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अंडर-19 वर्ल्ड कप: क्रिकेट की तरह दूसरे खेलों को भी बनाएं पेशेवर

भारत क्रिकेट में नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप चार बार जीत कर भारत ने दिखा दिया है कि उसके सामने दूर-दूर तक कोई नहीं है।

अंडर-19 वर्ल्ड कप: क्रिकेट की तरह दूसरे खेलों को भी बनाएं पेशेवर
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भारत क्रिकेट में नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप चार बार जीत कर भारत ने दिखा दिया है कि उसके सामने दूर-दूर तक कोई नहीं है। अभी विश्व में जितने भी देश क्रिकेट खेल रहे हैं, उनमें से किसी ने भी चार बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब नहीं जीता है। यह भारत के लिए गौरव की बात है कि वह चार दफा अंडर-19 विश्व कप चैंपियन बना है।

भारत ने पहली बार मोहम्मद कैफ की कप्तानी में वर्ष 2000 में अंडर-19 विश्व कप जीता था। उसके बाद 2008 में विराट कोहली की कप्तानी में और 2012 में उन्मुक्त चंद की कप्तानी में भारत ने अंडर-19 विश्व कप पर कब्जा किया था। इस बार भारत ने यह कारनामा पृथ्वी शॉ की कप्तानी में किया है। भारतीय क्रिकेट के लिए यह अच्छी बात है कि जूनियर पीढ़ी विश्व स्तरीय खिताब जीत रही है।

इससे क्रिकेट के लिए पूरी पीढ़ी तैयार हो रही है। यह प्रतिभाओं को निखारने का शानदार तरीका है। करीब दो दशक पहले नई प्रतिभाओं को मांजने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का उतना फोकस नहीं था, जितना आज दिख रहा है। उसका नतीजा भी सामने आ रहा है। क्रिकेट में प्रतिभाओं का अकाल नहीं है। क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में भारत के पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी हैं।

इस वक्त भारत के नाम दो बार क्रिकेट विश्व कप, एक बार टी-20 विश्व कप, चार बार अंडर-19 विश्व कप जीतने और टेस्ट व वनडे में नंबर वन टीम बनने का रिकार्ड है। महिला क्रिकेट टीम भी बेहतर प्रदर्शन कर रही है। ये क्रिकेट के सुनहरे दौर को बयां करते हैं। बीसीसीआई के प्रबंधन में जबसे क्रिकेट पेशेवरों का दबदबा बढ़ा है, तब से घरेलू टूर्नामेंट और खेल के सभी सतर पर सुविधाओं में वृद्धि हुई है।

आईपीएल टूर्नामेंट के चलते भी क्रिकेट खिलाड़ियों के पास पैसे कमाने के अवसर बढ़े हैं। आईसीसी ने अंडर-19 टीम की घोषणा की है, जिसमें विश्व कप जीतने वाली टीम के पांच खिलाड़ियों को प्लेइंग 11 में चुना है। ये हैं-पृथ्वी शॉ, मनजोत कालरा, शुभमन गिल, अनुकूल रॉय और कमलेश नागरकोटी। ये पांचों खिलाड़ी होनहार हैं- आने वाले समय में ये टीम इंडिया का हिस्सा हो सकते हैं।

भारत की इस कामयाबी का श्रेय अंडर-19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ और उनके सहयोगियों की मेहनत को है। द्रविड़ भारत के तकनीकी रूप से सबसे दक्ष क्रिकेटर माने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता का लाभ अंडर-19 टीम के खिलाड़ियों को अवश्य मिला होगा। इनमें से कुछ खिलाड़ी मो़ कैफ व विराट कोहली की तरह भारत का नाम रोशन जरूर करेंगे। इस उपलब्धि से देश में सभी गदगद हैं।

इसी तरह की उपलब्धियां दूसरे खेलों में होतीं तो भारत के लिए और भी अच्छा होता। ओलंपिक में भारत भारी-भरकम दल लेकर जाता है लेकिन कामयाबी के नाम पर दो-तीन पदक ही मिलते हैं। आलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन सवा सौ करोड़ से अधिक आबादी वाले देश भारत की खेलों की दयनीय स्थिति की पोल खोलता है। हमारे अधिकांश खेल देश की लचर नौकरशाही व राजनीति की जकड़ में है और वित्तीय संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

पीटी ऊषा, मिल्खा सिंह, लिएंडर पेस, महेश भूपति, सानिया मिर्जा, अभिनव बिंद्रा, साइना नेहवाल, मैरीकॉम, वाइचुंग भूटिया, गोपी चंद, पीवी सिंधु, विजेंदर कुमार, सुशील कुमार, साक्षी मलिक, जैसे अनेक सफल खिलाड़ियों ने दूसरे खेलों में भारत का नाम रोशन किया है, लेकिन एक तो भारत जैसे विशाल देश के मुकाबले इनकी संख्या कम है, दूसरी इनकी सफलताएं व्यक्तिगत ज्यादा है।

सरकार और खेल बोर्डों का योगदान बहुत कम है। अगर दूसरे खेलों को भी क्रिकेट की तरह ही पेशेवर तरीके से प्रोमोट किया जाय, आईपीएल जैसे टूर्नामेंट कराए जाएं, घरेलू मैचों को बढ़ावा दिया जाय, निजी निवेश बढ़ाया जाय, तो उनके दिन भी फिर सकते हैं।

खेल बोर्डों में सरकार की भूमिका जितनी कम होगी, खेल का उतना ही अधिक विकास होगा। कबड्डी लीग, फुटबॉल लीग, बैडमिंटन लीग जैसे प्रयोग हो रहे हैं और वे सफल भी हो रहे हैं, लेकिन ये काफी नहीं है। खेल की प्रगति के लिए और बहुत कुछ किया जाना चाहिए। देश में मजबूत खेल संस्कृति विकसित करने की जरूरत है।

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