेटर विराट कोहली अब तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान बन गए हैं। जुझारू और आक्रमक बल्लेबाज कोहली ने टेस्ट कप्तान के रूप में शानदार सफलता अर्जित की है। 2016 में लगातार अठारह टेस्ट में उनकी कप्तानी में भारत ने हार का मुंह नहीं देखा। इस दौरान विराट बल्लेबाज के रूप में भी शानदार प्रदर्शन करते रहे। 2012 में जब से टीम में आए हैं, तब से उन्होंने टेस्ट, वनडे और टी-20 में लगातार अच्छी बल्लेबाजी की है। भारतीय टीम में उन्होंने सचिन तेंदुलकर की कमी पूरी की है। सचिन ने जब संन्यास लिया था, तब कहा जा रहा था कि उनकी कमी सदा खलेगी।
एक क्रिकेटर के तौर पर सचिन का भारतीय क्रिकेट में महान योगदान है। इससे किसी को इनकार नहीं है, लेकिन टीम से उनके जाने के बाद विराट कोहली भरोसेमंद खिलाड़ी बनकर उभरे। उन्होंने अपने प्रदर्शन से टीम में सचिन की कमी नहीं खलने दी। भारत के सफलतम कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी के अचानक वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ देने के बाद विराट कोहली को यह मौका मिला है। विराट का यह बड़प्पन है कि उन्होंने कहा कि ‘धोनी आप सदा हमारे कैप्टन रहेंगे।’ दरअसल विराट ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें हमेशा धोनी की कप्तानी में ही खेलने का मौका मिला। यह धोनी की खासियत थी कि उन्होंने कोहली के विराट अक्स को तराशा भी और उभरने भी दिया, इसलिए विराट की कप्तानी पर धोनी की छाप देखने को मिलेगी।
हालांकि विराट को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धोनी की तरह कूल रहने की कला सीखनी होगी। विराट के लिए उनकी आक्रामकता घातक सिद्ध हो सकती है। आप अपने करियर में जैसे-जैसे ऊपर जाते हैं, आपका व्यक्तित्व वैसे-वैसे विस्तार लेता है। धैर्य आपका अस्त्र बन जाता है। उसमें अहंकार व क्षणिक आक्रामकता जैसी चीजों के लिए जगह नहीं होती है। अच्छे खिलाड़ी और कप्तान की खूबी यह है कि अपनी आक्रामकता को अपने प्रदर्शन पर केंद्रित करें। अंतत: टीम का प्रदर्शन ही किसी कप्तान को सफल या असफल बनाता है। ऐसे में कप्तान की बड़ी जिम्मेदारी टीम को एक बनाकर रखने की होती है। विराट के सामने टीम को एक रखने व उसे संवारते रहने की बड़ी चुनौती होगी। भारतीय क्रिकेट टीम में अलग-अलग शैक्षिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से खिलाड़ी आते हैं।
कप्तान के रूप में विराट को इस बात को अपने जेहन में रखना होगा। उन्हें अपने साथ-साथ सहयोगियों की कमजोरी पर भी विजय पाना होगा। इसके साथ ही उन्हें टीम के सभी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी निखारना होगा। पूरी टीम के साथ-साथ क्रिकेट प्रबंधकों से भी समन्वय बनाकर रखना होगा। सुनील गावस्कर, कपिल देव, रवि शास्त्री, दिलीप वेंगसरकर, अजहरूद्दीन, सौरभ गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने टीम इंडिया की कप्तानी की है और अपने नेतृत्व से भारतीय क्रिकेट को सींचा है। टीम को जीतना सिखाया है। कपिल और धोनी भारत की झोली में क्रिकेट विश्वकप दिलाने वाले कप्तान हैं। विराट को अपने प्रदर्शन, टीम के प्रदर्शन और अपनी कप्तानी से भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम थाती को आगे बढ़ाना होगा।
यह अच्छी बात है कि विराट ऐसे समय वनडे व टी-20 के कप्तान बने हैं, जब उन्हें कम से कम टेस्ट में कप्तानी का अच्छा अनुभव हो गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके ये अनुभव वनडे व टी-20 में भी काम आएंगे। आगे उन्हें इंग्लैंड के साथ दोनों ही फॉर्मेट में कप्तानी करनी है, यहां उनकी पहली परीक्षा होगी। हालांकि टीम में उन्हें धोनी का साथ मिलेगा। अब विराट कोहली के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टी-20, वनडे और टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम को स्ाभी फार्मेट में जीत दिलाते हुए नंबर वन टीम बनाने के चुनौती होगी। अब जब कि विराट को सभी फार्मेट में कप्तान के रूप में जिम्मेदारी मिल चुकी है तो उनके सामने अवसर है कि वह अपनी प्रतिभा को विश्व के सामने सिद्ध करें। विराट कोहली को शुभकामनाएं।
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