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वेलेंटाइन डे: प्यार नहीं - हिंसक सनक

राजस्थान की राजधानी जयपुर में वेलेंटाइन डे के मौके पर एक सिरफिरे ने एक महिला के साथ खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

वेलेंटाइन डे: प्यार नहीं - हिंसक सनक

राजस्थान की राजधानी जयपुर में वेलेंटाइन डे के मौके पर एक सिरफिरे ने एक महिला के साथ खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। खुद को प्रेमी मानने वाले विकृत मानसिकता वाले इस व्यक्ति ने मॉल में महिला पर तेजाब से हमला कर दिया। दो बार पहले ही तलाक ले चुका यह व्यक्ति महिला पर शादी के लिए दवाब डाल रहा था। उसकी बात न मानने और महिला के निकाह के लिए मना करने पर उसने तेजाब से हमला कर दिया।

दिनदहाड़े भीड़-भाड़ वाले मॉल में इस दर्दनाक हादसे को अंजाम देने वाला व्यक्ति महिला को काफी समय से प्रताड़ित कर रहा था। हिंसक हुए प्रेम की ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के हापुड़ से भी आई है। जहां एक ओर वेलेंटाइन डे पर लोग प्रेम का इजहार कर रहे थे वहीं दूसरी ओर यूपी में हुए इस मामले में भागकर शादी करने से इनकार करने पर एक सिरफिरे आशिक ने अपनी प्रेमिका को गोली मार दी।

प्रेम के नाम पर समझ खो देने की एक घटना बिहार में भी हुई है। बिहार पुलिस के हत्थे एक ऐसा अपराधी चढ़ा है जो एक बड़ी लूट की तैयारी में था। यह कथित प्रेमी लूट की यह वारदात अपनी प्रेमिका को खुश करने के लिए करने वाला था। हाल ही में असम में भी ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया था। जहां एक शादीशुदा महिला के प्यार में पागल प्रेमी ने झगड़ा होने पर घर में घुसकर उसकी बेटी के सामने उसका खून कर दिया था।

इन्हीं दिनों बुलंदशहर में हुए दो बहनों के कत्ल की गुत्थी सुलझी तो उसकी वजहभी एकतरफा प्यार ही निकला है। दरअसल, ये सभी घटनाएं हिंसक होते प्रेम की बानगी हैं। जो बताती हैं बाजार में फेर में ऐसे दिन मनाने के जाल में फंसे लोग प्रेम के सही मायने ही भूल गए हैं। कैसी विडंबना है कि प्रेम का पर्व मनाने के दिन ऐसी घटनाएं भी सुर्खियां बनती हैं जिनका प्रेम के भाव से कोई वास्ता ही नहीं।

हालांकि यह भी सच है कि अब आए दिन ऐसे कई मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें प्यार में असफल युवाओं ने किसी लड़की की जिंदगी दूभर कर दी हो या फिर जान ही ले ली हो। वेलेंटाइन डे के अवसर पर हुए ये सभी वाकये बताते हैं कि एकतरफा प्रेम के नाम पर कुछ भी कर जाने की यह समस्या चिंताजनक स्तर तक बढ़ गई है। महिलाएं भी विवश हो कभी इन सिरफिरों का दुर्व्यवहार चुपचाप सहती हैं, कभी विरोध करती हैं तो कभी एक अनचाहे भय से जूझती हैं।

असल में देखा जाए तो इस बर्बरता के पीछे की सोच यही है कि किसी स्री को न कहने का अधिकार कैसे हो सकता है? पुरुष मानसिकता को यह स्वीकार ही नहीं कि कोई महिला उसकी आकांक्षा के विपरीत अपनी भी एक स्वतंत्र सोच भी रख सकती है। एकतरफा प्रेम को हिंसक व्यवहार से जोड़ने वाली यह पुरातन सोच इतनी गहराई से जड़ें जमाये है कि इन घटनाओं को अंजाम देने वालों में अशिक्षित और निचले तबके के बेरोजगारों से लेकर संभ्रांत वर्ग के उच्च शिक्षित युवक और पुरुष तक सभी शामिल हैं।

यही वजह है कि भारत में जितनी मौतें प्यार की वजह से होती हैं उतनी आतंकी घटनाओं से भी नहीं होतीं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 15 सालों में भारत में आतंकवाद से ज्यादा मौत प्यार के चलते हुईं हैं। साल 2001 से 2015 के बीच के आकंड़ों के मुताबिक प्यार में कामयाब न होने वाले और दूसरी वजहों के चलते करीब 79,189 लोगों ने मौत को गले लगा लिया।

इतना ही नहीं प्यार के चलते 38,585 मामलों में लोगों ने हत्या और गैर-इरादतन हत्या जैसे जघन्य अपराधों को भी अंजाम दिया है। निःसंदेह हमारे समाज में आज भी युवा ऐसी मानसिकता के साथ बड़े हो रहे हैं जिसमें किसी लड़की का इनकार स्वीकार ही नहीं है। अफसोसनाक ही है कि प्रेम जैसे स्वतंत्र और भावनात्मक बंधन के मामले में भी यही सोच है। इतना ही नहीं अगर बात ना मानी जाए तो ऐसे अमानुष लड़की का जीवन ही छीन ले रहे हैं।

ना सुनते ही ऐसे मनचले प्रतिशोध लेने पर भी उतारू हो जाते हैं। फिर छेड़खानी, एसिड अटैक या इस मामले की तरह जानलेवा हमला, बिना किसी गलती के ही महिलाओं के हिस्से आ जाता है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों के कुत्सित व्यवहार से तंग आकर आत्महत्या करने वाली लड़कियों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे में यह बेहद चिंतनीय है कि एकतरफा प्रेम के नाम पर लड़कियों के प्रति हिंसा और बर्बरता को जन्म देने वाली सोच युवाओं को किस ओर ले जा रही है।

लड़कियों की पसंद-नापसंद की आज़ादी को लेकर आज भी युवाओं के मन में यह दुर्भाव और असहिष्णुता क्यों अपनी जगह बनाए हुए है? हैरान-परेशान करने वाली बातें यह हैं कि क्या प्रेम भी किसी पर थोपने की चीज़ है? क्या प्रेम किसी को पीड़ा देने वाला भाव है? क्या प्रेम के नाम पर किसी की जिंदगी छीनी जा सकती है? सही मायनों में देखा जाए दिशाहीन और दुर्भाव भरी सोच वाले लोगों को प्रेम का अर्थ ही नहीं पता।

अपनी विकृत सोच को प्रेम समझने वाले लोगों के लिए ही यह बर्बरता भरा व्यवहार कर पाना संभव है। अफ़सोस कि उनकी इस दिशाहीनता का खामियाजा किसी न किसी लड़की को चुकाना पड़ता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि ‘नो' कहने पर एकतरफा प्यार में ऐसे सनक भरे मामले सामने आए हों, लेकिन विचारणीय प्रश्न तो यह है कि आज जिंदगी में प्यार का दखल पॉजिटिव रवैया नहीं लाता।

जुड़ाव और समझ का आधार नहीं बनता। इसकी वजह शायद यही है कि उपभोक्तावाद, बाजारीकरण और दिखावे के सेलिब्रेशन ने प्रेम के अर्थ ही गुम कर दिए हैं। साथ ही कुत्सित मानसिकता के लोगों ने संसार के सबसे सुंदर मानवीय भाव को हिंसक भी बना दिया है। तभी तो हर साल प्रेम का भाव परिष्कृत नहीं बल्कि विकृत ही हो रहा है। संवेदनाओं और अहसासों से दूर दिखावे की होड़ में लगे लोग एकतरफा प्रेम के नाम पर तेजाबी हमलों से लेकर जान लेने तक की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

तकनीकी जुड़ाव ने भी इस समस्या को बढाने में अहम्ा भूमिका निभाई है। कई युवतियां प्रेम के नाम पर भेजे संदेश और फोटोज को वायरल कर देने के भय से जूझती हैं। नकारात्मक मानसिकता वाले कथित प्रेमी उन्हें इन बातों को लेकर भी प्रताड़ित करते हैं, जबकि यह उनकी नासमझी की हद ही है कि प्रेम के लिए भी वे किसी को विवश करने की सोच रखते हैं।

नतीजतन, इसी पागलपन के चलते प्यार के नाम पर अब तक कई बर्बर घटनाएं हो चुकी हैं और हो रही हैं। सामाजिक बिखराव और दरकती देहरी भी ऐसे मामलों की बड़ी वजह बन रही है, क्योंकि अब ऐसे मामलों में केवल युवा ही नहीं विवाहित लोगों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। ऐसे में यह चिंतनीय है कि प्रेम का जो भाव दो इंसानों को ही नहीं पूरे समाज को जोड़ सकता है वो ऐसी हैवानियत भरी राह पकड़ रहा है।

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