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हरिभूमि संपादकीय लेख: एकजुट भारत कोरोना वायरस को देगा मात

सभी वर्गों ने लॉकडाउन रहने के साथ शारीरिक दूरी का पालन कर राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया है। ऐसा लग रहा है कि पूरा राष्ट्र एक साथ चल रहा है। धर्म, जाति, क्षेत्र, सियासत से ऊपर उठकर लोग कोरोना को मात दे रहे हैं।

Coronavirus: कोरोना वायरस के मिले तीन रूप, सिंगल म्यूटेशन में है भारतसिंगल म्यूटेशन में है भारत (फाइल फोटो)

समूचे देश में जारी राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान सभी लोगों ने अब तक जिस तरह शासनादेश का पालन किया है, उससे लगता है कि पूरी जनता कोरोना महामारी के खिलाफ जंग लड़ रही है। सभी वर्गों ने लॉकडाउन रहने के साथ शारीरिक दूरी का पालन कर राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया है। ऐसा लग रहा है कि पूरा राष्ट्र एक साथ चल रहा है। धर्म, जाति, क्षेत्र, सियासत से ऊपर उठकर लोग कोरोना को मात दे रहे हैं।

इस महामारी के संक्रमण चक्र को तोड़ने के लिए और इससे बचे रहने के उपायों (मास्क, सेनिटाइजिंग, फिजिकल डिस्टेंस व लॉकडाउन) को अपनाकर दिखाया है कि संकट से पार पाने की जिजीविषा हम सब में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में समस्त देशवासियों के योगदान को सराहा है। उन्होंने हर वर्ग की तारीफ की। कोरोना वारियर्स में शुमार चिकित्सक, नर्स, दवा व उपकरण बनाने वाले उद्यमी, पुलिस, आशा व आंगनवाड़ी वर्कर्स से लेकर किसान, आवश्यक खाद्य सामग्री जनता तक पहुंचाने वाले व्यापारी तक के योगदान को रेखांकित किया। एक दिन पहले ही लॉकडाउन को एक महीना हुआ है। इस दौरान भारत कोरोना के खिलाफ जंग में और मजबूत हुआ। पहले संक्रमितों की संख्या में वृद्धि प्रतिदिन बीस फीसदी थी, अब आठ फीसदी है। एक महीने में टेस्टिंग में 10 गुना का इजाफा हुआ। शुरू में जहां तीन से चार टेस्टिंग हो रही थी, अब 35 हजार रोजाना हो रही है।

देश में 70 से बढ़कर 900 कोविड अस्पताल हो गए। 1.25 लाख वॉलिंटियर्स तैयार हैं। अब देश खुद टेस्टिंग किट बना रहा है। हर रोज 25 हजार पीपीई किट तैयार हो रही हैं। टेस्टिंग लैब 118 से बढ़कर 360 हो गई, वेंटिलेटर्स 14 हजार से बढ़कर 50 हजार हो गए। देश के 55 देशों को हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा का निर्यात किया। कोरोना से निपटने में पीएम मोदी की रणनीति व उनके नेतृत्व की आज पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। अमेरिका-फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश जहां त्राहिमाम कर रहे हैं, चीन कटघरे में खड़ा है, वहीं भारत की स्थिति काफी बेहतर है और यह संभव हुआ है सरकार के साथ अवाम के कदमताल मिलाकर चलने के संकल्प के चलते। प्रधानमंत्री ने एक बात कही है कि मई के अंत तक अच्छी खबर आने की उम्मीद है। यह इस बात के संकेत हैं कि 3 मई तक जारी लॉकडाउन कुछ ढील के साथ मई के अंत तक बढ़ाया जा सकता है।

ऐसा इसलिए कि एक तो कोरोना से लड़ाई में लॉकडाउन कारगर औजार साबित हुआ है, दूसरा वैश्विक चिकित्सक व विश्व स्वास्थ्य संगठन को उम्मीद है कि भारत में 20 मई तक कोरोना वायरस दम तोड़ देगा। पीएम मोदी ने लॉकडाउन के बाद अपने हर संबोधन में कोरोना से बचाव के उपायों पर जोर दिया है। वे लगातार अवाम से फिजिकल डिस्टेंसिंग अपनाने की अपील करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने दो गज दूरी बहुत है जरूरी की अपील की है। खतरनाक वायरस निपटने का जो इतिहास है, उसमें जिसने भी लापरवाही बरती, खामियाजा भुगता। अमेरिका, फ्रांस, इटली इसके उदाहरण हैं, इसलिए अतिआत्मविश्वास से बचना जरूरी है।

आग, कर्ज और बीमारी मौके पड़ते ही दोबारा उभर जाते हैं, इसलिए हमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए। हमें कहीं भी थूकने की आदत त्यागनी होगी और मास्क पहनकर बाहर निकलने की आदत डालनी होगी। नियमित अंतराल पर हाथ को सेनिटाइज करते रहना होगा। वायरस वाहक मुक्त रहन-सहन अपनाना होगा। ताली, थाली, दीया और मोमबत्ती ने देश को प्रेरित किया है। आज देश टीम की तरह काम कर रहा है। पुलिस को लेकर सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने में आयुर्वेद के प्रति वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ी है। योग के बाद अब आयुर्वेद विश्व में भारत की पहचान बनेगा। इन कदमों से हम कोरोना महामारी पर विजय पाने में सक्षम होंगे।

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