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नालायक पाकिस्तान पहले खुद को भारत से वार्ता के लायक बनाए

पाकिस्तान की हालिया हरकतों ने दिखा दिया है कि भारत से शांति वार्ता बहाल करने की उसकी कोई नीयत नहीं है। पीएम इमरान खान की सरकार का नया पाकिस्तान का नारा भी पुरानी बोतल में नई शराब की तरह है। उसमें न साहस है, न ताकत है, न इरादे हैं, वह बस कठपुतली है। इमरान सरकार भी अपने मुल्क की कुछ शांति विरोधी आतंकवादपरस्त ताकतों के आगे बेबस है।

नालायक पाकिस्तान पहले खुद को भारत से वार्ता के लायक बनाए

पाकिस्तान की हालिया हरकतों ने दिखा दिया है कि भारत से शांति वार्ता बहाल करने की उसकी कोई नीयत नहीं है। पीएम इमरान खान की सरकार का नया पाकिस्तान का नारा भी पुरानी बोतल में नई शराब की तरह है। उसमें न साहस है, न ताकत है, न इरादे हैं, वह बस कठपुतली है। इमरान सरकार भी अपने मुल्क की कुछ शांति विरोधी आतंकवादपरस्त ताकतों के आगे बेबस है।

यह ताकतें वर्षों से भारत के साथ शांति वार्ता को परवान नहीं चढ़ने देना चाहती हैं। पाक पीएम इमरान ने पीएम नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश के जवाब में भारत से शांति वार्ता की पेशकश की, भारत ने इसका स्वागत किया और संयुक्त राष्ट्र महासभा की 73वीं बैठक के दौरान पाक के विदेश मंत्री से मुलाकात की हामी भरी,

पर अगले ही दिन पाक समर्थित आतंकी गुटों ने कश्मीर पुलिस के तीन जवानों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी तो पाक फौज ने बीएसएफ जवान को मार कर उसके शव के साथ क्रूरता की। पाकिस्तान ने शहीद सैनिकों के शव के साथ सम्मानजनक व्यवहार की अंतरराष्ट्रीय कानून की भी परवाह नहीं की। पाक यहीं नहीं रुका, उसने हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी के नाम डाक टिकट जारी किया।

ये सभी हरकतें भारत को उकसाने के लिए थीं कि यूएन में भारत-पाक विदेश मंत्रियों की प्रस्तावित मुलाकात रद हो जाय। यही हुआ। यह पहली बार नहीं थी। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी बस से शांति मिशन के साथ लाहौर गए, पाक ने कारिगल कर दिया। पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह की सरकार ने जब-जब पहल की, तब-तब पाक आतंकी हमले कराता रहा।

पीएम नरेंद्र मोदी पूर्ववर्ती नवाज शरीफ सरकार से संबंध सामान्य करने की कोशिश शुरू की, पाकिस्तान ने पठानकोट व उरी में आतंकी हमले करा दिए। इसलिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यूएन महासभा में ठीक ही कहा कि पाक की करतूतें बातचीत के लायक ही नहीं हैं। वह वार्ता का ढोंग करता है व उसका हेलीकॉप्टर भारतीय वायु सीमा में घुसपैठ करता है।

भारत ने सवाल उठाया कि आखिर वार्ता कैसे करें? भारत से बार-बार आतंक के सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान नकारता रहा है। पाक में अब भी 26/11 का मास्टरमाइंड हाफिज सईद खुला घूम रहा है। भारत विरोधी आतंकवादियों की पनाहगाह बना हुआ है। पाक ही बताए भारत कैसे विश्वास करे, वह हमेशा धोखा ही देता है।

भारत का स्पष्ट संदेश है कि पहले पाक आतंकवाद का खात्मा करे, फिर शांति वार्ता की टेबल पर आए, पर पाक यह नहीं कर पा रहा है। उसकी हर कोशिश कश्मीर को उछालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने की रही है। वह कश्मीर पर दुष्प्रचार करता रहा है। यूएन में भी पाक की बौखलाहट साफ दिखी कि उसने भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया।

आरएसएस पर कीचड़ उछालकर उसने अपनी शैतानी मानसिकता का ही परिचय दिया है। भारत पाकिस्तान के आतंकवाद और उसकी फौज की नापाक हरकतों का माकूल जवाब देता रहेगा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र को भी आतंकवाद को जल्द परिभाषित करना होगा। टालमटोल ठीक नहीं है। आतंकवाद परिभाषित नहीं है, इसलिए पाक आतंकी पर डाक टिकट जारी करने की हिमाकत करता है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने आतंकवाद के चलते ही पाक को ग्रे-लिस्ट में शामिल किया है। यूएन को सब पता है, फिर भी दोहरा मानदंड अपनाए हुए है। अमेरिका अगर 9/11 हमले का बदला ले सकता है तो भारत 26/11 क्यों नहीं? यूएन को सभी 193 सदस्य देशों के लिए एक भाव रखना चाहिए। पाक से आतंक का सफाया वैश्विक हित में है।

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