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मिथिला के अंचल की खुशबू से भरी जीवंत कहानियां

मिथिला के अंचल की खुशबू से भरी इन कहानियों में उषाकिरण खान के कथा लेखन के विशिष्ट पहलुओं को देखा जा सकता है।

मिथिला के अंचल की खुशबू से भरी जीवंत कहानियां
मीनाक्षी बोहरा-
उषाकिरण खान लोकप्रिय कथाकार हैं, जो दो भाषाओं हिंदी और मैथिली में सृजनरत हैं। दोनों भाषाओं में अनेक उपन्यास और कहानियां लिखने वालीं खान की प्रतिनिधि कहानियां किताबघर प्रकाशन ने अपनी प्रतिष्ठित सीरीज में प्रस्तुत की हैं।
मिथिला के अंचल की खुशबू से भरी इन कहानियों में उषाकिरण खान के कथा लेखन के विशिष्ट पहलुओं को देखा जा सकता है। पहली कहानी मौसम का दर्द आदिवासी जीवन मूल्यों और शहराती आडंबरों के द्वंद्व को दर्शाती है।
उनकी प्रसिद्ध कहानियों यथा ‘दूब-धान’, ‘कुमुदिनी’, ‘नटयोगी’ और ‘हमके ओढ़ा द चदरिया होए चलने की बेरिया’ के सतह साथ ‘जलकुंभी’, ‘नीलकंठ’ और ‘तुअ बिनु अनुखन विकलमुरारि’ को इस चयन में पढ़ा जा सकता है।
उषाकिरण खान के स्त्री चरित्र कुछ न कुछ विशेषताएं लिए होते हैं चाहे वह ‘दूब-धान’ की केतकी हो ‘कुमुदिनी’ की श्रेया या ‘कौस्तुभ स्तम्भ’ की देवी मां : ये चरित्र पाठकों को याद रह जाने वाले हैं।
असल में लोक से लिए गए इन कथानकों और चरित्रों को उषाकिरण खान बेहद सजीवढंग से अपनी कहानियों में चित्रित कर सकी हैं तो इसका कारण उनकी सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और ठेठ मिट्टी से जुड़ा होना है। भूमिका में संपादक सुशील सिद्धार्थ ने इन कहानियों पर पर्याप्त विस्तार से लिखा है।
पुस्तक- दस प्रतिनिधि कहानियां
लेखिका- उषाकिरण खान
मूल्य- 240 रुपए
प्रकाशक- किताबघर प्रकाशन, दिल्ली
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