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कांग्रेस की लोगों के गुस्से को थामने की एक अंतिम कोशिश!

यूपीए सरकार के वित्त मंत्री द्वारा आम चुनावों से पूर्व पेश अंतरिम बजट में मतदाताओं को लुभाने की भरसक कोशिश की गई है।

कांग्रेस की लोगों के गुस्से को थामने की एक अंतिम कोशिश!
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नई दिल्ली. पिछले दस सालों से केंद्र की सत्ता संभाल रही यूपीए सरकार के वित्त मंत्री द्वारा आम चुनावों से पूर्व पेश अंतरिम बजट में मतदाताओं को लुभाने की भरसक कोशिश की गई है। आज तमाम सर्वे बता रहे हैं कि आगामी आम चुनावों में कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक हार की ओर बढ़ रही है। ऐसे माहौल में वित्त मंत्री पी चिदंबरम वोट ऑन अकाउंट यानी लेखानुदान में लोगों के गुस्से को थामने की एक अंतिम कोशिश करते दिखे। उन्होंने बजट भाषण भी ऐसे पढ़ा जैसे कोई चुनावी भाषण पढ़ रहे हों। सरकार की ढेर सारी उपलब्धियां गिना दीं।
हालांकि इसके लिए भी उन्हें बीते दस वर्षों के आंकड़ों का सहारा लेना पड़ा। यूपीए के दूसरे कार्यकाल या पिछले दो वर्षों के आंकड़ों का जिक्र तक नहीं किया। दरअसल, कांग्रेस के सामने अब तक की सबसे मुश्किल चुनावी जंग है, लिहाजा चिदंबरम के बजट भाषण में अपनी पीठ थपथपाने की गूंज सुनाई दी। वे पिछले एक दशक की यूपीए की उपलब्धियां गिनाए, ताकि पिछले कई वर्षों के दौरान विकास में सुस्ती और महंगाई में बढ़ोतरी को नजरों से ओझल किया जा सके। सच्चाई है कि इन दस सालों में आम आदमी की कमर टूट गई है। सरकार अभी भी स्वीकार कर रही हैकि खाद्य महंगाई काबू में नहीं है। तमाम चीजें महंगी हो गई हैं।

बिजली व पानी का बिल बढ़ गया है। सड़कों पर टोल टैक्स बढ़े हैं। लोगों पर कईतरह के करों का बोझ लाद दिया गया है। चिदंबरम नीतिगत अपंगता के आरोपों को खारिज कर रहे हैं पर उन्हें यह बताना चाहिए कि देश आज बदहाली के कगार पर क्यों पहुंच गया है। जहां आर्थिक विकास सुस्त पड़ी है, रुपये की हालत कमजोर है, भ्रष्टाचार है, बेरोजगारी है, महंगाई है और मंत्रालयों में काजकाज ठप पड़े हैं। हालांकि इसके लिए वे वैश्विक मंदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं परंतु आंकड़ों की बाजीगरी से वे कांग्रेस पर छाए संकट को कितना टाल पाएंगे यह तो आने वाले चुनाव में पता चल जाएगा।

यदि उनकी सरकार की इतनी उपलब्धियां रही हैं तो उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि कांग्रेस के प्रति आम नागरिक इतने गुस्से में क्यों है? पारंपरिक तौर पर अंतरिम बजट में प्रत्यक्ष करों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होता है और न ही कोई बड़ी नीतिगत घोषणा की जाती है। वैसे भी यह बजट चार महीनों के लिए है, आने वाली सरकार पूर्ण बजट पेश करेगी। फिर भी इसमें आम आदमी और मदद की दरकार रखने वाले कुछ क्षेत्रों के लिए रियायतों की घोषणा की जा सकती है, लेकिन वित्त मंत्री ने उस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने वन रैंक वन पेंशन नीति को मंजूरी दी। इसके अलावा ऑटो उद्योग व उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट दी।

इससे कुछ उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती होने की उम्मीद की जा सकती है। छात्रों को लुभाने की कोशिश हुई, परंतु नौकरीपेशा बड़े वर्ग को छोड़ दिया गया है। हालांकि, चिदंबरम को भी पता होगा कि आम मतदाता अब इससे प्रभावित नहीं होगा। इस तरह वे इतिहास में ऐसे वित्त मंत्री के रूप में अपनी जगह दर्ज कराने के बारे में सोच रहे हैं, जिसने राजकोषीय घाटे को कम किया और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों द्वारा भारत को डाउनग्रेड होने से बचाया, परंतु यह भी सच है कि नए वित्त मंत्री के लिए कई मुसीबतों को छोड कर जाएंगे।

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