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दीपक कुमार त्यागी का लेख : देश में तेजी से हो टीकाकरण

आज के परिदृश्य में कोरोना महामारी की बहुत तेजी से फैलने वाली क्षमता के हिसाब से देश में अभी टीकाकरण की प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है। देश की जनता को सुरक्षित करने के लिए विश्व में जितने भी पूर्ण रूप से सुरक्षित कोरोना के टीके बन रहे हैं, भारत सरकार को उनको जल्द से जल्द सरकारी स्तर पर प्रयास करके देश में लाना चाहिए। भारत जैसे 138 करोड़ की आबादी वाले देश में भारी मात्रा में टीके की डोज की आवश्यकता है। देश में हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए आबादी का 70 प्रतिशत यानी 96.6 करोड़ लोगों का दोनों डोज लगाकर टीकाकरण होना बेहद आवश्यक है।

दीपक कुमार त्यागी का लेख : देश में तेजी से हो टीकाकरण
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दीपक कुमार त्यागी 

दीपक कुमार त्यागी

जनता कोरोना की दूसरी लहर का सामना बेहद नकारात्मक परिस्थितियों के साथ संघर्ष करके लगातार कर रही है। वह चिकित्सा व्यवस्था की कमी व विभिन्न प्रकार के बेहद आवश्यक संसाधनों के अभाव के बाद भी कोरोना संक्रमण से पूर्ण हिम्मत व हौसले के साथ लड़ रही है। अपनों के अससमय काल का ग्रास बनने के चलते कोरोना की बेहद घातक इस दूसरी लहर ने बहुत सारे देशवासियों को जीवन भर के लिए बहुत अधिक गहरे जख्म दे दिये हैं। पूर्व की भांति इसबार भी दुनिया भर के कोरोना विशेषज्ञ भारत के नीतिनिर्माताओं व सिस्टम को फिर से लगातार चेता रहे हैं कि देश को कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए बहुत जल्द से जल्द धरातल पर ठोस आवश्यक कदम उठाकर तैयार करना होगा। इसके लिए हमारे प्यारे देश में जल्द से जल्द कोरोना के टीके की डोज की किल्लत को दूर करते हुए उसको लगवाने की प्रक्रिया को सरल बनाना बेहद जरूरी है। वैसे एक सच्चाई यह भी है कि जिस समय पूरी दुनिया एक अनजान, अदृश्य और अबूझ बेहद घातक कोरोना वायरस से बुरी तरह डरी-सहमी हुई थी, तब भारत के विद्वान वैज्ञानिक विश्व समुदाय को उस जानलेवा घातक कोरोना वायरस की काट उपलब्ध कराने में अपना दिनरात एक करके बेहद तत्परता से काम करने में लैबोरेट्री में लगे हुआ थे। आज देश के उन वैज्ञानिकों की मेहनत के बलबूते ही भारत ने दुनिया को कोरोना का बेहद कारगर एक टीका बनाकर दिया है। वैसे भी आजकल भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है। यही नहीं देश आज भारतीयों को कोरोना का टीका लगवाने के साथ-साथ कई अन्य देशों को भी संयुक्त राष्ट्र समर्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवैक्स कार्यक्रम के तहत कोरोना का टीका उपलब्ध करवा कर लोगों के अनमोल जीवन को सुरक्षित करने का कार्य कर रहा है।

देशवासियों को भविष्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्दी से कोरोना का टीका लगवा कर उनके जीवन को सुरक्षित करना होगा। अभी तक के आकड़ों के अनुसार विश्व में 141 करोड़ लोगों को कोरोना के टीके की पहली डोज दी जा चुकी है, जिसमें से 34.6 करोड़ लोग दूसरी डोज लेकर अपने आपका पूर्ण रूप से टीकाकरण करवा चुके हैं, जो कि पूरी दुनिया की आबादी का मात्र 4.4 प्रतिशत बैठता है, वहीं भारत में 16 जनवरी 2021 को फ्रंटलाइन वर्कर के साथ शुरू हुए टीकाकरण अभियान का विस्तार करके बहुत कम समय में ही 18 करोड़ लोगों को टीके की पहली डोज लगायी जा चुकी है, 3.98 करोड़ लोगों ने दोनों डोज लेकर अपना टीकाकरण पूरा कर लिया है, लेकिन अगर हम बात जनसंख्या के प्रतिशत की करें तो 2.9 प्रतिशत लोगों को भारत में कोरोना के टीके की दोनों डोज अभी तक लग पायी है, जो स्थिति हमें विकासशील व अन्य बहुत सारे देशों से बहुत पीछे करती हैं। इस बीच टीके की कमी की खबर भी आई है, जिसे तेजी से पूरी की जा रही है। कोरोना विशेषज्ञों के अनुसार जब तक आप बचाव के उपाय करते हुए सावधानियां बरते हैं, तब तक सब ठीक है। लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि टीका लगने के बाद कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा बेहद कम हो जाता है। लेकिन अगर आप टीका लगने के बाद भी रोजमर्रा के जीवन में लापरवाही करते हैं, तो उसका परिणाम यह होगा कि आप भी वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। वैसे टीका लगवाने के बाद लोग खुद को मानसिक व शारिरिक स्तर पर बहुत अधिक सुरक्षित महसूस करते हुए सब कुछ करने के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस करेंगे, लेकिन कोरोना महामारी के काल में इस तरह के सकारात्मकता भरे व्यवहार में कदम-कदम पर सावधानी बरतनी बेहद आवश्यक है। कोरोना आपदाकाल के आने वाले समय में हम सभी देशवासियों के रोजमर्रा के जीवन को सुरक्षित व सरल बनाने के लिए कोरोना का टीका लगवाना आवश्यक है।

भारत जैसे 138 करोड़ की आबादी वाले देश में भारी मात्रा में टीके की डोज की आवश्यकता है। देश में हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए आबादी का 70 प्रतिशत यानी 96.6 करोड़ लोगों का दोनों डोज लगाकर टीकाकरण होना बेहद आवश्यक है। जिसके लिए कम से कम 193.2 करोड़ डोज चाहिए, जिसमें से 18 करोड़ डोज लोगों को दी जा चुकी हैं, अभी कम से कम 175.2 करोड़ टीके की डोज देशवासियों के टीकाकरण करने के लिए चाहिए, क्योंकि हर्ड इम्युनिटी विशेष तौर पर टीका लगाए जाने से हासिल की जाती है। वैसे इस संबंध में अधिकतर वैज्ञानिकों का एकमत है कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्र विशेष में रहने वाली कम से कम 70 प्रतिशत आबादी में घातक विषाणु को हराने के लिए एंटीबॉडीज डवलप होनी चाहिए। इस लक्ष्य को एक वर्ष के अंदर हासिल करने के लिए प्रतिदिन 48 लाख लोगों को टीका लगाना होगा, जबकि आज के समय में हम 20 से 25 लाख डोज ही प्रतिदिन लगा पा रहे हैं। हालांकि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत सरकार व कंपनियों की निजी स्तर पर जबरदस्त तैयारियां चल रही है। इस कड़ी में ही भारत सरकार ने 18 साल से कम उम्र के लोगों को टीका उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ट्रायल चलाने की अनुमति स्वदेशी कंपनी भारत बायोटैक को दे दी है। अभी हमारे देश भारत में निर्मित कोविशील्ड और कोवैक्सीन के टीके की डोज देश में टीकाकरण के लिए उपलब्ध हैं। रूस के टीके स्पूतनिक वी का इस्तेमाल भी देश के हैदराबाद शहर में शुरू हो गया है, अन्य कंपनियों के टीकों की डोज देश की जनता को उपलब्ध करवाने के लिए उच्च स्तर पर विचार चल रहा है। लेकिन इस सबकी मौजूदा डोज व भविष्य में उपलब्ध होने वाली डोज से भारत में टीके कार्यक्रम का लक्ष्य जल्द हासिल नहीं हो सकता है, इसके लिए केंद्र सरकार को कम्पनियों के साथ मिलकर टीके के उत्पादन को बढ़ाने के तरीकों पर युद्धस्तर पर कार्य करना होगा।

एक मई से देश में शुरू हुए 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लिए टीके का इंतजाम राज्यों को खुद अपने स्तर पर करने की बड़ी चुनौती है, इस आयु वर्ग में अभी तक मात्र 42 लाख डोज दी गयी हैं। केंद्र सरकार को भारतीय टीका निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर के टीके की डोज के उत्पादन को बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य करना होगा। सरकार को देश में टीकाकरण की प्रक्रिया को बेहद तेज व सरल करने के लिए जल्द से जल्द युद्धस्तर पर कारगर रणनीति बनानी होगी। क्योंकि आज के परिदृश्य में कोरोना महामारी की बहुत तेजी से फैलने वाली क्षमता के हिसाब से देश में अभी टीकाकरण की प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है। देश की जनता को सुरक्षित करने के लिए विश्व में जितने भी पूर्ण रूप से सुरक्षित कोरोना के टीके बन रहे हैं, भारत सरकार को उनको जल्द से जल्द सरकारी स्तर पर प्रयास करके देश में लाना चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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