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अशुद्ध गंगाजल और सीलबंद शुद्ध पानी

अब गंगाजल न पीने योग्य है, न मुंह धोने लायक रहा। जल की पवित्रता के हामी लोग इस बात को लेकर बेचैन हैं। अब पापी अपने पापों को धोने के लिए कहां जाएं। क्या चुल्लु भर पानी में डूब मरें।

अशुद्ध गंगाजल और सीलबंद शुद्ध पानी

अब गंगाजल न पीने योग्य है, न मुंह धोने लायक रहा। जल की पवित्रता के हामी लोग इस बात को लेकर बेचैन हैं। अब पापी अपने पापों को धोने के लिए कहां जाएं। क्या चुल्लु भर पानी में डूब मरें। जब पीने पिलाने लायक पानी की इतनी किल्लत है, तब डूबने की बात कोई किस मुंह से करे। ले देकर बोतल में सीलबंद ब्रांडेड होली गेंजेस वॉटर ही समस्या का एकमात्र निदान है।

अलबत्ता यह समाधान ज़रा महंगा है, लेकिन इस अशुद्धता से भरे समय में शुचिता का बेशकीमती विकल्प तो है ही। दुकानों के पारदर्शी शोकेसों में सीलबंद जल है तो यही कलकल करता जीवन का स्टार्टअप है। एक समय था जब गंगा आमजन के लिए आस्थाओं का सारथी। लबालब भरी नदिया में इतना धर्म था कि जी भरकर स्नान करो या अंजुरी भर भर ले जाओ, इसके रीत जाने की कोई आशंका तक न थी।

देशज शब्दावली में हर हर गंगे का उच्चार था और अंग्रेजी की किताबों में गैंजेस रिवर का जिक्र। तब अंग्रेजी पढ़े लिखे लोग इसमें कभी कभार नहाने चले आते तो कहते, हे हे गेंगा।ऐसा करते हुए उन्हें कभी यह न लगता कि वे किसी देसी नदी में स्नान करने की पपरम्परा का निर्वाह कर रहे हैं। गंगा के मैले हो जाने की पहली अधिकारिक सूचना एक फिल्म ने दी थी, जब उसने कहा कि राम तेरी गंगा मैली हो गयी।

यह जानकारी चूंकि भगवान श्रीराम को दी गयी थी तो लोगों ने मान लिया कि यह क्लासिफाइड किस्म की इन्फार्मेशन है और इसे चूंकि रामजी को दिया गया है तो वे तो भली करेंगे ही। अधिकांश ने कहा कि यह बड़े लोगों का आपसी मामला है, इससे हमारा क्या लेना देना। वे आदतन बड़ी श्रद्धा के साथ गंगा में मजे से नहाते, कपड़े धोते निचोड़ते अपने पश्चताप के कचरे का जल प्रवाह करते रहे।

गंगाजल को लेकर हमारी भावुकता बेमिसाल है। अब इसकी पवित्रता ऑनलाइन मिलती है। पोस्ट ऑफिस में भले ही डाक टिकट मिलें न मिलें लेकिन जल मिलता है। शतप्रतिशत गारंटीशुदा नीर यहीं प्राप्त होता है। गंगाजल नदी में कम बहस मुबाहिसों में अधिक दिखता है। गंगा अब नदी नहीं ब्राण्ड है जिसका उत्पादन फेक्ट्री में होता है। दो भाग हाइड्रोजन के साथ एक भाग ऑक्सीजन मिला दी जाए और ऊपर से चंद विटामिन व मिनरल्स बुरक दिए जाएं तो उससे जो द्रव बनता है, वह निसंदेह गंगाजल ही होता है।

गंगाजी के दूषित होने की बात अधिकारिक हो गयी है। यह आस्थावानों के लिए असमंजस से भरा समय है। गंगाजल की शुद्धता रीत गयी तो मानो पुण्य की करेंसी उगलने वाली एटीएम इस सूचना के साथ आउट ऑफ ऑडर हुई कि करेंसी पाने के लिए जोर आजमाइश करें। लेकिन अब रेडीमेड गंगाजल बाज़ार में आ लिया है तो चिंता की क्या बात। बेचारी गंगा को उसके हाल पर छोड़ दें। बाज़ार के पास हमारी हर तरह की धार्मिकता का टिकाऊ विकल्प है।

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